रेवाड़ी जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। कोरोना काल में 66,432 तक पहुंची विद्यार्थियों की संख्या अब घटकर करीब 54 हजार रह गई है। यानी पांच साल में 12 हजार से अधिक विद्यार्थी कम हुए हैं। इस सत्र में भी पिछले साल के मुकाबले करीब 2 हजार दाखिले कम हुए। दाखिले बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने गांव-गांव अभियान चलाने के साथ शिक्षकों को घर-घर भेजा, लेकिन इसका असर आंकड़ों में नजर नहीं आया। नौवीं से 12वीं तक दाखिले की अंतिम तारीख भी 31 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। कोरोना के बाद हर साल घटे दाखिले 2022 में सरकारी स्कूलों में 66,432 विद्यार्थी थे। इसके बाद संख्या लगातार कम होती गई। 2023 में 60,562, 2024 में 58,253, 2025 में 56 हजार और 2026 में करीब 54 हजार दाखिले हुए। यानी पांच साल में 12,432 विद्यार्थियों की कमी आई है। दाखिला अभियान पर जोर, फिर भी नहीं थमी गिरावट शिक्षा विभाग हर साल दाखिला अभियान चलाता है। शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करते हैं और सरकारी स्कूलों की सुविधाओं की जानकारी देते हैं। गांवों में रैलियां भी निकाली जाती हैं। इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। अभिभावक स्टाफ की कमी, अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई और सुविधाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दाखिला अभियान पर हर साल लाखों रुपये खर्च सरकारी स्कूलों में दाखिले बढ़ाने के लिए विभाग हर साल अभियान चलाता है। शिक्षकों को घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद लगातार घट रही विद्यार्थी संख्या विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है। अभिभावक बोले- सुविधाओं में सुधार की जरूरत अभिभावकों का कहना है कि कई सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी, अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण लोग निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। कुछ स्कूलों में एक शिक्षक को एक से अधिक कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता में और सुधार किया जाए तो अभिभावकों का भरोसा बढ़ सकता है। सुविधाओं में हो रहा विस्तार जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप दहिया ने बताया कि सरकारी स्कूलों में पहले के मुकाबले सुविधाओं का विस्तार हुआ है। शिक्षकों की कमी भी काफी हद तक दूर की गई है और सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या बेहद कम है। विभाग की ओर से ग्रामीणों को सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सत्र की शुरुआत में शिक्षक भी अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराने के लिए प्रेरित करते हैं।

