फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर आम लोगों को प्रभावित करने, डराने-धमकाने और ठगी करने वाले एक शातिर अपराधी को औरंगाबाद के नगर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवक विकास कुमार गयाजी जिले के टेकारी थानाक्षेत्र अंतर्गत अर्कढिबरिया गांव का रहने वाला है। उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ नगर थाना में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा ने बताया कि 21 सितंबर को नगर थानाध्यक्ष को सूचना मिली कि जसोइया मोड़ के पास एक व्यक्ति नशे की हालत में खुद को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताकर आम लोगों को प्रभावित कर रहा है। सूचना मिलने के बाद नगर थाना की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और उक्त व्यक्ति को पुलिस अभिरक्षा में लिया। पुलिस को खुद को ट्रेनी आईपीएस अफसर बताया, दावे पर हुआ शक पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम विकास कुमार बताया और खुद को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताते हुए अपनी पहचान बताने की कोशिश की। पुलिस को उसके दावे पर संदेह हुआ। इसके बाद उसके बताए गृह जिले गया के संबंधित थाना से संपर्क कर उसके बारे में सत्यापन कराया गया। सत्यापन में स्पष्ट हुआ कि विकास कुमार कोई आईपीएस अधिकारी नहीं है। पुलिस के अनुसार वह कथित तौर पर फर्जी पहचान बनाकर लोगों को प्रभावित करने और अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करने का प्रयास करता रहा है। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसके साथ रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया था।साथ ही उसकी स्कॉर्पियो गाड़ी को कुटुंबा थानाक्षेत्र के एरका चेकपोस्ट समीप से बरामद किया गया था। जबकि विकास पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप पुलिस की जांच में उसके पूर्व के मामलों की भी जानकारी सामने आई। पुलिस के अनुसार विकास कुमार ने पूर्व में वर्ष 2023 में खुद को पटना के तत्कालीन एसएसपी राजीव कुमार मिश्रा बताकर जहानाबाद रेल थाना को ट्रेन को बम से उड़ाने की सूचना दी थी। इस मामले में जहानाबाद रेल थाना कांड संख्या 56/23 दर्ज होने की बात पुलिस ने बताई है। इसके अलावा गया के मुफस्सिल थाना में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कांड संख्या 664/26 तथा नगर थाना औरंगाबाद में कांड संख्या 598/26 और 597/26 दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक वह अधिकारियों का नाम लेकर लोगों पर प्रभाव डालने की कोशिश करता था। फर्जी आईपीएस बनकर लोगों को डराने और अपनी पहचान का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई की है। गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी नगर थानाध्यक्ष औरंगाबाद द्वारा किए गए गहन अवलोकन के बाद विकास कुमार के खिलाफ फर्जी आईपीएस बनकर जालसाजी करने के आरोपों की पुष्टि होने की बात पुलिस ने कही है। इसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान उसने अपने अपराध को स्वीकार किया है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है, जिसकी जांच भी की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने फर्जी अधिकारी बनकर किन-किन लोगों से संपर्क किया और इस तरीके से किसी अन्य व्यक्ति को भी ठगी या धमकी का शिकार बनाया है या नहीं। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ दर्ज मामलों में भारतीय न्याय संहिता और अन्य संबंधित कानूनों की धाराओं का उल्लेख है। जहानाबाद रेल थाना के पुराने मामले में भी उसके खिलाफ कार्रवाई दर्ज है। फर्जी आईपीएस बनकर पुलिस को ही बनाया मोहरा आरोपी विकास ने खुद को पलामू का प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताकर औरंगाबाद पुलिस को झांसा में ले लिया था। आरोपी ने नगर थाना के सरकारी मोबाइल पर व्हाट्सऐप कॉल कर रमेश चौक के पास गबन के मामले में छापेमारी की बात कही और गश्ती पदाधिकारी का मोबाइल नंबर मांगा था। व्हाट्सऐप की डीपी में पुलिस की वर्दी वाली तस्वीर लगी होने के कारण पुलिसकर्मियों को तत्काल संदेह नहीं हुआ। इसके बाद कथित आईपीएस ने पुलिसकर्मियों को निर्देश देना शुरू कर दिया। सफेद स्कॉर्पियो से जसोइया मोड़ स्थित सीमेंट फैक्ट्री के पास पहुंचकर खीरा लदे पिकअप चालक