शनिवार से पितृपक्ष (सोलह श्राद्ध) की शुरुआत हो गई। इसके साथ ही रायसेन शहर के प्राचीन मिश्र तालाब पर सैकड़ों श्रद्धालु अपने पितरों का तर्पण करने पहुंचे। इस बार तर्पण के दौरान मिश्र तालाब की बदली हुई तस्वीर देखने को मिली। पिछले करीब 20 दिनों से किए जा रहे श्रमदान के चलते तालाब के घाट और आसपास का क्षेत्र साफ-सुथरा नजर आया। इससे श्रद्धालुओं को तर्पण करने में परेशानी नहीं हुई। पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा। मिश्र तालाब पर वर्षों से पितरों के तर्पण की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को पंडित दीपक चतुर्वेदी और राजेंद्र दुबे ने श्रद्धालुओं को विधि-विधान से तर्पण कराया। इसके बाद लोगों ने घरों पर पितरों के पसंदीदा व्यंजन बनाकर भोग लगाया और पंडितों को भोजन कराया। 20 दिन की मेहनत से बदला तालाब का स्वरूप
तर्पण और धार्मिक आयोजन को देखते हुए जिला विकास समिति, नगर पालिका और कुछ युवाओं ने आगे आकर मिश्र तालाब की सफाई का जिम्मा उठाया। करीब 20 दिनों तक चले श्रमदान में तालाब के घाटों से कचरा और जलकुंभी हटाई गई। इसके बाद तालाब पहले की तुलना में काफी स्वच्छ और सुंदर दिखाई देने लगा है। तर्पण कराने वाले पंडित दीपक चतुर्वेदी ने सामाजिक संगठनों और श्रमदान करने वालों की सराहना करते हुए कहा कि लोगों ने अपना अमूल्य समय देकर तालाब को तर्पण के योग्य बनाया है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार तालाब काफी स्वच्छ नजर आ रहा है। वहीं तर्पण करने पहुंचे योगेंद्र ठाकुर ने जिला नगर पालिका और जिला विकास समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि पितृपक्ष में बड़ी संख्या में लोग यहां तर्पण करने आते हैं। इस साल तालाब की तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है और साफ-सफाई के कारण तर्पण करने में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। नगर पालिका ने शनिवार को भी किया श्रमदान
मिश्र तालाब की सफाई का अभियान शनिवार को भी जारी रहा। नगर पालिका के कर्मचारियों ने घाटों से कचरा उठाया। नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि जमुना सेन भी कर्मचारियों के साथ श्रमदान में जुटे रहे।

