36 दिन से सड़क पर शिक्षक:बेटी रोज पूछती है- पापा कब आओगे; महिलाएं पीरियड्स में वॉशरूम को तरसीं, पदवृद्धि की मांग पर डटे

36 दिन से सड़क पर शिक्षक:बेटी रोज पूछती है- पापा कब आओगे; महिलाएं पीरियड्स में वॉशरूम को तरसीं, पदवृद्धि की मांग पर डटे

“पिछले 36 दिन से हम हड़ताल पर हैं… आप भी महिला हैं, समझती हैं मैडम। पीरियड्स के दौरान बहुत कुछ मैनेज करना पड़ता है। वॉशरूम बहुत दूर है। दर्द में रोड पर सोना पड़ता है। कई महिलाओं को इंफेक्शन भी हो गया है।” इंदौर से आईं शिक्षिका रुचि सैनी की यह बात भोपाल में 36 दिन से धरने पर बैठे महिला शिक्षकों की रोज की मुश्किल बताती है। मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए शिक्षक पदवृद्धि की मांग को लेकर सड़क पर हैं। इनमें महिलाएं और पुरुष दोनों हैं। किसी के पास घर लौटने का विकल्प नहीं है, तो किसी की छोटी बच्ची रोज वीडियो कॉल पर पूछती है- पापा कब आओगे? दैनिक भास्कर की टीम ने धरनास्थल पर करीब 5 घंटे बिताए। इस दौरान देखा कि बारिश से बचने, खाना बनाने, नहाने और वॉशरूम जैसी सामान्य जरूरतें भी यहां चुनौती बनी हुई हैं। धरना दे रहे शिक्षकों की आपबीती पढ़िए… सड़क किनारे बिस्तर, ऊपर पॉलिथीन और सामने से गुजरती गाड़ियां धरने पर रात गुजार रहे एक शिक्षक ने कहा, “हम लोगों को चाय नसीब नहीं हो रही। पास में कुत्तों को दूध पिलाया जा रहा है और हमें खिचड़ी भी नहीं मिल रही।” शिक्षकों के मुताबिक बारिश में पॉलिथीन के नीचे जगह तलाशनी पड़ती है। जगह कम होने पर कई बार खुले में ही सोना पड़ता है। सड़क से लगातार गाड़ियां गुजरती हैं और छोटे बेरिकेड के सहारे रात काटनी पड़ती है। एक शिक्षक ने बताया कि बारिश में खाना बनाने का सामान भीग गया। उनके मुताबिक 10-12 किलो आटे में करीब 5 किलो खराब हो गया। उन्होंने कहा, “गाय, कुत्ता और मैं एक ही जगह पर सांस ले रहे हैं। वहां खुजली और बदबू भी है। यही यहां की रियलिटी है।” महिलाओं के लिए वॉशरूम और सुरक्षा सबसे बड़ी परेशानी सागर से आईं रुचि सैनी 36 दिन से धरनास्थल पर हैं। उनके मुताबिक महिलाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी वॉशरूम की है। वह कहती हैं, “पीरियड्स में बार-बार चेंज करने के लिए वॉशरूम ढूंढना पड़ता है। कई महिलाओं को इंफेक्शन तक हो गया है।” शिक्षिका दीप्ति सिंह ठाकुर के मुताबिक धरनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर वॉशरूम है। कई बार तीन-चार दिन तक नहाने की स्थिति नहीं बनती। कपड़े भी वॉशरूम के आसपास जाकर बदलने पड़ते हैं। रात में सड़क किनारे सोने वाली महिलाओं की सुरक्षा भी चिंता बनी रहती है। दीप्ति के मुताबिक कुछ लोग कमेंट करते हुए निकल जाते हैं। दो साल की बेटी रोज पूछती है- पापा कब आओगे? धरने पर बैठे एक शिक्षक बताते हैं कि उनकी दो साल की बेटी रोज वीडियो कॉल कर पूछती है- “पापा कब आओगे?” वह बेटी से कहते हैं कि जल्द घर आएंगे। लेकिन आंदोलन के कारण अभी लौट नहीं पा रहे हैं। उनका कहना है कि बेटी को बहुत मिस करते हैं, लेकिन इस उम्मीद में धरने पर हैं कि आंदोलन से उसका भविष्य बेहतर होगा। 