“हमारा रास्ता ही वही है। बहू हो या बेटी, ये लोग सबके सामने छेड़खानी करते थे और गंदी-गंदी बातें बोलते थे। मेरी बहू को भी कुछ दिन पहले बीच सड़क पर मोटरसाइकिल लगाकर रोक दिया था। पहले भी ऐसा होता था, लेकिन इस बार वीडियो वायरल हुआ तो मामला सामने आ गया।” लखीसराय के कुंदर टोला की शांति देवी की यह बात पूरे इलाके की परेशानी को बयां करती है। 19 सितंबर की शाम जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी के बाद दैनिक भास्कर की टीम जमुई-लखीसराय सीमा से सटे गांवों में लोगों से बात करने पहुंची। इस दौरान सामने आया कि इस इलाके में लड़कियों के रास्ते, स्कूल और कोचिंग तक पहुंचने को लेकर पहले से डर बना हुआ था। ग्रामीणों ने कई पुरानी घटनाओं का जिक्र किया। इनमें रास्ते में पीछा करना, गाली देना, कमेंट करना और बाइक से रास्ता रोकने जैसी शिकायतें शामिल हैं। ग्रामीणों ने इन घटनाओं के लिए हरेराम और नंदन पर आरोप लगाए हैं। फिलहाल, ग्रामीण पुलिस की मौजूदा कार्रवाई से खुश और संतुष्ट हैं। आखिर कब से चल रहा था छेड़खानी का खेल? गांव वालों ने पहले शिकायत क्यों नहीं की? वीडियो वायरल नहीं होता तो क्या लड़कियों से बदसलूकी चलती रहती? इन सारे सवालों के जवाब यहां पढ़िए… एक पहाड़, दो जिले और रोज का वही रास्ता दैनिक भास्कर की टीम जमुई जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर उस जगह (मड़वा पहाड़) पहुंची, जहां बच्ची के साथ छेड़खानी की घटना हुई थी। इस रास्ते पर किऊल नदी पर बना एक पुल है, जो लखीसराय की तरफ जाता है। हमारी टीम वहां से करीब एक किलोमीटर का सफर तय कर लखीसराय की बसावट कुंदर टोला पहुंची। यहां से हर दिन करीब 100 से ज्यादा लोग इस रास्ते से आते-जाते हैं। इनमें 50 से ज्यादा महिलाएं और बच्चियां शामिल हैं। सीमा से सटे इस इलाके में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई का रास्ता जमुई से जुड़ा है। कई गांवों में 10वीं तक पढ़ाई के बाद बच्चों को स्कूल और कोचिंग के लिए जमुई की तरफ जाना पड़ता है। इस दौरान हमारी टीम ने कई ग्रामीणों से बात की। ग्रामीण दशरथ राम बताते हैं, “मेरी नातिन बीए में पढ़ती थी। वह अक्सर इसी रास्ते से कोचिंग जाया करती थी। रास्ते में बार-बार छेड़खानी की शिकायत के बाद परिवार इतना डर गया कि आखिरकार उसकी पढ़ाई छुड़ानी पड़ी।” वे कहते हैं, “वह जब भी उस रास्ते से गुजरती थी, उसके साथ छेड़छाड़ होती थी। हर दिन कोई उसके साथ नहीं जा सकता। इसी वजह से हमने उसे कोचिंग भेजना बंद कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ परिवारों ने बच्चियों को अकेले स्कूल या कोचिंग भेजना कम कर दिया था। कुछ जगह पेरेंट्स खुद उन्हें छोड़ने और लेने जाते थे। जिन परिवारों के लिए रोज ऐसा करना संभव नहीं था, उन्होंने बच्चियों की पढ़ाई रोकने का फैसला किया। ‘पहले भी शिकायत हुई थी, परिवार को जाकर समझाया था’ रवि बताते हैं कि हरेराम यादव को गांव में कुछ लोग बदमाशी करने वाले लड़के के तौर पर जानते थे। बच्चों और आने-जाने वाली लड़कियों के साथ बदतमीजी की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं। एक समय हमारे गांव के लोग उसके घर गए थे। उसके