रामपुर में पर्यूषण पर्व के अंतर्गत जैन समाज में उत्तम त्याग धर्म श्रद्धा, भक्ति और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के जैन मंदिरों में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं को मोह-ममता, आसक्ति, अहंकार और संग्रह की प्रवृत्ति का त्याग कर आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। 84 कोस मथुरा से रामपुर आए शास्त्री नमन जैन एवं आर्जव जैन ने उत्तम त्याग धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि त्याग का अर्थ केवल सांसारिक वस्तुओं को छोड़ देना नहीं है। वास्तविक त्याग मन में बसे मोह, ममता, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को दूर करना है। उन्होंने कहा कि परिग्रह और आसक्ति में अधिक उलझने से मनुष्य आत्मिक शांति से दूर होता जाता है। अहंकार और स्वार्थ का त्याग कर संतोष, संयम और करुणा को जीवन में अपनाना चाहिए। श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बच्चों की भजन प्रतियोगिता आयोजित की गई। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने धार्मिक भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और उपस्थित लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया। वहीं श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन हुआ। इसमें बच्चों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। धार्मिक गीतों एवं भजनों पर आधारित अंताक्षरी से मंदिर परिसर में भक्ति के साथ उल्लास का वातावरण बना रहा। जैन समाज के लोगों ने कहा कि पर्यूषण पर्व आत्मावलोकन और जीवन की कमियों को दूर करने का अवसर है। उत्तम त्याग धर्म मनुष्य को मोह-ममता और अहंकार छोड़कर संतोष, संयम तथा आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर दिनेश जैन खंडेलवाल, प्रमोद कुमार जैन, प्रदीप कुमार जैन, विशाल जैन, वर्षा जैन, शीनू जैन, सपना पंकज जैन, आशीष जैन, दिनेश जैन सेठी, भारत भूषण जैन, ज्ञानेंद्र जैन, मुकेश जैन सेठी, दिशा जैन, प्रिया जैन, अलका जैन, आयुषी जैन, नितिन जैन आदि मौजूद रहे।

