कांके टॉक्स संवाद 2026; हरिवंश बोले:संवाद खत्म होता है तो संदेह शुरू होता है, यह टूटे तो अविश्वास और संदेह की स्थिति पैदा होती है

कांके टॉक्स संवाद 2026; हरिवंश बोले:संवाद खत्म होता है तो संदेह शुरू होता है, यह टूटे तो अविश्वास और संदेह की स्थिति पैदा होती है

“संवाद खत्म होता है तो संदेह शुरू होता है।” राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने रविवार को द सेलिब्रेशन, रांची में आयोजित कांके टॉक्स संवाद 2026 में यह बात कही। कांके टॉक्स के 100 से अधिक संवाद पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘स्वस्थ संवाद • स्वस्थ समाज’ था। कार्यक्रम में हरिवंश के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, वरिष्ठ पत्रकार एवं पद्मश्री बलबीर दत्त, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रशांत आनंद और जीवनशैली चिंतक अरुण ऋषि स्वर्गीय ने अलग-अलग विषयों पर विचार रखे। कार्यक्रम को स्वयं, डिजिटल जीवन, व्यवस्था, समाज एवं संस्कृति और लोकतंत्र पांच अध्यायों में बांटा गया था। नीति के खिलाफ लिखिए, व्यक्ति के खिलाफ नहीं हरिवंश ने कहा कि संवाद केवल दूसरे तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वयं तक पहुंचने की प्रक्रिया भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोगों में सुनने का धैर्य उतना ही है, जितनी बोलने की लालसा। आदिवासी समाज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां सामूहिक संवाद की परंपरा रही है और ‘मैं’ से अधिक ‘हम’ को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा, “नीति के खिलाफ लिखिए, व्यक्ति के खिलाफ नहीं।” हरिवंश ने देशहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। संसद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज भी अनेक समस्याओं का समाधान संवाद से ही निकलता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उन्होंने दीर्घकालिक सोच के साथ शोध और विकास की जरूरत बतायी। एआई ठीक, लेकिन कृत्रिम जीवन की ओर बढ़ रहे अर्जुन मुंडा ने आदिवासी समाज, संस्कृति, तकनीक और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “कुछ लोग सुनते हैं पर बोलते नहीं, कुछ बोलते हैं पर सुनते नहीं। जब सोचते हैं तो करते नहीं और करते हैं तब सोचते नहीं।” उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति ने लोगों को जोड़ा जरूर है, लेकिन परिवार के बीच भी अकेलापन बढ़ रहा है। उनके अनुसार, “तंत्र का उपयोग करने के लिए तंत्र बनता है, लेकिन आज तंत्र हमारा उपयोग कर रहा है।” एआई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “एआई तो ठीक है, लेकिन हम कृत्रिम जीवन की ओर बढ़ते जा रहे हैं। हम जी जरूर रहे हैं, लेकिन भाव की कमी होती जा रही है।” देशहित में ही मेरा व्यक्तिगत हित आईपीएस अधिकारी प्रशांत आनंद ने ‘देश और देशहित के प्रति प्रतिबद्धता’ विषय पर कहा कि व्यक्तिगत हित और देशहित को एक-दूसरे के विरोध में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “देशहित से मेरा व्यक्तिगत हित भी पूरा होता है।” उन्होंने 1991 के पहले और बाद के भारत में आए आर्थिक-सामाजिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों की आकांक्षाएं तेजी से बदली हैं। चुनावी व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि चुनावों का स्वरूप धीरे-धीरे लेन-देन आधारित होता जा रहा है। समाज से संवाद भी जरूरी कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं पद्मश्री बलबीर दत्त मंच पर गिर पड़े। उन्होंने खुद को संभालते हुए 1977 की घटना का उल्लेख किया और कहा, “इंदिरा गांधी भी गिर गई थीं, अगर वे गिर सकती हैं तो हम कौन हैं।” उन्होंने कहा कि केवल ‘संवाद से समाज’ ही नहीं, बल्कि ‘समाज से संवाद’ की प्रक्रिया भी जारी रहनी चाहिए। उन्होंने सूत्र दिया- “स्वस्थ संवाद, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र।” समापन पर पूर्व राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा, “संवाद विफल हुआ, इसी कारण महाभारत हुई।” उन्होंने विकास के साथ प्रकृति, परंपरा, संस्कृति और पहचान को बचाए रखने की जरूरत बतायी। कांके टॉक्स के संस्थापक अमित मोदी ने कहा कि 100 से अधिक संवादों का पूरा होना महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन यात्रा जारी है। उन्होंने कहा, “असहमति समस्या नहीं है। संवाद का समाप्त हो जाना समस्या है।”

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