परिवार वालों से कहा था कि अपने बेटे को समझाया जाए। उस वक्त हरेराम के परिवार की तरफ से भी आगे ऐसी हरकत नहीं होने का भरोसा दिया गया था।” हालांकि, रवि का कहना है कि करीब एक महीने बाद फिर से आरोपियों की ऐसी हरकतों की शिकायत सामने आने लगी। ‘करीब 10 मोटरसाइकिल से पहुंचे थे गांव के लोग’ किशोर राम भी बताते हैं कि 19 सितंबर की घटना से पहले गांव की एक बच्ची के साथ ऐसी ही शिकायत सामने आई थी। उस समय डर की वजह से परिवार खुलकर सामने नहीं आया। घटना की जानकारी मिलने के बाद हमारे गांव के करीब 10 मोटरसाइकिलों पर लोग लड़के के घर पहुंचे थे। वहां उसे चेतावनी दी गई थी और परिवार से कहा गया था कि आगे ऐसी शिकायत नहीं आनी चाहिए। परिवार की ओर से भी लड़के को समझाने का भरोसा दिया गया था। उस समय मामला गांव के स्तर पर समझाने-बुझाने तक सीमित रह गया। जब यह वीडियो वायरल हुआ तो आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई हमारे गांव के लिए बहुत सही है। सुबह-शाम 112 की गश्ती बढ़े: ग्रामीण लक्ष्मण यादव कहते हैं, इलाके में डर को सिर्फ हरेराम और नंदन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। आसपास कुछ और लड़के भी घूमते रहते हैं, जिनसे बच्चे और परिवार असहज महसूस करते हैं। मुझे 19 सितंबर की घटना के बारे में अगले दिन जानकारी मिली थी। बैराज और आसपास के इलाके में रोज बच्चे और परिवार आते-जाते हैं। जमुई और लखीसराय दोनों तरफ के लोग यहां पहुंचते हैं। इसके बावजूद मुख्य रास्ते से आगे करीब डेढ़ से तीन किलोमीटर के हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में चिंता है। उनका कहना है कि सुबह और शाम के समय पुलिस या 112 की गश्ती बढ़े तो बच्चों और पेरेंट्स को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। ‘पार्क-बैराज है, फिर भी रास्ता सुनसान’ किशोर राम बताते हैं कि हमारे गांव के आसपास बैराज और पार्क है। यहां बच्चों और परिवारों की आवाजाही हमेशा होते रहती है। जमुई और लखीसराय दोनों जिलों से लोग यहां पहुंचते हैं, लेकिन जिस रास्ते से लोग मुख्य सड़क की तरफ लौटते हैं, वहां लंबे हिस्से में सुनसान माहौल रहता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब यह जगह घूमने और आवाजाही के लिए इस्तेमाल होती है तो रास्ते पर नियमित निगरानी क्यों नहीं रहती? खासकर शाम के समय पुलिस की मौजूदगी और गश्ती की व्यवस्था कितनी है, इसकी समीक्षा की जरूरत है। 19 सितंबर की घटना के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि किसी सुनसान जगह पर घटना होने से पहले पुलिस की मौजूदगी कैसे सुनिश्चित की जाए। आरोपी गिरफ्तार, लेकिन कहां है सुरक्षा ग्रामीणों से बातचीत में सबसे ज्यादा जो बात सामने आई, वह यह है कि अब परिवार सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी की बात नहीं कर रहे। वे चाहते हैं कि जिस रास्ते से उनके बच्चे रोज गुजरते हैं, वहां सुरक्षा भी दिखे। मड़वा पहाड़ से किऊल नदी, बैराज से कुंदर टोला और आगे जमुई की तरफ जाने वाला रास्ता कई गांवों के बच्चों की रोज की जरूरत है। किसी के लिए यह स्कूल जाने का रास्ता है, किसी के लिए कोचिंग का और किसी के लिए इलाज या बाजार पहुंचने का। 