देश भर में सितंबर माह को तितलियों के अध्ययन, अवलोकन और संरक्षण के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। इसी सिलसिले में नागरिक विज्ञान आधारित कार्यक्रमों के तहत नालंदा में मगध नेचर कंजर्वेशन ट्रस्ट की ओर से राजगीर की ऐतिहासिक रत्नागिरी पहाड़ी पर एक दिवसीय ‘तितली वॉक’ का सफल आयोजन किया गया। इस वॉक का मुख्य उद्देश्य प्रकृति प्रेमियों, छात्रों और शोधकर्ताओं को तितलियों की विविधता, उनके व्यवहार, खतरों और संरक्षण के साथ-साथ पौधों से जुड़े गहरे पारिस्थितिक संबंधों से रूबरू कराना था। फील्ड में सीखी टैक्सोनॉमी और मड-पडलिंग की बारीकियां वॉक के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को फील्ड में तितलियों की पहचान, उनकी शारीरिक बनावट (टैक्सोनॉमी), व्यवहार और मड-पडलिंग जैसी गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी दी। इसके साथ ही तितलियों और पौधों के पारस्परिक रिश्ते को विस्तार से समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि तितलियों के कैटरपिलर अपने पोषण और विकास के लिए विशेष होस्ट प्लांट्स पर निर्भर होते हैं, जबकि वयस्क तितलियां फूलों से नेक्टर जुटाते हुए परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार पौधे तितलियों को आश्रय देते हैं और तितलियां वनस्पतियों के संवर्धन में मदद करती हैं।
‘आई नैचुरलिस्ट’ पर दर्ज हुए आंकड़े, बटरफ्लाई रेस में पुरस्कृत हुए छात्र कार्यक्रम को तकनीकी रूप से सशक्त और रोचक बनाने के लिए प्रतिभागियों को वैश्विक नागरिक विज्ञान प्लेटफॉर्म ‘आई नैचुरलिस्ट’ ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान आयोजित ‘बटरफ्लाई रेस’ में प्रतिभागियों ने मोबाइल फोन के जरिए अपने अवलोकनों को दर्ज किया, जिसमें सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को संस्था की ओर से पुरस्कृत भी किया गया। मगध विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने तितलियों और स्थानीय जैव विविधता पर शोध करने की रुचि दिखाई, जिस पर ट्रस्ट ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। दुर्लभ ‘पर्पल लीफ ब्लू’ बनी आकर्षण का केंद्र वॉक के दौरान प्रतिभागियों ने ‘पर्पल लीफ ब्लू’ और ‘तौनी राजा’ जैसी बेहद कम दिखने वाली तितलियों का प्रत्यक्ष दीदार किया। विशेषकर पर्पल लीफ ब्लू पूरी वॉक के दौरान प्रतिभागियों के आसपास मंडराती रही और कई बार खुद उनके हाथों पर आकर बैठ गई, जो सभी के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। संस्था के शिवनाथ कुमार ने बताया कि देश भर में तितलियों की लगभग 1417 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अकेले नालंदा जिले में संस्था द्वारा अब तक करीब 90 प्रजातियों को रिकॉर्ड किया जा चुका है। पर्यावरण स्वास्थ्य की संकेतक हैं तितलियां ट्रस्ट के समीर राज ने तेजी से हो रहे विकास और प्राकृतिक आवासों के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कीट-पतंगों को अक्सर नुकसान पहुंचाने वाले जीव के रूप में देखा जाता है, जबकि तितलियां पारिस्थितिकी तंत्र में परागण की धुरी हैं और पर्यावरण के स्वास्थ्य को परखने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। इस तितली वॉक में वन्यजीव प्रेमी अभिषेक, टिंकू राज यादव, नालंदा कॉलेज की अंजू कुमारी, चाहत कुलीन, यूथ एक्शन ग्रुप के अमन कुमार और नालंदा विश्वविद्यालय के शशांक कश्यप, प्रदीप कुमार, आनंद किशोर और निशांत राज ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए संरक्षण का संकल्प लिया। देश