छत्तीसगढ़ सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से अग्रसेन धाम में अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन ‘शगुन 2026’ का आयोजन किया गया। इसमें छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र से युवक-युवतियां शामिल हुए। 200 से ज्यादा युवाओं ने मंच से अपना परिचय दिया, जीवनसाथी को लेकर अपनी पसंद और अपेक्षाएं बताईं। युवाओं ने परिवार, करियर, धार्मिक सोच और संस्कारों को समझने वाले जीवनसाथी की इच्छा जताई। सम्मेलन में परिचय को व्यवस्थित बनाने के लिए मंच पर स्क्रीन लगाई गई थी। युवक-युवतियों के परिचय के दौरान स्क्रीन पर उनकी शिक्षा, व्यवसाय, परिवार और अन्य जानकारी दिखाई गई। हर प्रतिभागी को एक कोड क्रमांक दिया गया। परिवार इस कोड के आधार पर परिचय पुस्तिका में जानकारी देखकर आगे संपर्क कर सकेंगे। इसके अलावा अलग मिलन कक्ष बनाया गया था, जहां पसंद आने पर दोनों परिवार और युवक-युवती आपस में बातचीत कर सकते हैं। ‘शगुन 2026’ पुस्तिका का विमोचन, 500 से ज्यादा परिचय कार्यक्रम में ‘शगुन 2026’ परिचय पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इसमें 500 से ज्यादा युवक-युवतियों की जानकारी प्रकाशित की गई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रकाश मोदी ने की। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कांवाडिया और छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा रहे। इस दौरान विनोद जैन बड़जात्या, नरेंद्र जैन बड़जात्या, संजय बड़जात्या, गजेंद्र पाटनी, संदीप लुहारिया, अजीत जैन, क्षितिज जैन और संजय जैन सहित समाज के लोग मौजूद रहे। मंच संचालन अनामिका जैन और तल्लीन बड़जात्या ने किया। मुनि पुनीत सागर बोले- श्रावक धर्म भी मोक्ष मार्ग की साधना धर्मसभा में मुनि पुनीत सागर महाराज ने कहा कि दुखों से छुटकारे के लिए श्रवण और साधना का मार्ग अपनाना चाहिए। जो व्यक्ति मुनि बनने की क्षमता नहीं रखता, उसे श्रावक धर्म का पालन करना चाहिए। उन्होंने मुनि और श्रावक धर्म को धर्म रूपी रथ के दो पहिए बताया। उन्होंने कर्म और पुरुषार्थ का महत्व बताते हुए कहा कि जैसा बीज बोया जाता है, वैसा ही फल मिलता है। उन्होंने युवाओं से दिन में कम से कम एक बार प्रभु के दर्शन करने का संकल्प लेने और भक्ति के साथ अपने कर्मों के प्रति जागरूक रहने की बात कही। आगम सागर बोले- जीवनसाथी को भी धर्म के मार्ग पर साथ लेकर चलें मुनि आगम सागर महाराज ने कहा कि विवाह केवल सांसारिक जीवन की व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवनसाथी के साथ धर्म और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि युवतियों को जीवनसाथी चुनने में अपनी पसंद और विचार रखने चाहिए और अभिभावकों को योग्य जीवनसाथी के चयन में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आत्मत्व का विचार रखने और प्रभु की भक्ति करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में अभिषेक मोदी ने भजनों की प्रस्तुति दी।