19 सितंबर की घटना ने इस पूरे रास्ते पर पहले से मौजूद डर को सामने ला दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले शिकायतें अलग-अलग परिवारों तक सीमित थीं। अब मामला सामने आने के बाद लोग खुलकर अपनी बातें बता रहे हैं। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… क्या है जमुई कांड दरअसल, 19 सितंबर को जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में 14 साल की छात्रा के साथ सड़क पर छेड़खानी और अभद्र व्यवहार किया गया था। इसका वीडियो 21 सितंबर को सामने आया। पुलिस के अनुसार, वीडियो की जानकारी 21 सितंबर को मिली, जिसके बाद पीड़िता की पहचान कर केस दर्ज किया गया। इसके लिए SIT बनाई गई। वीडियो में दिख रहे तीन नाबालिगों को पकड़ा गया, जबकि मुख्य आरोपियों के रूप में बताए जा रहे हरेराम यादव और नंदन यादव का 22 सितंबर को एनकाउंटर किया गया। पुलिस के मुताबिक दोनों नदी किनारे झाड़ियों में छिपे मिले; हरेराम को पकड़ने के दौरान वह घायल हुआ, जबकि नंदन के पुलिस पर गोली चलाने के बाद जवाबी कार्रवाई में वह गोली लगने से घायल हुआ। फिलहाल, नंदन का अस्पताल में इलाज चल रही है। वहीं, हरेराम को पुलिस ने 23 सितंबर को कोट में पेश कर 14 दिन के न्यायिक हिरासत के लिए भेज दिया है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है, जिनमें एक बालिग को जेल और नाबालिगों को बाल न्याय बोर्ड के समक्ष भेजा गया है। वहीं, वीडियो बनाने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी साइबर कार्रवाई की जा रही है। “हमारा रास्ता ही वही है। बहू हो या बेटी, ये लोग सबके सामने छेड़खानी करते थे और गंदी-गंदी बातें बोलते थे। मेरी बहू को भी कुछ दिन पहले बीच सड़क पर मोटरसाइकिल लगाकर रोक दिया था। पहले भी ऐसा होता था, लेकिन इस बार वीडियो वायरल हुआ तो मामला सामने आ गया।” लखीसराय के कुंदर टोला की शांति देवी की यह बात पूरे इलाके की परेशानी को बयां करती है। 19 सितंबर की शाम जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी के बाद दैनिक भास्कर की टीम जमुई-लखीसराय सीमा से सटे गांवों में लोगों से बात करने पहुंची। इस दौरान सामने आया कि इस इलाके में लड़कियों के रास्ते, स्कूल और कोचिंग तक पहुंचने को लेकर पहले से डर बना हुआ था। ग्रामीणों ने कई पुरानी घटनाओं का जिक्र किया। इनमें रास्ते में पीछा करना, गाली देना, कमेंट करना और बाइक से रास्ता रोकने जैसी शिकायतें शामिल हैं। ग्रामीणों ने इन घटनाओं के लिए हरेराम और नंदन पर आरोप लगाए हैं। फिलहाल, ग्रामीण पुलिस की मौजूदा कार्रवाई से खुश और संतुष्ट हैं। आखिर कब से चल रहा था छेड़खानी का खेल? गांव वालों ने पहले शिकायत क्यों नहीं की? वीडियो वायरल नहीं होता तो क्या लड़कियों से बदसलूकी चलती रहती? इन सारे सवालों के जवाब यहां पढ़िए… एक पहाड़, दो जिले और रोज का वही रास्ता दैनिक भास्कर की टीम जमुई जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर उस जगह (मड़वा पहाड़) पहुंची, जहां बच्ची के साथ छेड़खानी की घटना हुई थी। इस रास्ते पर किऊल नदी पर बना एक पुल है, जो लखीसराय की तरफ जाता है। हमारी टीम वहां से करीब