भर में सितंबर माह को तितलियों के अध्ययन, अवलोकन और संरक्षण के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। इसी सिलसिले में नागरिक विज्ञान आधारित कार्यक्रमों के तहत नालंदा में मगध नेचर कंजर्वेशन ट्रस्ट की ओर से राजगीर की ऐतिहासिक रत्नागिरी पहाड़ी पर एक दिवसीय ‘तितली वॉक’ का सफल आयोजन किया गया। इस वॉक का मुख्य उद्देश्य प्रकृति प्रेमियों, छात्रों और शोधकर्ताओं को तितलियों की विविधता, उनके व्यवहार, खतरों और संरक्षण के साथ-साथ पौधों से जुड़े गहरे पारिस्थितिक संबंधों से रूबरू कराना था। फील्ड में सीखी टैक्सोनॉमी और मड-पडलिंग की बारीकियां वॉक के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को फील्ड में तितलियों की पहचान, उनकी शारीरिक बनावट (टैक्सोनॉमी), व्यवहार और मड-पडलिंग जैसी गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी दी। इसके साथ ही तितलियों और पौधों के पारस्परिक रिश्ते को विस्तार से समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि तितलियों के कैटरपिलर अपने पोषण और विकास के लिए विशेष होस्ट प्लांट्स पर निर्भर होते हैं, जबकि वयस्क तितलियां फूलों से नेक्टर जुटाते हुए परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार पौधे तितलियों को आश्रय देते हैं और तितलियां वनस्पतियों के संवर्धन में मदद करती हैं।
‘आई नैचुरलिस्ट’ पर दर्ज हुए आंकड़े, बटरफ्लाई रेस में पुरस्कृत हुए छात्र कार्यक्रम को तकनीकी रूप से सशक्त और रोचक बनाने के लिए प्रतिभागियों को वैश्विक नागरिक विज्ञान प्लेटफॉर्म ‘आई नैचुरलिस्ट’ ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान आयोजित ‘बटरफ्लाई रेस’ में प्रतिभागियों ने मोबाइल फोन के जरिए अपने अवलोकनों को दर्ज किया, जिसमें सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को संस्था की ओर से पुरस्कृत भी किया गया। मगध विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने तितलियों और स्थानीय जैव विविधता पर शोध करने की रुचि दिखाई, जिस पर ट्रस्ट ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। दुर्लभ ‘पर्पल लीफ ब्लू’ बनी आकर्षण का केंद्र वॉक के दौरान प्रतिभागियों ने ‘पर्पल लीफ ब्लू’ और ‘तौनी राजा’ जैसी बेहद कम दिखने वाली तितलियों का प्रत्यक्ष दीदार किया। विशेषकर पर्पल लीफ ब्लू पूरी वॉक के दौरान प्रतिभागियों के आसपास मंडराती रही और कई बार खुद उनके हाथों पर आकर बैठ गई, जो सभी के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। संस्था के शिवनाथ कुमार ने बताया कि देश भर में तितलियों की लगभग 1417 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अकेले नालंदा जिले में संस्था द्वारा अब तक करीब 90 प्रजातियों को रिकॉर्ड किया जा चुका है। पर्यावरण स्वास्थ्य की संकेतक हैं तितलियां ट्रस्ट के समीर राज ने तेजी से हो रहे विकास और प्राकृतिक आवासों के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कीट-पतंगों को अक्सर नुकसान पहुंचाने वाले जीव के रूप में देखा जाता है, जबकि तितलियां पारिस्थितिकी तंत्र में परागण की धुरी हैं और पर्यावरण के स्वास्थ्य को परखने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। इस तितली वॉक में वन्यजीव प्रेमी अभिषेक, टिंकू राज यादव, नालंदा कॉलेज की अंजू कुमारी, चाहत कुलीन, यूथ एक्शन ग्रुप के अमन कुमार और नालंदा विश्वविद्यालय के शशांक कश्यप, प्रदीप कुमार, आनंद किशोर और निशांत राज ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए संरक्षण का संकल्प लिया।

