औरंगाबाद में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की बुधवार को समीक्षा हुई। डीएम अभिलाषा शर्मा ने अधिकारियों को पीड़ितों को समय पर मुआवजा और राहत देने के साथ मामलों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक पीड़ितों को उपलब्ध कराए गए मुआवजे की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक 1 करोड़ 99 लाख 56 हजार 250 रुपए खर्च कर कुल 245 पीड़ितों को मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है। इनमें एफआईआर स्तर के 175 और आरोप पत्र स्तर के 70 पीड़ित शामिल हैं। इसके अलावा अगस्त 2026 तक हत्या से संबंधित मामलों में कुल 25 आश्रितों को नियमित रूप से पेंशन का भुगतान किया जा चुका है। बैठक में गैर-सरकारी विद्यालयों में गरीब बच्चों के निःशुल्क नामांकन की भी समीक्षा हुई। अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा के प्रावधान के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के निजी विद्यालयों में कुल 1,817 गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई। अधिकारियों को इस व्यवस्था की प्रभावी निगरानी करने के निर्देश दिए गए। लंबित मामलों के निष्पादन पर जोर समिति की बैठक में विभिन्न कांडों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। दाउदनगर थाना कांड संख्या 705/25 की समीक्षा के दौरान पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि मामले में सुसंगत धारा 3(2)(Va) का समावेश कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों में प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए पुलिस, अभियोजन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। बैठक में उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, संबंधित विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी तथा समिति के सदस्य मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों का त्वरित निष्पादन और पात्र पीड़ितों को निर्धारित समय सीमा में मुआवजा और राहत राशि उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। औरंगाबाद में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की बुधवार को समीक्षा हुई। डीएम अभिलाषा शर्मा ने अधिकारियों को पीड़ितों को समय पर मुआवजा और राहत देने के साथ मामलों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक पीड़ितों को उपलब्ध कराए गए मुआवजे की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक 1 करोड़ 99 लाख 56 हजार 250 रुपए खर्च कर कुल 245 पीड़ितों को मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है। इनमें एफआईआर स्तर के 175 और आरोप पत्र स्तर के 70 पीड़ित शामिल हैं। इसके अलावा अगस्त 2026 तक हत्या से संबंधित मामलों में कुल 25 आश्रितों को नियमित रूप से पेंशन का भुगतान किया जा चुका है। बैठक में गैर-सरकारी विद्यालयों में गरीब बच्चों के निःशुल्क नामांकन की भी समीक्षा हुई। अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा के प्रावधान के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के निजी विद्यालयों में कुल 1,817 गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई। अधिकारियों को इस व्यवस्था की प्रभावी निगरानी करने के निर्देश दिए गए। लंबित मामलों के निष्पादन पर जोर समिति की बैठक में विभिन्न कांडों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। दाउदनगर थाना कांड संख्या 705/25 की समीक्षा के दौरान पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि मामले में सुसंगत धारा 3(2)(Va) का समावेश कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों में प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए पुलिस, अभियोजन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। बैठक में उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, संबंधित विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी तथा समिति के सदस्य मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों का त्वरित निष्पादन और पात्र पीड़ितों को निर्धारित समय सीमा में मुआवजा और राहत राशि उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

