हाथीदह क्षेत्र में सात दिनों तक विराजमान रहे गणपति बप्पा को रविवार को विदाई दी गई। गणेश चतुर्थी के अवसर पर स्थापित की गई प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा और आस्था के माहौल में हुआ। सुबह से ही श्रद्धालुओं में विसर्जन को लेकर काफी उत्साह था। पूजा पंडालों और घरों में विधि-विधान से पूजा और आरती के बाद गणपति की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और भक्ति भरे जयकारों के बीच ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के नारे लगाए गए। जैसे-जैसे गणपति की प्रतिमा विसर्जन स्थल की ओर बढ़ी, माहौल में उत्साह के साथ भावुकता भी दिखी। सात दिनों तक बप्पा के दर्शन और पूजा करने वाले भक्तों के लिए यह विदाई का पल भावुक करने वाला था। कई श्रद्धालु नम आंखों से बप्पा को अंतिम विदाई देते दिखे और अगले साल फिर से उनके आने की कामना की। गणेश उत्सव के दौरान हाथीदह क्षेत्र में लगातार सात दिनों तक भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। अलग-अलग पूजा समितियों ने पूजा, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दूसरे धार्मिक आयोजन किए। इनमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। विसर्जन के साथ ही इस साल का गणेश उत्सव खत्म हो गया। हालांकि, भक्तों के बीच बप्पा की भक्ति और उत्सव की यादें लंबे समय तक बनी रहेंगी। हाथीदह क्षेत्र में सात दिनों तक विराजमान रहे गणपति बप्पा को रविवार को विदाई दी गई। गणेश चतुर्थी के अवसर पर स्थापित की गई प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा और आस्था के माहौल में हुआ। सुबह से ही श्रद्धालुओं में विसर्जन को लेकर काफी उत्साह था। पूजा पंडालों और घरों में विधि-विधान से पूजा और आरती के बाद गणपति की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और भक्ति भरे जयकारों के बीच ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के नारे लगाए गए। जैसे-जैसे गणपति की प्रतिमा विसर्जन स्थल की ओर बढ़ी, माहौल में उत्साह के साथ भावुकता भी दिखी। सात दिनों तक बप्पा के दर्शन और पूजा करने वाले भक्तों के लिए यह विदाई का पल भावुक करने वाला था। कई श्रद्धालु नम आंखों से बप्पा को अंतिम विदाई देते दिखे और अगले साल फिर से उनके आने की कामना की। गणेश उत्सव के दौरान हाथीदह क्षेत्र में लगातार सात दिनों तक भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। अलग-अलग पूजा समितियों ने पूजा, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दूसरे धार्मिक आयोजन किए। इनमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। विसर्जन के साथ ही इस साल का गणेश उत्सव खत्म हो गया। हालांकि, भक्तों के बीच बप्पा की भक्ति और उत्सव की यादें लंबे समय तक बनी रहेंगी।

