ईरान युद्ध में इस्तेमाल हुआ था लजेस एयरबेस, अमेरिका की मदद कर बुरी तरह फंसा पुर्तगाल, भारी बवाल के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

ईरान युद्ध में इस्तेमाल हुआ था लजेस एयरबेस, अमेरिका की मदद कर बुरी तरह फंसा पुर्तगाल, भारी बवाल के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

Portugal US military agreement: पुर्तगाल में अमेरिका की ईरान युद्ध में मदद पर बड़ा विवाद छिड़ गया है। वामपंथी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने बिना सही जांच के अमेरिकी सेना को लजेस एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी।

भारी बवाल के बाद सरकार को बड़ा कदम उठाना पड़ा है। अब पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ऑफिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। यह शिकायत लेफ्ट ब्लॉक पार्टी के सदस्यों ने दाखिल की थी।

जांच में पुर्तगाल में बढ़ा सियासी पारा

जांच की शुरुआत ने देश में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। केंद्र-दक्षिणपंथी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्होंने अमेरिकी अनुरोध को हरी झंडी दिखाते समय नियमों का पूरा ध्यान रखा।

क्यों मचा बवाल?

बता दें कि लजेस एयरबेस पुर्तगाल और अमेरिका के बीच पुराने समझौते के तहत काम करता है। शांति के समय अमेरिका बिना पहले अनुमति मांगे इस बेस का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन जैसे ही कोई युद्ध या लड़ाई शुरू होती है, पुर्तगाल सरकार की मंजूरी जरूरी हो जाती है। मार्च में जब अमेरिका ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों के लिए कुछ ट्रांजिट फ्लाइट्स भेजीं, तब सरकार ने इजाजत दे दी।

विदेश मंत्री ने क्या कहा?

इस पर विदेश मंत्री पाउलो रंगेल ने साफ कहा है कि अनुमति सिर्फ इसलिए दी गई क्योंकि अमेरिका ने भरोसा दिलाया था कि कोई भी कार्रवाई रक्षात्मक रहेगी, जरूरत के मुताबिक होगी, अनुपात में रहेगी और सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित रहेगी। फिर भी विपक्षी दल संतुष्ट नहीं हैं। वे कह रहे हैं कि सरकार ने जल्दबाजी में फैसला लिया और संसद या जनता को पर्याप्त जानकारी नहीं दी।

क्या कह रहा विपक्ष?

लेफ्ट ब्लॉक पार्टी के नेताओं का आरोप है कि यह कदम देश की तटस्थता को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने शिकायत में पूछा है कि क्या सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कानून और अपने संविधान के नियमों का पालन किया।

प्रॉसीक्यूटर ऑफिस ने अभी ज्यादा ब्यौरा नहीं दिया है, लेकिन जांच शुरू होने से साफ है कि मामला गंभीर माना जा रहा है। पुर्तगाल लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी रहा है।

नाटो सदस्य होने के नाते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग सामान्य बात है। लेकिन ईरान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर एयरबेस का इस्तेमाल कई लोगों को चिंता में डाल रहा है।

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