नर्मदापुरम के बागरा में फॉरेस्ट की सीमा से महज 50 मीटर दूर राजस्व की जमीन पर खनन माफियाओं ने सैकड़ों डंपर लाल मिट्टी और मुरम निकालकर परिवहन कर दिया। अवैध मिट्टी उत्खनन का सिलसिला लंबे समय से जारी था। 6 दिन पहले फॉरेस्ट की जमीन से रास्ता खोदते पोकलेन मशीन पकड़े जाने के बाद अवैध उत्खनन उजागर हुआ। फॉरेस्ट ने पोकलेन मशीन पर प्रकरण दर्ज कर लिया। मीडिया में खबरें आने के तीन दिन बाद राजस्व विभाग की नींद खुली। तहसीलदार के निर्देश पर आरआई-पटवारी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान गड्ढों में पानी भरा मिला। टीम के साथ पहुंचे कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें पानी में मगरमच्छ होने की बात कही। जिससे डरकर आरआई-पटवारी अवैध उत्खनन का सर्वे अधूरा करके ही वहां से निकल आए। ऐस में यह क्लियर नहीं हो पाया कि पुराना उत्खनन कितना और नया कितने क्षेत्र में हुआ। हालांकि आरआई मोहनप्रसाद दुबे वहां हुई खुदाई को अंदाजे से पुरानी बता रहे हैं। 10 साल पहले थी वैध खदान, बाद में बंद हुई उत्तर बागरा जंगल के कक्ष क्रमांक 322 की सीमा के पास अवैध खनन हुआ है। वहां 10-12 साल पहले वैध तरीके से खनन हुआ करता था, फिर वो बंद हो गई। वो जगह वर्तमान में फॉरेस्ट की सीमा से मात्र 50 मीटर दूर है। खनन की अनुमति नहीं है, बावजूद वहां से मिट्टी निकालने का सिलसिला जारी रहा। 6 दिन पहले फॉरेस्ट की जमीन से रास्ता खोदते पोकलेन मशीन को पकड़ा गया, जिसके बाद से वर्तमान में खुदाई बंद है। खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। फॉरेस्ट ने पोकलेन मशीन के मालिक जितेंद्र राव के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। मगरमच्छ देखे नहीं, केवल सुनने भर से डरे करीब 3 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में 10-12 फीट गहराई तक मिट्टी खोदकर निकाली गई। जहां वर्तमान में तालाबनुमा स्थिति है, जिसमें पानी भरा हुआ है। आरआई मोहनप्रसाद दुबे से पूछा कि क्या आपको मगरमच्छ दिखे तो उनका कहना है कि हमें वहां नहीं दिखे, पर लोग बता रहे थे। मगरमच्छ तेजी से भागते हैं। हम चपेट में न आएं, इसलिए वहां से जान बचाकर निकल आए। डीएफओ बोले – फॉरेस्ट सीमा से 250 मीटर में खुदाई के लिए NOC जरूरी डीएफओ गौरव शर्मा ने बताया कि पोकलेन मशीन पकड़ने के बाद हमने रेंजर द्वारा की गई कार्रवाई की असलियत जानने के लिए प्रशिक्षु IFS, SDO और मानचित्रकार को जांच के लिए भेजा। फॉरेस्ट की जमीन से वर्तमान में थोड़ी खुदाई मिली, लेकिन सीमा से 50 मीटर दूरी पर बड़े स्तर पर खुदाई मिली। फॉरेस्ट की जमीन से 250 मीटर दूर तक खुदाई करने के लिए NOC लेना अनिवार्य होता है, जो हमसे नहीं ली गई। वहां जमीन और खुदाई की स्थिति जानने के लिए संयुक्त जांच के लिए कलेक्टर को पत्र लिखेंगे। जिसमें फॉरेस्ट और राजस्व टीम संयुक्त जांच करेगी और अवैध उत्खनन करने वालों की पहचान कर कार्रवाई हो सकेगी। फॉरेस्ट जमीन से थोड़ी खुदाई के साथ पेड़ों को उखाड़ा गया है, जिसके चलते प्रकरण दर्ज किया है। पोकलेन मशीन राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कांग्रेस – 7 दिन में कार्रवाई करें, वरना आंदोलन बागरा-तवा क्षेत्र में राजस्व और वन विभाग की जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन को लेकर मंगलवार को ब्लॉक कांग्रेस ने ज्ञापन दिया है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत यादव के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में खनन में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने और फॉरेस्ट क्षेत्र से जब्त पोकलेन मशीन को राजसात करने की मांग की गई है। कांग्रेस ने प्रशासन को 7 दिन में कार्रवाई का समय दिया है। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। कांग्रेस ने प्रशासन और फॉरेस्ट पर लगाएं आरोप कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष पुष्पराज पटेल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया। बागड़ा के जंगल और राजस्व क्षेत्र में इतने बड़े स्तर से उत्खनन हुआ कि सैटेलाइट से दिख रहा। हजारों डंपर मिट्टी खोदकर परिवहन हो गया। प्रशासन और फॉरेस्ट को खबर तक नहीं लगी। यह हास्यप्रद बात है। उनका कहना है कि तहसीलदार, एसडीएम, खनिज अधिकारी ने अब तक उस अवैध उत्खनन वाले क्षेत्र को देखने नहीं पहुंचे। अवैध उत्खनन होने की खबर तो नहीं लगी, जब मामला उजागर हुआ तो चोर को ढूंढने में भी अफसर गंभीर नहीं है। मौन सहमति उन्होंने कहा सुखी जलाऊ लकड़ी बिनकर लाने वालों को बीट गार्ड, डिप्टी रेंजर पकड़ लेते। पर डंपर उन्हें नजर नहीं आते। उन्होंने कहा अगर जब्त पोकलेन मशीन राजसात के बजाय छोड़ा तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।