को पकड़ने और दो युवकों को फ्रॉड के आरोप में हिरासत में लेने की सूचना दी गई। हवलदार शिव कुमार सिंह को भी स्कॉर्पियो में बैठा लिया गया। मामला तब संदिग्ध हुआ, जब कथित आईपीएस के मोबाइल पर पुलिस ने संपर्क किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। हवलदार से संपर्क करने पर बताया कि उसका मोबाइल भी ले लिया गया है। इसके बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाश शुरू की। लारा हीरो शोरूम के पास हवलदार और दो युवकों को बरामद किया गया। दोनों युवकों की पहचान सुनील कुमार रवि और आलोक कुमार के रूप में हुई। पिकअप चालक लक्ष्मी प्रसाद ने आरोप लगाया कि स्कॉर्पियो में बैठे व्यक्ति ने खुद को एसपी बताया और पिकअप में चोरी का माल होने की बात कहकर उससे पैसे मांगे। पुलिस को स्कॉर्पियो का नंबर BR01PG 0877 मिला। एरका चेकपोस्ट पर वाहन को रोककर चालक पिंटू कुमार को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ में खुला फर्जी आईपीएस का राज, दो गिरफ्तार; मुख्य आरोपी फरार स्कॉर्पियो चालक पिंटू कुमार से पूछताछ के बाद पुलिस को फर्जी आईपीएस बनकर पुलिस को गुमराह करने वाले मुख्य आरोपी की पहचान का पता चला। पुलिस के अनुसार पिंटू ने बताया कि डाल्टेनगंज के कुंदन कुमार ने उसे एक फर्जी एसपी को औरंगाबाद ले जाने के लिए कहा था। इसके बदले अच्छी कमाई का लालच दिया गया था। पुलिस के अनुसार विकास के साथ औरंगाबाद के सिमरा थाना क्षेत्र के पड़रिया निवासी संजय यादव भी बॉडीगार्ड के रूप में था। विकास और संजय को पड़रिया में छोड़ने के बाद पिंटू डाल्टेनगंज लौट रहा था, तभी अंबा चेकपोस्ट पर पकड़ा गया। बाद में पुलिस टीम पिंटू को लेकर डाल्टेनगंज पहुंची और उसके सहयोग से कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार कुंदन ने पूछताछ में बताया कि वह पहले भी विकास को पुलिस के रूप में रोहतास और भभुआ ले जा चुका है। पुलिस ने स्कॉर्पियो, मोबाइल फोन, फर्जी आईकार्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। मामले में विकास कुमार, पिंटू कुमार, संजय यादव, कुंदन कुमार और पटना निवासी संजय कुमार मिश्रा को आरोपी बनाया गया था। फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर आम लोगों को प्रभावित करने, डराने-धमकाने और ठगी करने वाले एक शातिर अपराधी को औरंगाबाद के नगर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवक विकास कुमार गयाजी जिले के टेकारी थानाक्षेत्र अंतर्गत अर्कढिबरिया गांव का रहने वाला है। उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ नगर थाना में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा ने बताया कि 21 सितंबर को नगर थानाध्यक्ष को सूचना मिली कि जसोइया मोड़ के पास एक व्यक्ति नशे की हालत में खुद को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताकर आम लोगों को प्रभावित कर रहा है। सूचना मिलने के बाद नगर थाना की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और उक्त व्यक्ति को पुलिस अभिरक्षा में लिया। पुलिस को खुद को ट्रेनी आईपीएस अफसर बताया, दावे पर हुआ शक पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम विकास कुमार बताया और खुद को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताते हुए अपनी पहचान बताने की कोशिश की। पुलिस को उसके दावे पर संदेह हुआ। इसके बाद उसके बताए गृह जिले गया के संबंधित थाना से संपर्क कर उसके बारे में सत्यापन कराया गया। सत्यापन में स्पष्ट हुआ कि विकास कुमार कोई आईपीएस अधिकारी नहीं है। पुलिस के अनुसार वह कथित तौर पर फर्जी पहचान बनाकर लोगों को प्रभावित करने और अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करने का प्रयास करता रहा है। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसके साथ रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया था।