बक्सर में वामन द्वादशी पर भगवान वामन के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को बुधवार को परेशानी हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आने के कारण मंदिर का मुख्य गेट बंद रखा गया था। दोपहर करीब एक बजे मुख्यमंत्री के दर्शन के बाद ही मंदिर आम भक्तों के लिए खोला गया। इस दौरान सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर के बाहर इंतजार करते रहे। आरा की सबिता देवी ने बताया कि वह भगवान वामन के दर्शन के लिए सुबह ही पहुंच गई थीं। लेकिन मंदिर का गेट बंद था और पुलिसकर्मियों ने साढ़े 12 बजे के बाद गेट खोलने की बात कही थी। घंटों इंतजार के बावजूद दर्शन न होने से श्रद्धालुओं में नाराजगी दिखी। धार्मिक पर्व पर घंटों इंतजार करना पड़ा रोहतास जिले से पहुंची भागमनी देवी ने बताया कि वह एक दिन पहले ही बक्सर आ गई थीं। बुधवार को गंगा स्नान के बाद वह भगवान वामन के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचीं, लेकिन गेट बंद मिला। उन्होंने कहा कि वे सुबह से भूखे-प्यासे सड़क किनारे बैठकर इंतजार कर रहे थे। श्रद्धालुओं के लिए न तो पानी का इंतजाम था और न ही दर्शन की कोई सुविधा। दूर-दराज से आए कई अन्य श्रद्धालुओं ने भी ऐसी ही परेशानी बताई। उनका कहना था कि धार्मिक पर्व पर उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। एक श्रद्धालु ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘भगवान के दर्शन के लिए आए हैं, पर नेताओं के दर्शन का इंतजार करना पड़ रहा है।’ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे महिलाओं ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्व पर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को इतनी देर रोकना ठीक नहीं है। हालांकि, मुख्यमंत्री के आने को लेकर मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर बक्सर में सड़कों की साफ-सफाई, रंग-रोगन और अन्य व्यवस्थाओं में बदलाव जरूर नजर आया, लेकिन वामन द्वादशी जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं को हुई परेशानी ने बक्सर की बदली तस्वीर के बीच पुराने सवालों को भी सामने ला दिया। सवाल यह रहा कि वीआईपी सुरक्षा और आम श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच बेहतर समन्वय क्यों नहीं बनाया जा सका। बक्सर में वामन द्वादशी पर भगवान वामन के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को बुधवार को परेशानी हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आने के कारण मंदिर का मुख्य गेट बंद रखा गया था। दोपहर करीब एक बजे मुख्यमंत्री के दर्शन के बाद ही मंदिर आम भक्तों के लिए खोला गया। इस दौरान सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर के बाहर इंतजार करते रहे। आरा की सबिता देवी ने बताया कि वह भगवान वामन के दर्शन के लिए सुबह ही पहुंच गई थीं। लेकिन मंदिर का गेट बंद था और पुलिसकर्मियों ने साढ़े 12 बजे के बाद गेट खोलने की बात कही थी। घंटों इंतजार के बावजूद दर्शन न होने से श्रद्धालुओं में नाराजगी दिखी। धार्मिक पर्व पर घंटों इंतजार करना पड़ा रोहतास जिले से पहुंची भागमनी देवी ने बताया कि वह एक दिन पहले ही बक्सर आ गई थीं। बुधवार को गंगा स्नान के बाद वह भगवान वामन के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचीं, लेकिन गेट बंद मिला। उन्होंने कहा कि वे सुबह से भूखे-प्यासे सड़क किनारे बैठकर इंतजार कर रहे थे। श्रद्धालुओं के लिए न तो पानी का इंतजाम था और न ही दर्शन की कोई सुविधा। दूर-दराज से आए कई अन्य श्रद्धालुओं ने भी ऐसी ही परेशानी बताई। उनका कहना था कि धार्मिक पर्व पर उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। एक श्रद्धालु ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘भगवान के दर्शन के लिए आए हैं, पर नेताओं के दर्शन का इंतजार करना पड़ रहा है।’ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे महिलाओं ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्व पर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को इतनी देर रोकना ठीक नहीं है। हालांकि, मुख्यमंत्री के आने को लेकर मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर बक्सर में सड़कों की साफ-सफाई, रंग-रोगन और अन्य व्यवस्थाओं में बदलाव जरूर नजर आया, लेकिन वामन द्वादशी जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं को हुई परेशानी ने बक्सर की बदली तस्वीर के बीच पुराने सवालों को भी सामने ला दिया। सवाल यह रहा कि वीआईपी सुरक्षा और आम श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच बेहतर समन्वय क्यों नहीं बनाया जा सका।