एक किलोमीटर का सफर तय कर लखीसराय की बसावट कुंदर टोला पहुंची। यहां से हर दिन करीब 100 से ज्यादा लोग इस रास्ते से आते-जाते हैं। इनमें 50 से ज्यादा महिलाएं और बच्चियां शामिल हैं। सीमा से सटे इस इलाके में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई का रास्ता जमुई से जुड़ा है। कई गांवों में 10वीं तक पढ़ाई के बाद बच्चों को स्कूल और कोचिंग के लिए जमुई की तरफ जाना पड़ता है। इस दौरान हमारी टीम ने कई ग्रामीणों से बात की। ग्रामीण दशरथ राम बताते हैं, “मेरी नातिन बीए में पढ़ती थी। वह अक्सर इसी रास्ते से कोचिंग जाया करती थी। रास्ते में बार-बार छेड़खानी की शिकायत के बाद परिवार इतना डर गया कि आखिरकार उसकी पढ़ाई छुड़ानी पड़ी।” वे कहते हैं, “वह जब भी उस रास्ते से गुजरती थी, उसके साथ छेड़छाड़ होती थी। हर दिन कोई उसके साथ नहीं जा सकता। इसी वजह से हमने उसे कोचिंग भेजना बंद कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ परिवारों ने बच्चियों को अकेले स्कूल या कोचिंग भेजना कम कर दिया था। कुछ जगह पेरेंट्स खुद उन्हें छोड़ने और लेने जाते थे। जिन परिवारों के लिए रोज ऐसा करना संभव नहीं था, उन्होंने बच्चियों की पढ़ाई रोकने का फैसला किया। ‘पहले भी शिकायत हुई थी, परिवार को जाकर समझाया था’ रवि बताते हैं कि हरेराम यादव को गांव में कुछ लोग बदमाशी करने वाले लड़के के तौर पर जानते थे। बच्चों और आने-जाने वाली लड़कियों के साथ बदतमीजी की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं। एक समय हमारे गांव के लोग उसके घर गए थे। उसके परिवार वालों से कहा था कि अपने बेटे को समझाया जाए। उस वक्त हरेराम के परिवार की तरफ से भी आगे ऐसी हरकत नहीं होने का भरोसा दिया गया था।” हालांकि, रवि का कहना है कि करीब एक महीने बाद फिर से आरोपियों की ऐसी हरकतों की शिकायत सामने आने लगी। ‘करीब 10 मोटरसाइकिल से पहुंचे थे गांव के लोग’ किशोर राम भी बताते हैं कि 19 सितंबर की घटना से पहले गांव की एक बच्ची के साथ ऐसी ही शिकायत सामने आई थी। उस समय डर की वजह से परिवार खुलकर सामने नहीं आया। घटना की जानकारी मिलने के बाद हमारे गांव के करीब 10 मोटरसाइकिलों पर लोग लड़के के घर पहुंचे थे। वहां उसे चेतावनी दी गई थी और परिवार से कहा गया था कि आगे ऐसी शिकायत नहीं आनी चाहिए। परिवार की ओर से भी लड़के को समझाने का भरोसा दिया गया था। उस समय मामला गांव के स्तर पर समझाने-बुझाने तक सीमित रह गया। जब यह वीडियो वायरल हुआ तो आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई हमारे गांव के लिए बहुत सही है। सुबह-शाम 112 की गश्ती बढ़े: ग्रामीण लक्ष्मण यादव कहते हैं, इलाके में डर को सिर्फ हरेराम और नंदन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। आसपास कुछ और लड़के भी घूमते रहते हैं, जिनसे बच्चे और परिवार असहज महसूस करते हैं। मुझे 19 सितंबर की घटना के बारे में अगले दिन जानकारी मिली थी। बैराज और आसपास के इलाके में रोज बच्चे और परिवार आते-जाते हैं। जमुई और लखीसराय दोनों तरफ के लोग यहां पहुंचते हैं। इसके बावजूद मुख्य रास्ते से आगे करीब डेढ़ से तीन किलोमीटर के हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में