गयाजी में पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 का आज(04 अक्टूबर 2026) दसवां दिन है। रविवार को बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने पवित्र सीताकुंड में आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने अपने माता-पिता और पूर्वजों का विधि-विधान से तर्पण किया। पवित्र जल में स्नान के बाद उन्होंने पुरोहितों की देखरेख में श्राद्ध और तर्पण की रस्में पूरी की। डॉ. प्रेम कुमार ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि गयाजी पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां आकर अपने पूर्वजों का तर्पण करना उनके लिए आस्था का विषय है। पितृपक्ष में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गयाजी पहुंचते हैं। अब तक 28 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यहां आ चुके हैं। ऐसी मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। इसी आस्था के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। पिंडदान के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है गयाजी के विष्णुपद मंदिर, सीताकुंड, प्रेतशिला, रामशिला, देवघाट सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। पिंडदानी अपने निर्धारित कर्मकांड के अनुसार अलग-अलग वेदियों पर पहुंचकर पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। पितृपक्ष के कारण पूरे गया शहर का वातावरण धार्मिक और आध्यात्मिक बना हुआ है। मेला महासंगम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र में साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश, यातायात, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी विभिन्न पिंडवेदी और मेला क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंच रहे तीर्थ यात्री पितृपक्ष मेला महासंगम के दौरान गया पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा भावनात्मक अवसर भी है। यही वजह है कि हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर लोग गया पहुंच रहे हैं और अपने पितरों का तर्पण कर रहे हैं। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार का सीताकुंड पहुंचकर अपने माता-पिता और पितरों का तर्पण करना भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ श्राद्ध कर्म संपन्न किया और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित की। पितृपक्ष के बीच विधानसभा अध्यक्ष का सीताकुंड पहुंचना और तर्पण करना श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय रहा। धार्मिक अनुष्ठान और मोक्ष की कामना 28 लाख से अधिक पिंडदानियों के पहुंचने के साथ गयाजी इन दिनों आस्था के सबसे बड़े संगम में बदल गया है। सीताकुंड से लेकर विष्णुपद और अन्य पिंडवेदियों तक हर तरफ पितरों के प्रति श्रद्धा, धार्मिक अनुष्ठान और मोक्ष की कामना का दृश्य दिखाई दे रहा है। गयाजी में पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 का आज(04 अक्टूबर 2026) दसवां दिन है। रविवार को बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने पवित्र सीताकुंड में आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने अपने माता-पिता और पूर्वजों का विधि-विधान से तर्पण किया। पवित्र जल में स्नान के बाद उन्होंने पुरोहितों की देखरेख में श्राद्ध और तर्पण की रस्में पूरी की। डॉ. प्रेम कुमार ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि गयाजी पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां आकर अपने पूर्वजों का तर्पण करना उनके लिए आस्था का विषय है। पितृपक्ष में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गयाजी पहुंचते हैं। अब तक 28 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यहां आ चुके हैं। ऐसी मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। इसी आस्था के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। पिंडदान के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है गयाजी के विष्णुपद मंदिर, सीताकुंड, प्रेतशिला, रामशिला, देवघाट सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। पिंडदानी अपने निर्धारित कर्मकांड के अनुसार अलग-अलग वेदियों पर पहुंचकर पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। पितृपक्ष के कारण पूरे गया शहर का वातावरण धार्मिक और आध्यात्मिक बना हुआ है। मेला महासंगम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र में साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश, यातायात, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी विभिन्न पिंडवेदी और मेला क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंच रहे तीर्थ यात्री पितृपक्ष मेला महासंगम के दौरान गया पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा भावनात्मक अवसर भी है। यही वजह है कि हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर लोग गया पहुंच रहे हैं और अपने पितरों का तर्पण कर रहे हैं। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार का सीताकुंड पहुंचकर अपने माता-पिता और पितरों का तर्पण करना भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ श्राद्ध कर्म संपन्न किया और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित की। पितृपक्ष के बीच विधानसभा अध्यक्ष का सीताकुंड पहुंचना और तर्पण करना श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय रहा। धार्मिक अनुष्ठान और मोक्ष की कामना 28 लाख से अधिक पिंडदानियों के पहुंचने के साथ गयाजी इन दिनों आस्था के सबसे बड़े संगम में बदल गया है। सीताकुंड से लेकर विष्णुपद और अन्य पिंडवेदियों तक हर तरफ पितरों के प्रति श्रद्धा, धार्मिक अनुष्ठान और मोक्ष की कामना का दृश्य दिखाई दे रहा है।

