पीलीभीत में बेसिक शिक्षा विभाग के समग्र शिक्षा अभियान की ग्रांट में 2.13 लाख रुपये की गड़बड़ी के मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। प्राथमिक जांच में वित्तीय अनियमितता साबित होने पर आरोपी जिला समन्वयक (निपुण) ललित वर्मा की संविदा तुरंत प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। ललित वर्मा पूर्व में लेखाकार के पद पर भी कार्यरत रह चुके हैं। NOC मांगने पर खुला फर्जीवाड़े का राज मामला मई से जुलाई के बीच का है। इसका खुलासा तब हुआ जब एक स्कूल के प्रधानाचार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रोशनी सिंह के पास पहुंचे। जब खातों और भुगतान फाइलों का मिलान कराया गया, तो फर्जीवाड़े की बात सामने आई। एक ही स्कूल को तीन बार भेजी ग्रांट, बिना पात्रता दिए 1.33 लाख जांच में पता चला कि ललित वर्मा ने एक ही स्कूल को कंपोजिट ग्रांट के 22 हजार रुपये तीन अलग-अलग बार भेजे, जिससे कुल 66 हजार का भुगतान हो गया। इसी तरह टीएलएम मद के 4600 रुपये भी तीन बार भेजे गए। इसके अलावा स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब के नाम पर 1.33 लाख रुपये ऐसे स्कूल के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए, जो इसके लिए पात्र ही नहीं था। इस तरह कुल 2.13 लाख रुपये की गड़बड़ी की गई। रकम रिकवर, जांच के बाद दर्ज होगी FIR BSA रोशनी सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित स्कूल से 2.13 लाख रुपये की पूरी रकम रिकवर करा ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने 9 जून को सीडीओ और एडीएम (न्यायिक) समेत चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। सीडीओ सतीश प्रसाद मिश्रा के अनुसार प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर सेवा समाप्त की गई है। अंतिम जांच रिपोर्ट आते ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। “सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी के माध्यम से जिले के सभी स्कूलों को भेजी गई ग्रांट की जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अन्य किसी स्कूल में इस तरह का फर्जीवाड़ा तो नहीं हुआ है।”— रोशनी सिंह, बीएसए, पीलीभीत

