Jaishankar Iran Meeting: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात कर खाड़ी क्षेत्र के विवाद में हालिया घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। X पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री जयशंकर ने लिखा कि UNGA81 में ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ हुई बातचीत की वे सराहना करते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र के विवाद से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की और आगे भी संपर्क में रहने की बात कही।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत की सक्रिय भूमिका
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है, और यह क्षेत्र के प्रमुख पक्षों के साथ भारत के निरंतर जुड़ाव को दर्शाती है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र का यह विवाद, जिसमें कई क्षेत्रीय पक्ष शामिल हैं और जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है, UNGA में विदेश मंत्री जयशंकर की द्विपक्षीय बैठकों में एक अहम विषय बना रहा।
भारत, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर है, हमेशा से ही विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत, तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की वकालत करता रहा है।
ईरान क्यों है भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम
अराघची के साथ यह चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ईरान खाड़ी क्षेत्र के रणनीतिक परिदृश्य में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। समुद्री सुरक्षा, तेल आपूर्ति में स्थिरता और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता जैसे मुद्दे भारत के आर्थिक और सुरक्षा हितों को सीधे प्रभावित करते हैं। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब तेहरान प्रतिबंधों और बदलते गठबंधनों के बीच अपनी राजनयिक पहुंच का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है।
व्यस्त राजनयिक कार्यक्रम, कई देशों से मुलाकात
ईरान के साथ विदेश मंत्री जयशंकर की यह बातचीत UNGA81 में उनके व्यस्त राजनयिक कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा है, जहां वे पहले ही रूस, मिस्र, जॉर्डन सहित कई अन्य देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ के रूप में भारत की भूमिका पर लगातार जोर दिया है और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार तथा आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया है।
आगे की राह-ऊर्जा और चाबहार बंदरगाह पर फोकस संभव
उम्मीद जताई जा रही है कि UNGA में शुरू हुई भारत-ईरान की यह बातचीत आने वाले महीनों में भी जारी रहेगी, जिसमें दोनों पक्ष ऊर्जा सहयोग, चाबहार बंदरगाह जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता की पहलों पर संभावनाओं को तलाशेंगे।

