यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। सऊदी अरब समर्थित यमन की सरकारी सेना भी हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। दोनों पक्षों के बीच समय-समय पर मुठभेड़ भी होती है और अब एक बार फिर ऐसा ही देखने को मिला है।
कई ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई
यमन की सरकारी सेना ने आज बताया कि ताइज़ प्रांत में कई मोर्चों पर उनकी और हूतियों के बीच मुठभेड़ हुई। यमनी सेना ने हूतियों के कई ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई करते हुए तोप से हमले और हवाई हमले करने की भी जानकारी दी। सेना के अनुसार पश्चिमी ताइज़ के बनी बकारी, जबल हबाशी और हमीर इलाकों में दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ हुई। पश्चिमी ताइज़ में अल-कधा और हमीर मोर्चों के साथ-साथ ताइज़ शहर के उत्तर-पूर्व में कलाबा मोर्चे पर भी सेना की हूतियों के साथ भारी झड़पें हुईं। ये ताज़ा झड़पें बुधवार को यमन की सेना द्वारा ताइज़ और देश के अन्य हिस्सों में हूती विद्रोहियों के खिलाफ चलाए गए कई सैन्य अभियानों के बाद हुई हैं।
हूतियों को हुआ नुकसान
सेना के अनुसार सैन्य ड्रोन्स ने अल-कधा मोर्चे पर हूती ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें उनकी एक 120 मिमी की तोप तबाह हो गई और गोला-बारूद के एक डिपो में आग लग गई। साथ ही सेना के फाइटर जेट्स ने ताइज़ के पश्चिम में अल-वाज़ियाह इलाके में हूतियों के ठिकानों पर भी हमले किए। सेना ने उत्तर-पश्चिमी ताइज़ में जबल घराभ और ताबा यासीन में जमा हुए हूती विद्रोहियों को भी निशाना बनाया। इसके अलावा तोपखाने की गोलाबारी से ताइज़ के पश्चिम में अल-अशरूह मोर्चे और शहर के उत्तर में असिफ़रा मोर्चे पर मौजूद हूती ठिकानों को नुकसान हुआ।
हूतियों और सऊदी अरब के बीच तनाव की क्या है वजह?
यमन में संघर्ष 2014 के आखिर में तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ यमन की सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। इस वजह से हूती विद्रोहियों और यमन की सेना के बीच भी रुक-रूककर जंग जारी है।