चिंता है। उनका कहना है कि सुबह और शाम के समय पुलिस या 112 की गश्ती बढ़े तो बच्चों और पेरेंट्स को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। ‘पार्क-बैराज है, फिर भी रास्ता सुनसान’ किशोर राम बताते हैं कि हमारे गांव के आसपास बैराज और पार्क है। यहां बच्चों और परिवारों की आवाजाही हमेशा होते रहती है। जमुई और लखीसराय दोनों जिलों से लोग यहां पहुंचते हैं, लेकिन जिस रास्ते से लोग मुख्य सड़क की तरफ लौटते हैं, वहां लंबे हिस्से में सुनसान माहौल रहता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब यह जगह घूमने और आवाजाही के लिए इस्तेमाल होती है तो रास्ते पर नियमित निगरानी क्यों नहीं रहती? खासकर शाम के समय पुलिस की मौजूदगी और गश्ती की व्यवस्था कितनी है, इसकी समीक्षा की जरूरत है। 19 सितंबर की घटना के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि किसी सुनसान जगह पर घटना होने से पहले पुलिस की मौजूदगी कैसे सुनिश्चित की जाए। आरोपी गिरफ्तार, लेकिन कहां है सुरक्षा ग्रामीणों से बातचीत में सबसे ज्यादा जो बात सामने आई, वह यह है कि अब परिवार सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी की बात नहीं कर रहे। वे चाहते हैं कि जिस रास्ते से उनके बच्चे रोज गुजरते हैं, वहां सुरक्षा भी दिखे। मड़वा पहाड़ से किऊल नदी, बैराज से कुंदर टोला और आगे जमुई की तरफ जाने वाला रास्ता कई गांवों के बच्चों की रोज की जरूरत है। किसी के लिए यह स्कूल जाने का रास्ता है, किसी के लिए कोचिंग का और किसी के लिए इलाज या बाजार पहुंचने का। 19 सितंबर की घटना ने इस पूरे रास्ते पर पहले से मौजूद डर को सामने ला दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले शिकायतें अलग-अलग परिवारों तक सीमित थीं। अब मामला सामने आने के बाद लोग खुलकर अपनी बातें बता रहे हैं। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… क्या है जमुई कांड दरअसल, 19 सितंबर को जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में 14 साल की छात्रा के साथ सड़क पर छेड़खानी और अभद्र व्यवहार किया गया था। इसका वीडियो 21 सितंबर को सामने आया। पुलिस के अनुसार, वीडियो की जानकारी 21 सितंबर को मिली, जिसके बाद पीड़िता की पहचान कर केस दर्ज किया गया। इसके लिए SIT बनाई गई। वीडियो में दिख रहे तीन नाबालिगों को पकड़ा गया, जबकि मुख्य आरोपियों के रूप में बताए जा रहे हरेराम यादव और नंदन यादव का 22 सितंबर को एनकाउंटर किया गया। पुलिस के मुताबिक दोनों नदी किनारे झाड़ियों में छिपे मिले; हरेराम को पकड़ने के दौरान वह घायल हुआ, जबकि नंदन के पुलिस पर गोली चलाने के बाद जवाबी कार्रवाई में वह गोली लगने से घायल हुआ। फिलहाल, नंदन का अस्पताल में इलाज चल रही है। वहीं, हरेराम को पुलिस ने 23 सितंबर को कोट में पेश कर 14 दिन के न्यायिक हिरासत के लिए भेज दिया है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है, जिनमें एक बालिग को जेल और नाबालिगों को बाल न्याय बोर्ड के समक्ष भेजा गया है। वहीं, वीडियो बनाने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी साइबर कार्रवाई की जा रही है।

