मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि गरीबों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा, लेकिन पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांवों में चल रहे ईंट-भट्ठे, प्राइवेट स्कूल, व्यावसायिक गतिविधियों और मोबाइल टावरों से पंचायतों को टैक्स जरूर लेना चाहिए। इस राजस्व से गांवों में कचरा प्रबंधन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जा सकता है। इसके साथ ही सीएम ने नए परिसीमन के बाद पंचायत चुनाव कराने की भी बात कही। सोमवार को सीएम होटल ताज में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ को संबोधित कर रहे थे। इसके पहले कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख ने किया। मुखिया को बताया सबसे ताकतवर जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा पावरफुल जनप्रतिनिधियों में मुखिया शामिल हैं, क्योंकि उनके पास बड़ी संख्या में जिम्मेदारियां और काम होते हैं। मुखिया का चुनाव लड़ना भी आसान नहीं है। पंचायत स्तर पर लोगों से सीधा जुड़ाव होने के कारण मुखिया की भूमिका गांव के विकास में काफी महत्वपूर्ण है। गांवों में टैक्स व्यवस्था लागू करने पर जोर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गांवों में स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाने की व्यवस्था विकसित करने की बात कही। बिहार में अभी गांवों में टैक्स की व्यवस्था नहीं है, जबकि दूसरे राज्यों में पंचायतें स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में एक पंचायत से बड़ी मात्रा में राजस्व मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में यदि कोई फैक्ट्री चल रही है, मोबाइल टावर लगाया जा रहा है या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं, तो उनसे टैक्स के रूप में राजस्व प्राप्त होना चाहिए। इससे पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आम लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। पंचायत चुनाव से पहले इस तरह की व्यवस्था तैयार करने पर काम किया जाना चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों से भी अपने-अपने गांवों की जरूरतों और संभावनाओं की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को देनी चाहिए। परिसीमन के बाद होगा अगला पंचायत चुनाव मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पंचायत कई गांवों की आबादी काफी ज्यादा है और उनके साथ आसपास के कई गांव भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके गांव की आबादी करीब 20 हजार है और उसके साथ तीन अन्य गांव भी सटे हुए हैं। ऐसे में पंचायतों की संरचना और व्यवस्था को नए तरीके से मजबूत करने की जरूरत है। सीएम ने कहा कि नियमानुसार 7,500 की आबादी पर एक पंचायत होनी चाहिए। पंचायतों में बनेगा इंजीनियरिंग सेल मुख्यमंत्री ने कहा कि हर हाल में पंचायती राज विभाग में इंजीनियरिंग सेल बनाया जाना चाहिए। गांवों में सड़क, नाली, भवन, स्ट्रीट लाइट और दूसरी आधारभूत संरचनाओं से जुड़े कामों को बेहतर तकनीकी निगरानी की जरूरत है। कार्यक्रम के दौरान नल-जल योजना, ग्रामीण सड़कों के निर्माण, सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट और पंचायतों में डिजिटल गवर्नेंस को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के साथ तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। बिहार में 50 निजी विश्वविद्यालय खोलने की कल्पना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा और रोजगार को लेकर भी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की चाहती है कि बिहार में कम से कम 50 निजी विश्वविद्यालय खुलें। इससे राज्य में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना चाहिए। रोजगार को लेकर कहा कि बिहार के बड़ी संख्या में लोग रोजगार और मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना है। अगले पांच साल में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पलायन को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि अगर गांव विकसित हो जाएंगे तो लोगों को रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के लिए शहरों की ओर देखने की जरूरत कम होगी। इससे गांवों में ही लोगों को बेहतर अवसर मिलेंगे और शहरों पर आबादी का दबाव भी कम होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि गरीबों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा, लेकिन पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांवों में चल रहे ईंट-भट्ठे, प्राइवेट स्कूल, व्यावसायिक गतिविधियों और मोबाइल टावरों से पंचायतों को टैक्स जरूर लेना चाहिए। इस राजस्व से गांवों में कचरा प्रबंधन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जा सकता है। इसके साथ ही सीएम ने नए परिसीमन के बाद पंचायत चुनाव कराने की भी बात कही। सोमवार को सीएम होटल ताज में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ को संबोधित कर रहे थे। इसके पहले कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख ने किया। मुखिया को बताया सबसे ताकतवर जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा पावरफुल जनप्रतिनिधियों में मुखिया शामिल हैं, क्योंकि उनके पास बड़ी संख्या में जिम्मेदारियां और काम होते हैं। मुखिया का चुनाव लड़ना भी आसान नहीं है। पंचायत स्तर पर लोगों से सीधा जुड़ाव होने के कारण मुखिया की भूमिका गांव के विकास में काफी महत्वपूर्ण है। गांवों में टैक्स व्यवस्था लागू करने पर जोर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गांवों में स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाने की व्यवस्था विकसित करने की बात कही। बिहार में अभी गांवों में टैक्स की व्यवस्था नहीं है, जबकि दूसरे राज्यों में पंचायतें स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में एक पंचायत से बड़ी मात्रा में राजस्व मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में यदि कोई फैक्ट्री चल रही है, मोबाइल टावर लगाया जा रहा है या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं, तो उनसे टैक्स के रूप में राजस्व प्राप्त होना चाहिए। इससे पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आम लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। पंचायत चुनाव से पहले इस तरह की व्यवस्था तैयार करने पर काम किया जाना चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों से भी अपने-अपने गांवों की जरूरतों और संभावनाओं की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को देनी चाहिए। परिसीमन के बाद होगा अगला पंचायत चुनाव मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पंचायत कई गांवों की आबादी काफी ज्यादा है और उनके साथ आसपास के कई गांव भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके गांव की आबादी करीब 20 हजार है और उसके साथ तीन अन्य गांव भी सटे हुए हैं। ऐसे में पंचायतों की संरचना और व्यवस्था को नए तरीके से मजबूत करने की जरूरत है। सीएम ने कहा कि नियमानुसार 7,500 की आबादी पर एक पंचायत होनी चाहिए। पंचायतों में बनेगा इंजीनियरिंग सेल मुख्यमंत्री ने कहा कि हर हाल में पंचायती राज विभाग में इंजीनियरिंग सेल बनाया जाना चाहिए। गांवों में सड़क, नाली, भवन, स्ट्रीट लाइट और दूसरी आधारभूत संरचनाओं से जुड़े कामों को बेहतर तकनीकी निगरानी की जरूरत है। कार्यक्रम के दौरान नल-जल योजना, ग्रामीण सड़कों के निर्माण, सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट और पंचायतों में डिजिटल गवर्नेंस को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के साथ तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। बिहार में 50 निजी विश्वविद्यालय खोलने की कल्पना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा और रोजगार को लेकर भी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की चाहती है कि बिहार में कम से कम 50 निजी विश्वविद्यालय खुलें। इससे राज्य में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना चाहिए। रोजगार को लेकर कहा कि बिहार के बड़ी संख्या में लोग रोजगार और मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना है। अगले पांच साल में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पलायन को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि अगर गांव विकसित हो जाएंगे तो लोगों को रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के लिए शहरों की ओर देखने की जरूरत कम होगी। इससे गांवों में ही लोगों को बेहतर अवसर मिलेंगे और शहरों पर आबादी का दबाव भी कम होगा।