साथ ही उसकी स्कॉर्पियो गाड़ी को कुटुंबा थानाक्षेत्र के एरका चेकपोस्ट समीप से बरामद किया गया था। जबकि विकास पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करने का आरोप पुलिस की जांच में उसके पूर्व के मामलों की भी जानकारी सामने आई। पुलिस के अनुसार विकास कुमार ने पूर्व में वर्ष 2023 में खुद को पटना के तत्कालीन एसएसपी राजीव कुमार मिश्रा बताकर जहानाबाद रेल थाना को ट्रेन को बम से उड़ाने की सूचना दी थी। इस मामले में जहानाबाद रेल थाना कांड संख्या 56/23 दर्ज होने की बात पुलिस ने बताई है। इसके अलावा गया के मुफस्सिल थाना में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कांड संख्या 664/26 तथा नगर थाना औरंगाबाद में कांड संख्या 598/26 और 597/26 दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक वह अधिकारियों का नाम लेकर लोगों पर प्रभाव डालने की कोशिश करता था। फर्जी आईपीएस बनकर लोगों को डराने और अपनी पहचान का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई की है। गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी नगर थानाध्यक्ष औरंगाबाद द्वारा किए गए गहन अवलोकन के बाद विकास कुमार के खिलाफ फर्जी आईपीएस बनकर जालसाजी करने के आरोपों की पुष्टि होने की बात पुलिस ने कही है। इसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान उसने अपने अपराध को स्वीकार किया है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है, जिसकी जांच भी की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने फर्जी अधिकारी बनकर किन-किन लोगों से संपर्क किया और इस तरीके से किसी अन्य व्यक्ति को भी ठगी या धमकी का शिकार बनाया है या नहीं। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ दर्ज मामलों में भारतीय न्याय संहिता और अन्य संबंधित कानूनों की धाराओं का उल्लेख है। जहानाबाद रेल थाना के पुराने मामले में भी उसके खिलाफ कार्रवाई दर्ज है। फर्जी आईपीएस बनकर पुलिस को ही बनाया मोहरा आरोपी विकास ने खुद को पलामू का प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताकर औरंगाबाद पुलिस को झांसा में ले लिया था। आरोपी ने नगर थाना के सरकारी मोबाइल पर व्हाट्सऐप कॉल कर रमेश चौक के पास गबन के मामले में छापेमारी की बात कही और गश्ती पदाधिकारी का मोबाइल नंबर मांगा था। व्हाट्सऐप की डीपी में पुलिस की वर्दी वाली तस्वीर लगी होने के कारण पुलिसकर्मियों को तत्काल संदेह नहीं हुआ। इसके बाद कथित आईपीएस ने पुलिसकर्मियों को निर्देश देना शुरू कर दिया। सफेद स्कॉर्पियो से जसोइया मोड़ स्थित सीमेंट फैक्ट्री के पास पहुंचकर खीरा लदे पिकअप चालक को पकड़ने और दो युवकों को फ्रॉड के आरोप में हिरासत में लेने की सूचना दी गई। हवलदार शिव कुमार सिंह को भी स्कॉर्पियो में बैठा लिया गया। मामला तब संदिग्ध हुआ, जब कथित आईपीएस के मोबाइल पर पुलिस ने संपर्क किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। हवलदार से संपर्क करने पर बताया कि उसका मोबाइल भी ले लिया गया है। इसके बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाश शुरू की। लारा हीरो शोरूम के पास हवलदार और दो युवकों को बरामद किया गया। दोनों युवकों की पहचान सुनील कुमार रवि और आलोक कुमार के रूप में हुई। पिकअप चालक लक्ष्मी प्रसाद ने आरोप लगाया कि स्कॉर्पियो में बैठे व्यक्ति ने खुद को एसपी बताया और पिकअप में चोरी का माल होने की बात कहकर उससे पैसे मांगे। पुलिस को स्कॉर्पियो का नंबर BR01PG 0877 मिला। एरका चेकपोस्ट पर वाहन को रोककर चालक पिंटू कुमार को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ में खुला फर्जी आईपीएस का राज, दो गिरफ्तार; मुख्य आरोपी फरार स्कॉर्पियो चालक पिंटू कुमार से पूछताछ के बाद पुलिस को फर्जी आईपीएस बनकर पुलिस को गुमराह करने वाले मुख्य आरोपी की पहचान का पता चला। पुलिस के अनुसार पिंटू ने बताया कि डाल्टेनगंज के कुंदन कुमार ने उसे एक फर्जी एसपी को औरंगाबाद ले जाने के लिए कहा था। इसके बदले अच्छी कमाई का लालच दिया गया था। पुलिस के अनुसार विकास के साथ औरंगाबाद के सिमरा थाना क्षेत्र के पड़रिया निवासी संजय यादव भी बॉडीगार्ड के रूप में था। विकास और संजय को पड़रिया में छोड़ने के बाद पिंटू डाल्टेनगंज लौट रहा था, तभी अंबा चेकपोस्ट पर पकड़ा गया। बाद में पुलिस टीम पिंटू को लेकर डाल्टेनगंज पहुंची और उसके सहयोग से कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार कुंदन ने पूछताछ में बताया कि वह पहले भी विकास को पुलिस के रूप में रोहतास और भभुआ ले जा चुका है। पुलिस ने स्कॉर्पियो, मोबाइल फोन, फर्जी आईकार्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। मामले में विकास कुमार, पिंटू कुमार, संजय यादव, कुंदन कुमार और पटना निवासी संजय कुमार मिश्रा को आरोपी बनाया गया था।

