धर्म की नगरी काशी में शनिवार की रात भैरव का जयकारा होगा। माथे पर मौर बांध बाबा लाट भैरव बारात लेकर माता शीतला के दरबार पहुंचेंगे और शुभ मुहूर्त में विवाह सम्पन्न होगा। इसे लेकर तैयारियां जोरों पर है। शुक्रवार की रात बाबा के प्रांगण में मेहंदी की थाली सजी और उन्हें मेंहदी लगाई गई। सभी ने मंगलगीत गाए और बाबा से सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया। दोपहर दो बजे से शुरू होगी तैयारियां लाट भैरव समिति के मीडिया प्रभारी शिवम अग्रहरि ने बताया – महादेव की नगरी काशी में आज भैरव बाबा के माथे पर मौर सजेगा। उनकी भव्य बारात की तैयारी दोपहर दो बजे से शुरू हो जाएगी । जिसमें आस पास के जिले के लोग भी शामिल होंगे। बारात में पूर्व मंत्री दे नीलकंठ तिवारी भी बाराती बनकर मौजूद रहेंगे। शहनाई, डमरूदल, बैंड बाजा और दीजे की धुन पर बारात निकलेगी। देर रात सजी मेहंदी, गाए गए मंगलगीत शिवम ने बताया – इसके पहले शुक्रवा की रात बाबा की हल्दी की रस्म निभाई गई। लाट भैरव परिसर बाबा सहित हर कोई हरे रंग के पारंपरिक परिधान में नज़र आया।समिति के मंत्री विक्रम सिंह राठौर ने पत्नी शिखा सिंह के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मेंहदी अर्पित की। इसके बाद सभी क्षेत्रीय महिलाओं व युवतियों ने माता भैरवी व बाबा लाट भैरव को मेंहदी लगाया। श्री विग्रह के सम्मुख अति प्राचीन भैरवी कूप को मां भैरवी के रूप में पूजित माना गया हैं। मंगलगीतों का क्रम शुक्रवार को भी जारी रहा। नृत्यांगनाओं ने घंटों नृत्य व संगीत का माहौल जमाये रखा। आरती उपरांत भैरवाष्टकं व स्तुतिगान के साथ कार्यक्रम को विराम दिया गया। कंधे से रथ तक बारात का इतिहास समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल ने बताया – विशेश्वरगंज स्थित इन्ना माई की गली में निवास करने वाले बसंत सिंह राठौर पिछले कई पीढ़ियों से संकुटुंब बारात की समस्त व्यवस्थाओं को देखते आ रहे हैं।परिवार की नई पीढ़ी अपने पुरनियों से हर छोटी-बड़ी परम्पराओं के बारे में मार्गदर्शन लेकर उत्साह के साथ मांगलिक कार्य में जुटी है। किसी जमाने में भगेलू ठेकेदार के नेतृत्व में मंडी के पल्लेदार कंधे पर बाबा के रजत मुखौटे को लेकर निकलते थे।अनादिकाल की यह परम्परा भगेलू ठेकेदार से चलकर अब चौथी पीढ़ी द्वारा संचालित की जा रही है।

