लातेहार जिले में मानसून के दौरान सर्पदंश की घटनाओं में तेजी आई है। जून, जुलाई और अगस्त के तीन महीनों में जिले में 413 लोग सांप के काटने के बाद इलाज के लिए विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचे। इनमें छह लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में सर्पदंश के सबसे अधिक 189 मामले सामने आए। जून में 72 और अगस्त में 152 लोग सर्पदंश का शिकार हुए। बारिश के दौरान सांपों के बिल में पानी भर जाने के कारण वे सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में बाहर निकलते हैं। इसी दौरान सांप रिहायशी इलाकों, घरों, खेतों और आसपास के क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। इससे लोगों के सर्पदंश की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अधिकांश मामलों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया और एंटी-वेनम दिए जाने से उनकी जान बचाई जा सकी। लातेहार प्रखंड में सबसे अधिक 185 मामले स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, लातेहार प्रखंड में सर्पदंश के सबसे अधिक 185 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 90, चंदवा में 64, महुआडांड़ में 29, मनिका में 22 और बरवाडीह में छह सर्पदंश के मामले सामने आए। लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम यानी स्नेक वेनम एंटीसीरम का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया है। सदर अस्पताल और लातेहार सीएचसी में 3728, महुआडांड़ में 3037, बालूमाथ में 2785, बरवाडीह में 2222, चंदवा में 2207, गारू में 1863 और मनिका में 2200 एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं। विभाग का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज सबसे महत्वपूर्ण है। सीएस ने कहा- झाड़-फूंक में समय न गंवाएं सर्पदंश से जिन छह लोगों की मौत हुई है, उनमें बारियातू थाना क्षेत्र के साल्वे गांव की सुनीता देवी, बालूमाथ क्षेत्र की बुलकी मसोमात, बारियातू के पंकज गंझू, लातेहार सदर क्षेत्र के अंकित उरांव, महुआडांड़ की प्रतिज्ञा कुमारी और बालूमाथ की कीर्ति कुमारी शामिल हैं। सिविल सर्जन राजमोहन खलको ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के चक्कर में समय बर्बाद नहीं करें। पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल ले जाएं। चिकित्सकों के अनुसार, सर्पदंश के बाद समय पर एंटी-वेनम और जरूरी चिकित्सा मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। लातेहार जिले में मानसून के दौरान सर्पदंश की घटनाओं में तेजी आई है। जून, जुलाई और अगस्त के तीन महीनों में जिले में 413 लोग सांप के काटने के बाद इलाज के लिए विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचे। इनमें छह लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में सर्पदंश के सबसे अधिक 189 मामले सामने आए। जून में 72 और अगस्त में 152 लोग सर्पदंश का शिकार हुए। बारिश के दौरान सांपों के बिल में पानी भर जाने के कारण वे सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में बाहर निकलते हैं। इसी दौरान सांप रिहायशी इलाकों, घरों, खेतों और आसपास के क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। इससे लोगों के सर्पदंश की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अधिकांश मामलों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया और एंटी-वेनम दिए जाने से उनकी जान बचाई जा सकी। लातेहार प्रखंड में सबसे अधिक 185 मामले स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, लातेहार प्रखंड में सर्पदंश के सबसे अधिक 185 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 90, चंदवा में 64, महुआडांड़ में 29, मनिका में 22 और बरवाडीह में छह सर्पदंश के मामले सामने आए। लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम यानी स्नेक वेनम एंटीसीरम का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया है। सदर अस्पताल और लातेहार सीएचसी में 3728, महुआडांड़ में 3037, बालूमाथ में 2785, बरवाडीह में 2222, चंदवा में 2207, गारू में 1863 और मनिका में 2200 एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं। विभाग का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज सबसे महत्वपूर्ण है। सीएस ने कहा- झाड़-फूंक में समय न गंवाएं सर्पदंश से जिन छह लोगों की मौत हुई है, उनमें बारियातू थाना क्षेत्र के साल्वे गांव की सुनीता देवी, बालूमाथ क्षेत्र की बुलकी मसोमात, बारियातू के पंकज गंझू, लातेहार सदर क्षेत्र के अंकित उरांव, महुआडांड़ की प्रतिज्ञा कुमारी और बालूमाथ की कीर्ति कुमारी शामिल हैं। सिविल सर्जन राजमोहन खलको ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के चक्कर में समय बर्बाद नहीं करें। पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल ले जाएं। चिकित्सकों के अनुसार, सर्पदंश के बाद समय पर एंटी-वेनम और जरूरी चिकित्सा मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

