पितरों के प्रति श्रद्धा का पर्व श्राद्ध पक्ष शनिवार से शुरू हो गया है। करौली के नदी दरवाजा कुंड, पंचना व भद्रावती नदी घाटों सहित अन्य स्थानों पर पितरों के लिए तर्पण, जल अर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म शुरू हुए। श्रद्धालु पूर्वजों की आत्मशांति के लिए दान-पुण्य और भोजन कराएंगे। लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार तर्पण और जल अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। हिंदू परंपरा के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, दान-पुण्य और भोजन कराने का खास महत्व है। श्राद्ध पक्ष का आखिरी दिन सर्वपितृ अमावस्या होगा, जो 10 अक्टूबर को है। इस दिन उन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण की मान्यता है, जिनकी मृत्यु तिथि पता नहीं होती या जिनका तय तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो।

