किशनगंज की ऐतिहासिक रमजान नदी को बचाने की पहल की गई है। सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने नमामि गंगे मिशन के महानिदेशक को पत्र लिखा है। इसमें नदी का भौतिक सीमांकन, अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण कराने की मांग की गई है। सांसद ने बताया कि पिछले 20 सालों से रमजान नदी अतिक्रमण का शिकार है। नदी की धारा और बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण से इसका प्राकृतिक बहाव रुक गया है, जिससे जलधारण क्षमता कम हुई है। मानसून में भारी बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ता है। अतिक्रमण के कारण पानी नहीं निकल पाता, जिससे शहर में जलजमाव होता है और लोगों को परेशानी होती है। पुराने मार्ग को फिर से खोलने को कहा डॉ. जावेद ने मांग की है कि नदी का वैज्ञानिक सीमांकन हो और अतिक्रमण हटाकर प्राकृतिक बहाव बहाल किया जाए। उन्होंने रमजान नदी को डोंक नदी से जोड़ने वाले पुराने मार्ग को फिर से खोलने की भी बात कही। किशनगंज की ऐतिहासिक रमजान नदी को बचाने की पहल की गई है। सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने नमामि गंगे मिशन के महानिदेशक को पत्र लिखा है। इसमें नदी का भौतिक सीमांकन, अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण कराने की मांग की गई है। सांसद ने बताया कि पिछले 20 सालों से रमजान नदी अतिक्रमण का शिकार है। नदी की धारा और बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण से इसका प्राकृतिक बहाव रुक गया है, जिससे जलधारण क्षमता कम हुई है। मानसून में भारी बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ता है। अतिक्रमण के कारण पानी नहीं निकल पाता, जिससे शहर में जलजमाव होता है और लोगों को परेशानी होती है। पुराने मार्ग को फिर से खोलने को कहा डॉ. जावेद ने मांग की है कि नदी का वैज्ञानिक सीमांकन हो और अतिक्रमण हटाकर प्राकृतिक बहाव बहाल किया जाए। उन्होंने रमजान नदी को डोंक नदी से जोड़ने वाले पुराने मार्ग को फिर से खोलने की भी बात कही।

