पठानकोट और गुरदासपुर में अवैध खनन पर हाई कोर्ट सख्त:पंजाब सरकार को 4 हफ्ते की मोहलत, कार्रवाई न होने पर दिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच के आदेश

पठानकोट और गुरदासपुर में अवैध खनन पर हाई कोर्ट सख्त:पंजाब सरकार को 4 हफ्ते की मोहलत, कार्रवाई न होने पर दिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच के आदेश

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब के दो सरहदी जिलों पठानकोट और गुरदासपुर में बड़े पैमाने पर चल रहे कथित अवैध खनन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पंजाब सरकार अगले चार हफ़्तों के भीतर सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों और जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करती है, तो मामले की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंप दी जाएगी। यह कड़ा आदेश मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायाधीश रोहित कपूर की खंडपीठ ने जीएस पन्नू बनाम केंद्र सरकार व अन्य जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान जारी किया। हाई कोर्ट के पिछले आदेश के बावजूद पंजाब खनन विभाग के डायरेक्टर का हलफनामा दाखिल न किए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने 48 घंटे के भीतर एडवांस कॉपी के साथ हलफनामा दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया है। सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा: 233 जगहों पर हो रहा अवैध खनन 233 अवैध खनन स्थल चिन्हित: कोर्ट द्वारा जारी आदेशों में लिखा है कि अदालत को अवगत कराया गया कि सर्वे ऑफ इंडिया की 3 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में लगभग 233 स्थानों पर अवैध खनन गतिविधियां चलाई जा रही हैं। खनन निदेशक के हलफनामे पर नाराजगी: हाई कोर्ट के पिछले आदेश के बावजूद पंजाब के डायरेक्टर (माइंस/खनन) का हलफनामा दाखिल न किए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने 48 घंटे के भीतर एडवांस कॉपी के साथ हलफनामा दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया है।
बीएसएफ को भी बनाया गया पक्षकार: पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के माध्यम से बीएसएफ को भी मामले में प्रतिवादी बनाने की अनुमति दी थी। अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही होगी तय; अगली सुनवाई 16 नवंबर को हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देख कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन करे और दोषी व्यक्तियों व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ 4 सप्ताह के भीतर उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करे। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो कोर्ट मामले की जांच किसी निष्पक्ष या स्वतंत्र एजेंसी (जैसे सीबीआई/अन्य) को सौंपने के लिए मजबूर होगी। अदालत ने आदेश की कॉपी में लिखा कि अगली सुनवाई तक यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है, तो उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। अदालत ने पंजाब सरकार को कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर तय की है।

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