कटिहार- बेटी के जन्म पर बैंड-बाजे से घर पहुंची ‘परी’:दादा ने आरती उतारकर किया स्वागत; परिवार ने दिया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश

कटिहार- बेटी के जन्म पर बैंड-बाजे से घर पहुंची ‘परी’:दादा ने आरती उतारकर किया स्वागत; परिवार ने दिया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश

कटिहार में बेटी के जन्म पर एक परिवार ने उसकी घर वापसी को यादगार बना दिया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मां और नन्ही बेटी को बैंड-बाजे के साथ घर लाया गया। रास्तेभर परिवार के लोग नाचते-गाते रहे। घर पहुंचने पर दादी ने आरती उतारकर पोती का स्वागत किया और मिठाइयां बांटी गईं। इस दौरान परिवार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश भी दिया। दूसरी संतान के रूप में आई बेटी, नाम रखा ‘लुक्कू’ मामला कटिहार सदर प्रखंड के हृदयगंज सिमर बागान के झा परिवार का है। 17 सितंबर को शहर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजना झा के निजी क्लीनिक में ध्रुव चंद्र झा के घर दूसरी संतान के रूप में बेटी ने जन्म लिया। परिवार ने प्यार से उसका नाम ‘लुक्कू’ रखा है, लेकिन सभी उसे ‘परी’ कहकर बुलाते हैं। बेटी के जन्म के बाद से ही घर में खुशी का माहौल था। परिवार ने उसकी घर वापसी भी खास अंदाज में करने का फैसला लिया। बैंड-बाजे के साथ घर पहुंची ‘परी’ 20 सितंबर को बच्ची की मां शोमिल झा को अस्पताल से छुट्टी मिली। इसके बाद सर्वमंगला दुर्गा मंदिर परिसर से बेटी की घर वापसी का जश्न शुरू हुआ। परिवार के लोग बैंड-बाजे के साथ मां और बेटी को लेकर हृदयगंज सिमर बागान स्थित अपने घर के लिए रवाना हुए। दादा ध्रुव चंद्र झा, मौसी, मौसा विकास चंद्र ठाकुर समेत परिजन रास्तेभर नाचते-गाते रहे। घर को फूलों से सजाया गया था। इस दौरान लोगों को बेटियों की शिक्षा और सम्मान का संदेश भी दिया गया। दादी ने आरती उतारकर किया स्वागत जैसे ही नन्ही ‘परी’ घर पहुंची, दादी किरण झा आरती की थाली लेकर दरवाजे पर खड़ी थीं। उन्होंने पोती की आरती उतारी। इसके बाद परिवार ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। दादा ध्रुव चंद्र झा ने कहा, “हमारे घर में लक्ष्मी का आगमन हुआ है। बेटी के जन्म से पूरा परिवार खुश है।” वहीं मां शोमिल झा ने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि ऐसे परिवार में बहू बनकर आई हैं, जहां बेटियों को सम्मान दिया जाता है। परिवार ने कहा- बेटी के जन्म पर खुशियां मनाएं इस खुशी में शामिल रमेश कुमार मिश्र, मदनलाल मंडल, एके राज, पवन कुमार शाह और कुंदन कुमार झा ने कहा कि बेटी के जन्म पर दुख मनाने की सोच बदलनी चाहिए। उनके मुताबिक, बेटी दो परिवारों को जोड़ने और संभालने वाली होती है। झा परिवार ने बेटी के स्वागत को सिर्फ पारिवारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा। बैंड-बाजे के साथ उसकी घर वापसी और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संदेश की आसपास के लोगों के बीच भी चर्चा रही। कटिहार में बेटी के जन्म पर एक परिवार ने उसकी घर वापसी को यादगार बना दिया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मां और नन्ही बेटी को बैंड-बाजे के साथ घर लाया गया। रास्तेभर परिवार के लोग नाचते-गाते रहे। घर पहुंचने पर दादी ने आरती उतारकर पोती का स्वागत किया और मिठाइयां बांटी गईं। इस दौरान परिवार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश भी दिया। दूसरी संतान के रूप में आई बेटी, नाम रखा ‘लुक्कू’ मामला कटिहार सदर प्रखंड के हृदयगंज सिमर बागान के झा परिवार का है। 17 सितंबर को शहर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजना झा के निजी क्लीनिक में ध्रुव चंद्र झा के घर दूसरी संतान के रूप में बेटी ने जन्म लिया। परिवार ने प्यार से उसका नाम ‘लुक्कू’ रखा है, लेकिन सभी उसे ‘परी’ कहकर बुलाते हैं। बेटी के जन्म के बाद से ही घर में खुशी का माहौल था। परिवार ने उसकी घर वापसी भी खास अंदाज में करने का फैसला लिया। बैंड-बाजे के साथ घर पहुंची ‘परी’ 20 सितंबर को बच्ची की मां शोमिल झा को अस्पताल से छुट्टी मिली। इसके बाद सर्वमंगला दुर्गा मंदिर परिसर से बेटी की घर वापसी का जश्न शुरू हुआ। परिवार के लोग बैंड-बाजे के साथ मां और बेटी को लेकर हृदयगंज सिमर बागान स्थित अपने घर के लिए रवाना हुए। दादा ध्रुव चंद्र झा, मौसी, मौसा विकास चंद्र ठाकुर समेत परिजन रास्तेभर नाचते-गाते रहे। घर को फूलों से सजाया गया था। इस दौरान लोगों को बेटियों की शिक्षा और सम्मान का संदेश भी दिया गया। दादी ने आरती उतारकर किया स्वागत जैसे ही नन्ही ‘परी’ घर पहुंची, दादी किरण झा आरती की थाली लेकर दरवाजे पर खड़ी थीं। उन्होंने पोती की आरती उतारी। इसके बाद परिवार ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। दादा ध्रुव चंद्र झा ने कहा, “हमारे घर में लक्ष्मी का आगमन हुआ है। बेटी के जन्म से पूरा परिवार खुश है।” वहीं मां शोमिल झा ने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि ऐसे परिवार में बहू बनकर आई हैं, जहां बेटियों को सम्मान दिया जाता है। परिवार ने कहा- बेटी के जन्म पर खुशियां मनाएं इस खुशी में शामिल रमेश कुमार मिश्र, मदनलाल मंडल, एके राज, पवन कुमार शाह और कुंदन कुमार झा ने कहा कि बेटी के जन्म पर दुख मनाने की सोच बदलनी चाहिए। उनके मुताबिक, बेटी दो परिवारों को जोड़ने और संभालने वाली होती है। झा परिवार ने बेटी के स्वागत को सिर्फ पारिवारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा। बैंड-बाजे के साथ उसकी घर वापसी और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संदेश की आसपास के लोगों के बीच भी चर्चा रही।  

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