भारत में जून से सितंबर के बीच इस साल दीर्घावधि औसत (एलपीए) की 87.4 प्रतिशत बारिश हुई, जो 2001 के बाद मानसून के मौसम में चौथी सबसे कम बारिश है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को यह जानकारी दी। आईएमडी ने अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि इस मानसून में बारिश की कमी का एक प्रमुख कारण उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में जून में उभरी अल नीनो की स्थिति थी, जो उसके बाद से मजबूत होती गई।
आईएमडी ने कहा कि फिलहाल अल नीनो की स्थिति मजबूत है और इसके मार्च 2027 तक बने रहने की संभावना है। विभाग के अनुसार, इस मानसून देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिलीमीटर होती है। यह सामान्य से 13 प्रतिशत कम है।
आईएमडी ने 29 मई को जारी मानसून के पूर्वानुमान में कहा था कि बारिश एलपीए की 90 प्रतिशत रह सकती है, जिसमें चार प्रतिशत की मॉडल त्रुटि थी। इससे पहले 13 अप्रैल को विभाग ने मानसून में एलपीए की 92 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था। अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) नामक जलवायु घटना के तीन चरणों में से एक है।
इसका पृथ्वी पर गर्म प्रभाव पड़ता है और इसे भारत में कम मानसूनी बारिश से जोड़ा जाता है। इसके विपरीत चरण ला-नीना का आमतौर पर ठंडा प्रभाव पड़ता है। ईएनएसओ की एक तटस्थ स्थिति भी होती है।
मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष बारिश की कमी जून में सबसे अधिक 35.4 प्रतिशत रही। इसके बाद अगस्त में 16.3 प्रतिशत और सितंबर में 7.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जुलाई ही एकमात्र ऐसा महीना रहा, जब सामान्य से अधिक बारिश हुई और इस दौरान एक प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
आईएमडी के महानिदेशक मौसम विज्ञान डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने एक बयान में कहा कि यदि कम दबाव की प्रणालियों के कारण अतिरिक्त बारिश नहीं हुई होती तो देश में बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी। उन्होंने कहा कि इस मौसम में 14 कम दबाव की प्रणालियां बनीं और कुल 77 दिन कम दबाव की प्रणालियां सक्रिय रहीं, जबकि सामान्य तौर पर यह अवधि 57 दिन होती है। मानसून की वापसी के बारे में महापात्र ने कहा कि अब तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से मानसून की वापसी हो चुकी है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट चुका है।

