राजस्थान में पंचायती राज चुनाव से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया है। हाल ही के निकाय चुनावों में अच्छे परिणाम से उत्साहित आम आदमी पार्टी ने प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का बड़ा ऐलान कर दिया है। उधर, कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ मुकाबले से पहले आप को घेरने का काम शुरू कर दिया है। भाजपा ने भी इन चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं। बारां नगर परिषद में ‘आप’ ने कांग्रेस का 15 साल पुराना सियासी किला ढहा दिया था। वहीं जेल से बाहर आते ही नरेश मीणा ने भी पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। पंचायत चुनाव से पहले आखिर क्यों आमने-सामने हो गई कांग्रेस-आप? भाजपा के लिए क्या है मायने? इन पार्टियों के लिए कितने और क्यों अहम है ये चुनाव और तीसरे विकल्प के तौर पर किसने लगाई है बड़ी उम्मीदें, यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: राजस्थान में क्यों भिड़ गई कांग्रेस और आम आदमी पार्टी? जवाब: दोनों पार्टियों के बीच इस सीधी भिड़ंत की मुख्य वजह आम आदमी पार्टी का राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में जमीनी पैठ बनाने का ऐलान और हालिया शहरी निकाय चुनावों में सामने आया वोट-समीकरण है। हाल ही में हुए निकाय चुनावों में AAP को झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र की विभिन्न पालिकाओं में 42 सीटों पर जीत मिली। जबकि बारां नगर परिषद में AAP ने 60 में से 31 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ अपना बोर्ड बनाया और कांग्रेस के 15 साल पुराने दबदबे को खत्म कर दिया। निकाय चुनाव में मिली इस सफलता से उत्साहित AAP ने अब आगामी पंचायती राज चुनाव में प्रदेश की सभी 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों के सभी वार्डों में चुनाव लड़ने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके लिए पार्टी ने उम्मीदवारों की छंटनी के लिए बाकायदा क्यूआर कोड और ऑफलाइन फॉर्म भी जारी किया है। AAP के इस आक्रामक विस्तार और अपने वोट बैंक में सेंधमारी की आशंका के चलते कांग्रेस आक्रामक मोड में आती नजर आ रही है। सवाल-2: निकाय चुनाव के नतीजों से कांग्रेस क्यों भड़की हुई है? जवाब: निकाय चुनाव के नतीजों में विशेष रूप से दो जिलों- बारां और झालावाड़ (पिड़ावा)- के परिणामों ने कांग्रेस को भड़का दिया है। कांग्रेस ने AAP पर बीजेपी को फायदा पहुंचाने का सीधा आरोप लगाते हुए इसे बी टीम तक बता दिया है। बारां नगर परिषद: यहां 60 वार्डों में से AAP को 31, कांग्रेस को 18, बीजेपी को 9 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं। सभापति चुनाव में AAP की शीतल राठौड़ को 31 वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी भारद्वाज को 11 वोटों से हरा दिया। इस चुनाव में बीजेपी के सभी 9 पार्षदों ने मतदान में भाग नहीं लिया। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने AAP को वॉकओवर देकर कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखा। पिड़ावा नगरपालिका (झालावाड़): यहां कुल 20 वार्डों में कांग्रेस 8 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, जबकि बीजेपी को 6, AAP को 5 और निर्दलीय को 1 सीट मिली थी। लेकिन अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी के राजू माली को कुल 12 वोट मिल गए और वे अध्यक्ष बन गए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का दावा है कि यहां AAP के 5 पार्षदों और 1 निर्दलीय ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। सवाल-3: पार्टियों के लिए राजस्थान के पंचायत चुनाव क्यों इतने अहम हैं? जवाब: राजस्थान में इस बार का पंचायती राज चुनाव आकार, जनप्रतिनिधियों की संख्या और भविष्य की राजनीति के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा ग्रामीण चुनाव होने जा रहा है। इस बार प्रदेश में 105 नई पंचायत समितियां बनी हैं। जिसके बाद पंचायत समितियों की कुल संख्या बढ़कर 457 हो गई है। यानी इस बार प्रदेश में पिछली बार (352) के मुकाबले 105 ज्यादा प्रधान चुने जाएंगे। तीनों पार्टियों के लिए सियासी दांव कांग्रेस के लिए: ग्रामीण इलाका पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है। अगर ‘आप’ यहां वोट काटती है, तो कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक बंट जाएगा। जिसका सीधा लाभ सत्ताधारी बीजेपी को मिल सकता है। AAP के लिए: 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी कैडर खड़ा करने का यह सबसे बड़ा अवसर है। डेढ़ लाख से ज्यादा पदों पर चुनाव लड़कर ‘आप’ हर गांव तक अपना नेटवर्क फैलाना चाहती है। भाजपा के लिए: राज्य में सत्ता में होने के कारण भाजपा के पास सरकारी योजनाओं के दम पर गांवों तक पैठ बनाने का अनुकूल माहौल है। इसके अलावा, कांग्रेस और ‘आप’ के बीच विपक्षी वोटों के संभावित बिखराव का सीधा सियासी फायदा उठाकर भाजपा जिला परिषदों और पंचायत समितियों पर अपना परचम लहराना चाहेगी। सवाल-4: क्या राजस्थान में तीसरे विकल्प के तौर पर जगह बना पाएगी AAP? जवाब: राजस्थान का राजनीतिक इतिहास हमेशा से बीजेपी और कांग्रेस के बीच दो-ध्रुवीय ही रहा है। पूर्व में निर्दलीय प्रत्याशियों और क्षेत्रीय दलों ने कुछ क्षेत्रों में प्रभाव जरूर दिखाया, लेकिन पूरे प्रदेश में ‘तीसरा विकल्प’ बनकर उभरने में कोई भी दल लंबे समय तक कामयाब नहीं हो सका। सवाल -5 : पंचायती राज चुनाव को लेकर क्या है सत्ताधारी भाजपा का मास्टरप्लान? जवाब: बीजेपी के पंचायत चुनाव प्रचार अभियान का आगाज शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन जयपुर के दादिया से करेंगे। नितिन नवीन इस मौके पर पंचायत चुनाव का आगाज करते हुए 90 प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी करेंगे। इसके अलावा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच विपक्षी वोटों के संभावित बिखराव का सीधा सियासी फायदा उठाकर भाजपा प्रदेश की पंचायतों में अपना परचम लहराने की तैयारी में है।

