भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को रेसीडेंसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की। आयोग की सार्वजनिक रिपोर्ट में 36 मौतों की जांच का उल्लेख है और 22 मौतों को दूषित पानी से संभावित रूप से जुड़ा माना गया है। सीवेज और पेयजल लाइन की खामियों पर सवाल सिंघार ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की योजना, रखरखाव और निगरानी में लंबे समय से चली आ रही कमियों का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक कई स्थानों पर सीवर और पेयजल लाइनें बेहद करीब, समानांतर या एक-दूसरे को क्रॉस करती मिलीं। सीवर में रिसाव और पेयजल लाइन में निगेटिव प्रेशर से दूषित पानी के नेटवर्क में पहुंचने की संभावना बताई गई है। उन्होंने कहा कि पानी की पाइपलाइन और सीवरेज नेटवर्क के ब्लूप्रिंट, डिजाइन और अलाइनमेंट जैसे तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना गंभीर सवाल है। यदि नेटवर्क का रिकॉर्ड ही नहीं है तो लीकेज या क्रॉस कनेक्शन की स्थिति में लाइन को ट्रेस करना मुश्किल होगा। 66 दिन फाइल लंबित रहने का मुद्दा उठाया सिंघार ने फाइल मूवमेंट का जिक्र करते हुए कहा कि संबंधित फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिन तक लंबित रही। उन्होंने कहा कि आयोग ने केवल फाइल लंबित रहने के आधार पर मेयर की व्यक्तिगत लापरवाही तय नहीं की, लेकिन यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि फाइल इतने लंबे समय तक क्यों रुकी रही। यहां आयोग की रिपोर्ट का व्यापक निष्कर्ष यह है कि त्रासदी किसी एक तत्काल घटना के बजाय वर्षों की तकनीकी, प्रशासनिक और निगरानी संबंधी कमियों के संयुक्त प्रभाव से बनी। पाइपलाइन बदलने में देरी का भी सवाल सिंघार ने करीब ढाई करोड़ रुपए के टेंडर की प्रक्रिया में देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव और प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी के कारण जरूरी काम समय पर पूरा नहीं हो सका। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में भी पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में लंबी देरी को त्रासदी के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक परियोजना में टेंडर से काम पूरा होने तक 859 दिन लगे। जनवरी में शिकायत के बाद भी सवाल सिंघार ने कहा कि उन्होंने 8 जनवरी को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इंदौर में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की थी। उनके मुताबिक भागीरथपुरा की घटना सामने आने के बाद भी दूषित पानी और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें सामने आती रहीं। जांच रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा में दूषित पानी की आपूर्ति 6 फरवरी 2026 तक जारी रहने के रिकॉर्ड मिले हैं। पानी के नमूनों में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया भी पाए गए थे। बोले- जिम्मेदारी तय हो, प्रभावित परिवारों को राहत मिले नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जिनकी जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी और प्रभावित परिवारों को आयोग की सिफारिश के मुताबिक सहायता कब मिलेगी। आयोग ने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति और लंबे समय तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने समेत कई सिफारिशें की हैं। जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सिंघार के आरोप, रिपोर्ट में अलग निष्कर्ष सिंघार ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का दबाव बनाया गया और मेयर पुष्यमित्र भार्गव तथा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जिम्मेदारी को बचाने का प्रयास हुआ। यह सिंघार का आरोप है। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार न्यायिक आयोग ने जनप्रतिनिधियों को घटना के लिए जिम्मेदार नहीं माना और उसकी मुख्य टिप्पणियां अधिकारियों, तकनीकी व्यवस्था, निगरानी तथा पाइपलाइन बदलने में हुई देरी से संबंधित हैं।

