गयाजी में इलेक्ट्रिक लिटर पिकर मशीन से होगी सफाई:देवघाट और विष्णुपद पर मेयर ने किया शुभारंभ, कम समय में ज्यादा होगा काम

गयाजी में इलेक्ट्रिक लिटर पिकर मशीन से होगी सफाई:देवघाट और विष्णुपद पर मेयर ने किया शुभारंभ, कम समय में ज्यादा होगा काम

पितृपक्ष मेला महासंगम के दौरान गयाजी में साफ-सफाई के लिए गयाजी नगर निगम ने इलेक्ट्रिक लिटर पिकर वैक्यूम क्लीनर मशीन शुरू की है। इसका उपयोग देवघाट और विष्णुपद मंदिर के आसपास के इलाकों में होगा। मेयर गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन और पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने पूजा-अर्चना कर इसका शुभारंभ किया। अधिकारियों के अनुसार, यह मशीन कम समय में ज्यादा जगह साफ कर सकती है और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सफाई बेहतर बनाएगी। यह मशीन पूरी तरह इलेक्ट्रिक है और बैटरी से चलती है, जिससे कोई धुआं या प्रदूषण नहीं होगा। इसके वैक्यूम सिस्टम से सड़क, घाट और मंदिर के आसपास पड़े कागज, पॉलीथिन, फूल-माला और छोटे कचरे तेजी से उठाए जा सकेंगे। इससे सफाईकर्मियों को राहत मिलेगी और काम में तेजी आएगी। वैक्यूम सिस्टम से उठाकर मशीन में जमा किया जाएगा भीड़ बढ़ने के साथ ही घाटों और आसपास के इलाकों में सफाई बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। नई लिटर पिकर मशीन के जरिए बिखरे कचरे को वैक्यूम सिस्टम से उठाकर मशीन में जमा किया जाएगा। इसके बाद कचरे को निर्धारित स्थान पर ले जाकर उसका निस्तारण किया जाएगा। इससे घाटों और मंदिर परिसर में गंदगी कम होगी और श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा। नगर निगम का कहना है कि मशीन का संचालन भीड़ के अनुसार अलग-अलग समय पर किया जाएगा। खासकर सुबह और शाम के समय, जब घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है, तब मशीन से सफाई कराई जाएगी। इससे प्रमुख धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई लगातार बनी रहेगी।
मानव बल का दबाव घटेगा, सफाईकर्मियों को मिलेगी राहत अभी तक घाटों और मेला क्षेत्र की सफाई में मानव बल का सबसे अधिक इस्तेमाल होता था। सफाईकर्मी हाथों से कचरा उठाकर उसे एक स्थान पर जमा करते थे। भीड़भाड़ और लगातार बढ़ते कचरे के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। नगर निगम अब मानव संसाधन के साथ आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मशीनों के इस्तेमाल से सफाईकर्मियों पर काम का दबाव कम होगा और वे अधिक व्यवस्थित तरीके से सफाई कार्य कर सकेंगे। साथ ही, कचरे के सीधे संपर्क में आने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम को भी कम किया जा सकेगा।
पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रिक और बैटरी चालित मशीन होने के कारण इससे प्रदूषण नहीं होगा। पितृपक्ष जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। डीजल या पेट्रोल से चलने वाली मशीनों की तुलना में इलेक्ट्रिक मशीनें अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती हैं। नगर निगम का लक्ष्य है कि मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से और मजबूत किया जाए। आने वाले दिनों में भूमिगत नालियों और गंदे पानी की सफाई के लिए रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में भी काम करने की तैयारी है।
मेयर गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन और पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नगर निगम की पूरी टीम लगातार मेला क्षेत्र में काम कर रही है। पितृपक्ष मेला महासंगम के दौरान गयाजी में साफ-सफाई के लिए गयाजी नगर निगम ने इलेक्ट्रिक लिटर पिकर वैक्यूम क्लीनर मशीन शुरू की है। इसका उपयोग देवघाट और विष्णुपद मंदिर के आसपास के इलाकों में होगा। मेयर गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन और पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने पूजा-अर्चना कर इसका शुभारंभ किया। अधिकारियों के अनुसार, यह मशीन कम समय में ज्यादा जगह साफ कर सकती है और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सफाई बेहतर बनाएगी। यह मशीन पूरी तरह इलेक्ट्रिक है और बैटरी से चलती है, जिससे कोई धुआं या प्रदूषण नहीं होगा। इसके वैक्यूम सिस्टम से सड़क, घाट और मंदिर के आसपास पड़े कागज, पॉलीथिन, फूल-माला और छोटे कचरे तेजी से उठाए जा सकेंगे। इससे सफाईकर्मियों को राहत मिलेगी और काम में तेजी आएगी। वैक्यूम सिस्टम से उठाकर मशीन में जमा किया जाएगा भीड़ बढ़ने के साथ ही घाटों और आसपास के इलाकों में सफाई बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। नई लिटर पिकर मशीन के जरिए बिखरे कचरे को वैक्यूम सिस्टम से उठाकर मशीन में जमा किया जाएगा। इसके बाद कचरे को निर्धारित स्थान पर ले जाकर उसका निस्तारण किया जाएगा। इससे घाटों और मंदिर परिसर में गंदगी कम होगी और श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा। नगर निगम का कहना है कि मशीन का संचालन भीड़ के अनुसार अलग-अलग समय पर किया जाएगा। खासकर सुबह और शाम के समय, जब घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है, तब मशीन से सफाई कराई जाएगी। इससे प्रमुख धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई लगातार बनी रहेगी।
मानव बल का दबाव घटेगा, सफाईकर्मियों को मिलेगी राहत अभी तक घाटों और मेला क्षेत्र की सफाई में मानव बल का सबसे अधिक इस्तेमाल होता था। सफाईकर्मी हाथों से कचरा उठाकर उसे एक स्थान पर जमा करते थे। भीड़भाड़ और लगातार बढ़ते कचरे के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। नगर निगम अब मानव संसाधन के साथ आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मशीनों के इस्तेमाल से सफाईकर्मियों पर काम का दबाव कम होगा और वे अधिक व्यवस्थित तरीके से सफाई कार्य कर सकेंगे। साथ ही, कचरे के सीधे संपर्क में आने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम को भी कम किया जा सकेगा।
पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रिक और बैटरी चालित मशीन होने के कारण इससे प्रदूषण नहीं होगा। पितृपक्ष जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। डीजल या पेट्रोल से चलने वाली मशीनों की तुलना में इलेक्ट्रिक मशीनें अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती हैं। नगर निगम का लक्ष्य है कि मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से और मजबूत किया जाए। आने वाले दिनों में भूमिगत नालियों और गंदे पानी की सफाई के लिए रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में भी काम करने की तैयारी है।
मेयर गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन और पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नगर निगम की पूरी टीम लगातार मेला क्षेत्र में काम कर रही है।  

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