17 दिन भूख हड़ताल, 12 दिन लगातार; निर्जल अनशन भी किया आंदोलन में कुछ शिक्षक भूख हड़ताल पर भी हैं। राजगढ़ के ब्यावरा से आए नरेंद्र राजपूत बताते हैं कि वह कुल 17 दिन भूख हड़ताल पर रह चुके हैं। इसमें लगातार 12 दिन की भूख हड़ताल शामिल है। उन्होंने निर्जल अनशन भी किया। नरेंद्र के मुताबिक 10 दिन बाद तबीयत बिगड़ी तो साथियों ने उन्हें पानी पिला दिया। इससे निर्जल अनशन टूट गया, लेकिन उनका उपवास जारी रहा। दीप्ति के मुताबिक नरेंद्र तीन बार बेहोश हुए। उनकी हालत देखकर साथी घबरा गए और उनके मुंह में पानी डालना पड़ा। शिक्षकों का दावा- करीब 50 साथी अस्पताल पहुंचे धरनास्थल पर मौजूद एक शिक्षक के मुताबिक कई साथी बीमार होकर अस्पताल जा चुके हैं। उनका दावा है कि करीब 50 लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं। कुछ साथी बीमारी के बाद 15 दिन से वापस नहीं आए हैं। धरने पर मौजूद शिक्षक बताते हैं कि वे उनसे वीडियो कॉल पर बात करते हैं और ठीक होकर लौटने के लिए हौसला देते हैं। पदवृद्धि की मांग पर क्यों अड़े हैं शिक्षक? शिक्षकों का आंदोलन वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदवृद्धि और दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की मांग को लेकर है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और जरूरत के मुताबिक शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। मुनेन्दर सिंह राजावत के मुताबिक शिक्षकों से जुड़े एक गैजेट नोटिफिकेशन में करीब 3 लाख पद खाली बताए गए थे, जबकि विधानसभा में रखे आंकड़ों में करीब 1 लाख 15 हजार स्वीकृत पद खाली बताए गए। शिक्षकों का तर्क है कि सिर्फ स्वीकृत खाली पदों के बजाय स्कूलों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से शिक्षकों की संख्या तय होनी चाहिए। प्राथमिक में 5 कक्षाएं, स्वीकृत पद 2; मिडिल में 6 कोर विषय, पद 3 मुनेन्दर सिंह के मुताबिक प्राथमिक स्कूल में 5 कक्षाएं होती हैं, लेकिन कई जगह स्वीकृत शिक्षक पद सिर्फ 2 हैं। मिडिल स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे कोर विषय हैं, लेकिन स्वीकृत पदों की संख्या 3 बताई जाती है। शिक्षकों का सवाल है कि इतने कम शिक्षकों में सभी विषयों की पढ़ाई कैसे होगी। उनका कहना है कि पढ़ाई के अलावा शिक्षकों से प्रशासनिक और दूसरे विभागों के काम भी कराए जाते हैं। उनका दावा है कि इसी वजह से कई स्कूलों में विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। कहीं हिंदी या सामाजिक विज्ञान में से एक शिक्षक है, तो कहीं गणित और विज्ञान में से किसी एक विषय का शिक्षक है। इंदौर में राहुल गांधी से मिलीं दीप्ति 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में दीप्ति सिंह ठाकुर ने राहुल गांधी को शिक्षक आंदोलन की जानकारी दी। दीप्ति के मुताबिक उन्होंने राजगढ़ के ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत के निर्जल अनशन और उनकी तबीयत बिगड़ने की बात भी बताई। शिक्षकों की प्रमुख मांगों में वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाना और दूसरी काउंसलिंग शुरू करना शामिल है।
राहुल गांधी ने कहा, “अपने आंदोलन में मुझे भी बुलाइए।”

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