दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में पेपर लीक मामले में गया कॉलेज के कंप्यूटर ऑपरेटर वीरेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया है। ईओयू की टीम ने उसे बुधवार को कॉलेज परिसर से ही पकड़ा। इसके बाद टीम उसे अपने साथ ले गई। गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही कॉलेज में हड़कंप मच गया। वीरेंद्र कुमार पिछले करीब चार साल से गया कॉलेज में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रहा था। कॉलेज के पास ही किराए के मकान में रहता था। बताया जा रहा है कि दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में उसकी ड्यूटी भी लगाई गई थी। अब्सेंट अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट, क्वेश्चनपेपर कलेक्ट करने की थी ड्यूटी वीरेंद्र की जिम्मेदारी परीक्षा हॉल से अनुपस्थित अभ्यर्थियों की OMR शीट और प्रश्नपत्र कलेक्ट करने की थी। इसके बाद इन्हें स्टोर में जमा करना था। इसी दौरान प्रश्नपत्र बाहर पहुंचने की आशंका जांच के दायरे में आई। जानकारी के मुताबिक, ईओयू की टीम ने वीरेंद्र को चार दिन पहले पटना बुलाया था। उसके साथ तीन अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। हालांकि फिलहाल वीरेंद्र की ही गिरफ्तारी की गई है। उससे अब पेपर लीक मामले में पूछताछ की जाएगी। प्रश्नपत्र के पन्नों पर मिले हाथों के निशान जांच में सबसे अहम सुराग एफएसएल की रिपोर्ट से मिला है। सूत्रों के मुताबिक एफएसएल की जांच में प्रश्नपत्र के पन्नों पर वीरेंद्र की दोनों हाथों की उंगलियों और हथेली के निशान मिले हैं। बताया जा रहा है कि प्रश्नपत्र के हर पन्ने पर उसके फिंगरप्रिंट मिलने के प्रमाण जांच टीम को मिले हैं। इसी आधार पर इओयू ने उसकी गिरफ्तारी की है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटेगी कि प्रश्नपत्र उसके पास कैसे पहुंचा। परीक्षा हॉल से स्टोर तक ले जाने के दौरान क्या हुआ। प्रश्नपत्र किसके जरिए बाहर पहुंचा और इसमें और कौन लोग शामिल हैं। वीरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद गया कॉलेज में चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी और दूसरे लोग मामले को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। हालांकि जांच पूरी होने तक किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
चार महीने पहले रामपुर थाना में दर्ज किया गया था केस इस मामले में करीब 4 महीने पहले रामपुर थाने में केस दर्ज कराया गया था। इसके बाद से जांच चल रही है। अब कॉलेज के कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी से जांच को नया सुराग मिला है। सूत्रों के मुताबिक वीरेंद्र पर प्रश्नपत्र लीक करने के बदले लाखों रुपये लेने की भी बात सामने आ रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसी की ओर से नहीं की गई है। इओयू अब गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ कर पेपर लीक की पूरी कड़ी खंगालेगी। दरोगा बहाली की परीक्षा रद्द क्यों हुई? 1,799 पदों की बहाली के लिए हुई परीक्षा को इसे कंडक्ट कराने वाले बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने 23 सितंबर 2026 को रद्द कर दिया। आयोग ने नोटिफिकेशन में कहा, ‘अपरिहार्य कारणों से 27 मई को हुई परीक्षा को रद्द किया जाता है।’ अपरिहार्य कारण क्या है, जिसे आयोग ने क्लियर नहीं किया दरअसल, दरोगा बहाली की मुख्य परीक्षा में धांधली हुई है। इसका खुलासा पूर्णिया साइबर थाने की केस डायरी और चार्जशीट से हुआ है। पूर्णिया साइबर थाने की केस डायरी और चार्जशीट में क्या है? चार्जशीट के मुताबिक, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने परीक्षा शुरू होने के बाद अनुपस्थित अभ्यर्थियों के खाली प्रश्न पत्र चुरा लिए। उसने केंद्र के भीतर ही अपने मोबाइल से उनकी तस्वीरें खींचीं। तस्वीरें अपने ममेरे भाई पप्पू कुमार को व्हाट्सएप पर भेजीं। यह पूरा खेल एग्जाम के दिन यानी 27 मई की दोपहर 2.44 से 2.50 बजे के बीच हुआ। यानी महज छह मिनट में प्रश्न पत्र की तस्वीरें बाहर भेज दी गईं। एग्जाम सेंटर पर मोबाइल बैन था। फिर भी मृत्युंजय कॉरिडोर में मोबाइल का इस्तेमाल करता CCTV में कैद हुआ। तस्वीरें भेजने के बाद उसने व्हाट्सएप चैट भी डिलीट कर दी। पुलिस ने 25 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें मृत्युंजय के खिलाफ द बिहार पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 की धारा 3, 9 व 10(1) के तहत जुर्म सत्य पाया गया है। केस डायरी और चार्जशीट आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, EOU को भी गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी अपनी शुरुआती जांच के आधार पर बहुत जल्द राज्य सरकार को एक विस्तृत अंतरिम रिपोर्ट सौंपने जा रही है। इसके साथ ही, संगठित अपराध और सिंडिकेट की गहरी पैठ को देखते हुए EOU इस पूरे प्रकरण में अलग से एक नया केस दर्ज करने की विधिक तैयारी में जुट गई है। दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में पेपर लीक मामले में गया कॉलेज के कंप्यूटर ऑपरेटर वीरेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया है। ईओयू की टीम ने उसे बुधवार को कॉलेज परिसर से ही पकड़ा। इसके बाद टीम उसे अपने साथ ले गई। गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही कॉलेज में हड़कंप मच गया। वीरेंद्र कुमार पिछले करीब चार साल से गया कॉलेज में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रहा था। कॉलेज के पास ही किराए के मकान में रहता था। बताया जा रहा है कि दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में उसकी ड्यूटी भी लगाई गई थी। अब्सेंट अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट, क्वेश्चनपेपर कलेक्ट करने की थी ड्यूटी वीरेंद्र की जिम्मेदारी परीक्षा हॉल से अनुपस्थित अभ्यर्थियों की OMR शीट और प्रश्नपत्र कलेक्ट करने की थी। इसके बाद इन्हें स्टोर में जमा करना था। इसी दौरान प्रश्नपत्र बाहर पहुंचने की आशंका जांच के दायरे में आई। जानकारी के मुताबिक, ईओयू की टीम ने वीरेंद्र को चार दिन पहले पटना बुलाया था। उसके साथ तीन अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। हालांकि फिलहाल वीरेंद्र की ही गिरफ्तारी की गई है। उससे अब पेपर लीक मामले में पूछताछ की जाएगी। प्रश्नपत्र के पन्नों पर मिले हाथों के निशान जांच में सबसे अहम सुराग एफएसएल की रिपोर्ट से मिला है। सूत्रों के मुताबिक एफएसएल की जांच में प्रश्नपत्र के पन्नों पर वीरेंद्र की दोनों हाथों की उंगलियों और हथेली के निशान मिले हैं। बताया जा रहा है कि प्रश्नपत्र के हर पन्ने पर उसके फिंगरप्रिंट मिलने के प्रमाण जांच टीम को मिले हैं। इसी आधार पर इओयू ने उसकी गिरफ्तारी की है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटेगी कि प्रश्नपत्र उसके पास कैसे पहुंचा। परीक्षा हॉल से स्टोर तक ले जाने के दौरान क्या हुआ। प्रश्नपत्र किसके जरिए बाहर पहुंचा और इसमें और कौन लोग शामिल हैं। वीरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद गया कॉलेज में चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी और दूसरे लोग मामले को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। हालांकि जांच पूरी होने तक किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
चार महीने पहले रामपुर थाना में दर्ज किया गया था केस इस मामले में करीब 4 महीने पहले रामपुर थाने में केस दर्ज कराया गया था। इसके बाद से जांच चल रही है। अब कॉलेज के कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी से जांच को नया सुराग मिला है। सूत्रों के मुताबिक वीरेंद्र पर प्रश्नपत्र लीक करने के बदले लाखों रुपये लेने की भी बात सामने आ रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसी की ओर से नहीं की गई है। इओयू अब गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ कर पेपर लीक की पूरी कड़ी खंगालेगी। दरोगा बहाली की परीक्षा रद्द क्यों हुई? 1,799 पदों की बहाली के लिए हुई परीक्षा को इसे कंडक्ट कराने वाले बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने 23 सितंबर 2026 को रद्द कर दिया। आयोग ने नोटिफिकेशन में कहा, ‘अपरिहार्य कारणों से 27 मई को हुई परीक्षा को रद्द किया जाता है।’ अपरिहार्य कारण क्या है, जिसे आयोग ने क्लियर नहीं किया दरअसल, दरोगा बहाली की मुख्य परीक्षा में धांधली हुई है। इसका खुलासा पूर्णिया साइबर थाने की केस डायरी और चार्जशीट से हुआ है। पूर्णिया साइबर थाने की केस डायरी और चार्जशीट में क्या है? चार्जशीट के मुताबिक, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने परीक्षा शुरू होने के बाद अनुपस्थित अभ्यर्थियों के खाली प्रश्न पत्र चुरा लिए। उसने केंद्र के भीतर ही अपने मोबाइल से उनकी तस्वीरें खींचीं। तस्वीरें अपने ममेरे भाई पप्पू कुमार को व्हाट्सएप पर भेजीं। यह पूरा खेल एग्जाम के दिन यानी 27 मई की दोपहर 2.44 से 2.50 बजे के बीच हुआ। यानी महज छह मिनट में प्रश्न पत्र की तस्वीरें बाहर भेज दी गईं। एग्जाम सेंटर पर मोबाइल बैन था। फिर भी मृत्युंजय कॉरिडोर में मोबाइल का इस्तेमाल करता CCTV में कैद हुआ। तस्वीरें भेजने के बाद उसने व्हाट्सएप चैट भी डिलीट कर दी। पुलिस ने 25 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें मृत्युंजय के खिलाफ द बिहार पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 की धारा 3, 9 व 10(1) के तहत जुर्म सत्य पाया गया है। केस डायरी और चार्जशीट आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, EOU को भी गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी अपनी शुरुआती जांच के आधार पर बहुत जल्द राज्य सरकार को एक विस्तृत अंतरिम रिपोर्ट सौंपने जा रही है। इसके साथ ही, संगठित अपराध और सिंडिकेट की गहरी पैठ को देखते हुए EOU इस पूरे प्रकरण में अलग से एक नया केस दर्ज करने की विधिक तैयारी में जुट गई है।

