इटावा में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से जुड़े जिले के सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों के स्वीकृत सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों ने सोमवार दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का बहिष्कार करने का फैसला किया। शिक्षकों ने अपनी अटकी सेवा संबंधी मांगों को लेकर जिलाधिकारी शुभ्रान्त शुक्ल के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के तौर पर उप जिलाधिकारी न्यायिक राकेश कुमार ने ज्ञापन लिया। प्राध्यापकों ने सेवा सुरक्षित करने के साथ उन्हें नियमित करने की मांग रखी। इसके साथ ही यूजीसी के वेतनमान के हिसाब से सम्मानजनक वेतन दिए जाने की भी मांग की गई। शिक्षकों का कहना है कि उनकी मुख्य समस्या लंबे समय से अटकी है और इसका समाधान किया जाना जरूरी है। प्राध्यापकों के मुताबिक, प्रदेश के 331 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में करीब 25 सालों से सेल्फ फाइनेंस कोर्स चल रहे हैं। इन कोर्स में करीब 3000 शिक्षक काम कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि यूजीसी की तय योग्यता पूरी करने के बावजूद उन्हें सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा है। शिक्षकों ने साफ किया कि वे मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के मकसद का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि अटकी मूल समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर योजना के बहिष्कार का फैसला लिया गया है। शिक्षकों ने सेल्फ फाइनेंस कोर्स को अनुदान पर लेने और शिक्षकों की सेवाओं को सुरक्षित करने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में डॉ. अंकुर वर्मा, डॉ. अश्विनी श्रीवास्तव, डॉ. आलोक अग्रवाल, डॉ. अभिषेक गौड़, डॉ. हृदेश सिंह, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. हेमेंद्र सिंह चौहान, डॉ. ममता यादव, डॉ. नीता पांडेय, डॉ. नमिता पांडे, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. शिमला तहसीन, डॉ. केके यादव, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. नीलम यादव और डॉ. अजय कुमार शर्मा सहित कई और प्राध्यापक मौजूद थे।

