पार्षद सिर्फ शिकायतें पहुंचाने वाला नहीं, ये भी हैं उसके अधिकार और जिम्मेदारियां; जानिए क्या-क्या कर सकता है आपका प्रतिनिधि?

पार्षद सिर्फ शिकायतें पहुंचाने वाला नहीं, ये भी हैं उसके अधिकार और जिम्मेदारियां; जानिए क्या-क्या कर सकता है आपका प्रतिनिधि?

जयपुर. पार्षद बनते ही सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब अपने वार्ड के लिए क्या कर सकते हैं? सड़क टूटी हो, नाली जाम हो, सफाई व्यवस्था बिगड़ी हो, स्ट्रीट लाइट बंद हो या पार्क की हालत खराब हो… आमजन सबसे पहले अपने पार्षद के पास पहुंचता है। लेकिन क्या पार्षद का काम सिर्फ शिकायत को संबंधित अधिकारी तक पहुंचाना है? नहीं।

वार्ड की आवाज से विकास तक, जानिए पार्षद की भूमिका

पार्षद की भूमिका इससे कहीं व्यापक है। नगर निकाय की व्यवस्था में वह जनता और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होता है। वार्ड की समस्याओं को सदन तक पहुंचाने, विकास से जुड़े प्रस्तावों पर अपनी बात रखने, संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने और स्वीकृत कार्यों की प्रगति पर नजर रखने में उसकी अहम भूमिका होती है। नगरपालिका कानून के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य, सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक सड़कें, स्ट्रीट लाइट, पार्क और स्थानीय विकास जैसे कई विषय नगर निकायों की जिम्मेदारियों में आते हैं। ऐसे में पार्षद इन विषयों को लेकर सवाल उठाने, जरूरत सामने रखने और समाधान की प्रक्रिया पर नजर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जनता तक काम की प्रगति भी पहुंचाने में भूमिका

वार्ड में किसी समस्या की जानकारी मिलना पार्षद की जिम्मेदारी की शुरुआत है। समस्या को संबंधित व्यवस्था तक पहुंचाने के साथ यह देखना भी जरूरी है कि उस पर कार्रवाई हुई या नहीं। जरूरत पड़ने पर सदन में मुद्दा उठाना, अधिकारियों से स्थिति जानना और जनता तक काम की प्रगति की जानकारी पहुंचाना भी जनप्रतिनिधि की भूमिका का हिस्सा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि पार्षद हर काम का आदेश दे सकता है। किस सड़क की मरम्मत होगी, किस निर्माण को मंजूरी मिलेगी या किस विभाग को क्या काम करना है-इन सबके लिए अलग-अलग नियम, अधिकारी और स्वीकृति की प्रक्रियाएं होती हैं।

इसलिए अभियान: ताकि विकास हो, जनता को राहत मिले

राजस्थान पत्रिका के ‘सेवा का संकल्प’ अभियान के तहत इसी कड़ी में हम समझ रहे हैं कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियां क्या हैं, उनके पास कौन से अधिकार हैं और उनकी सीमाएं कहां तक हैं।

ऐसे समझें पार्षद की अहमियत

जनता और नगर निकाय के बीच कड़ी: पार्षद वार्डवासियों की स्थानीय समस्याओं को नगर निकाय की व्यवस्था तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सदन में वार्ड की आवाज: वार्ड की जरूरतों और समस्याओं को सदन में उठाया जा सकता है।

वार्ड समितियों में भागीदारी: वार्ड कमेटियों के माध्यम से सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन, वार्ड विकास योजना व विकास कार्यों के क्रियान्वयन जैसे विषयों में भागीदारी का प्रावधान है।

प्रस्ताव रखने की भूमिका: विकास से जुड़े विषयों पर पार्षद अपनी बात रख सकता है व प्रस्तावों के माध्यम से जरूरत सामने ला सकता है।

काम की निगरानी: स्वीकृत विकास कार्यों की प्रगति और वार्ड में जनसुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली जा सकती है।

जनता की प्राथमिकताएं सामने रखना: वार्ड की वास्तविक जरूरतों को नगर निकाय के सामने रखने में पार्षद की भूमिका अहम है।

लेकिन… हर काम का अधिकार पार्षद के पास नहीं

  • हर सड़क पार्षद के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। सड़क किस विभाग या एजेंसी के अधीन है, इसके आधार पर कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होती है।
  • हर निर्माण का फैसला पार्षद नहीं कर सकता। विकास कार्यों के लिए तकनीकी जांच, प्रशासनिक स्वीकृति, बजट और अन्य प्रक्रियाएं जरूरी हो सकती हैं।
  • हर शिकायत का समाधान पार्षद के स्तर पर संभव नहीं। कई मामलों में दूसरे विभागों और अधिकारियों की भूमिका होती है।
  • बजट और नियमों की भी सीमा है। किसी काम की जरूरत होना अलग बात है और उसके लिए स्वीकृति व बजट उपलब्ध होना अलग।

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