मधुबनी में SC/ST एक्ट मामले में दो अभियुक्त दोषी करार:2010 के मामले में स्पीडी ट्रायल से 18 माह का कारावास और ₹1000 लगा जुर्माना

मधुबनी में SC/ST एक्ट मामले में दो अभियुक्त दोषी करार:2010 के मामले में स्पीडी ट्रायल से 18 माह का कारावास और ₹1000 लगा जुर्माना

मधुबनी पुलिस ने 2010 के एक एससी/एसटी एक्ट मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। इस मामले में स्पीडी ट्रायल के जरिए फैसला आया। मधुबनी के वरीय पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 शनिवार को संध्या 4:00 यह आधिकारिक जानकारी दी। यह मामला मधुबनी नगर थाना कांड संख्या 340/10, दिनांक 4 नवंबर 2010 से जुड़ा है। एसएसपी ने बताया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 341, 504 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोप पत्र संख्या 218/11, 30 जून 2011 को कोर्ट में पेश किया गया था। आरोपियों में प्रधान डाकघर रोड, मधुबनी निवासी स्व. अनंत चौधरी के बेटे घनानंद चौधरी और घनानंद चौधरी के बेटे कृष्ण कुमार चौधरी शामिल थे। इनके साथ दो महिलाओं के नाम भी थे। पुलिस ने घनानंद चौधरी और कृष्ण कुमार चौधरी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। हालांकि, पुलिस ने यह साफ नहीं किया है कि दोनों महिला आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी या नहीं। कोर्ट ने इस मामले में 17 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1) के तहत दोषी पाए गए आरोपियों को 18 महीने की जेल और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें 15 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। मधुबनी पुलिस ने इस फैसले को स्पीडी ट्रायल का एक उदाहरण बताया। पुलिस के मुताबिक, तुरंत कार्रवाई, अच्छी जांच और प्रभावी पैरवी के कारण ही आरोपियों को दोषी ठहराया जा सका। झंझारपुर के विशेष लोक अभियोजन पदाधिकारी सपन कुमार सिंह ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की थी। पुलिस ने कहा कि न्याय के लिए तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करना मधुबनी पुलिस का लक्ष्य है। मधुबनी पुलिस ने 2010 के एक एससी/एसटी एक्ट मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। इस मामले में स्पीडी ट्रायल के जरिए फैसला आया। मधुबनी के वरीय पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 शनिवार को संध्या 4:00 यह आधिकारिक जानकारी दी। यह मामला मधुबनी नगर थाना कांड संख्या 340/10, दिनांक 4 नवंबर 2010 से जुड़ा है। एसएसपी ने बताया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 341, 504 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोप पत्र संख्या 218/11, 30 जून 2011 को कोर्ट में पेश किया गया था। आरोपियों में प्रधान डाकघर रोड, मधुबनी निवासी स्व. अनंत चौधरी के बेटे घनानंद चौधरी और घनानंद चौधरी के बेटे कृष्ण कुमार चौधरी शामिल थे। इनके साथ दो महिलाओं के नाम भी थे। पुलिस ने घनानंद चौधरी और कृष्ण कुमार चौधरी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। हालांकि, पुलिस ने यह साफ नहीं किया है कि दोनों महिला आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी या नहीं। कोर्ट ने इस मामले में 17 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1) के तहत दोषी पाए गए आरोपियों को 18 महीने की जेल और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें 15 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। मधुबनी पुलिस ने इस फैसले को स्पीडी ट्रायल का एक उदाहरण बताया। पुलिस के मुताबिक, तुरंत कार्रवाई, अच्छी जांच और प्रभावी पैरवी के कारण ही आरोपियों को दोषी ठहराया जा सका। झंझारपुर के विशेष लोक अभियोजन पदाधिकारी सपन कुमार सिंह ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की थी। पुलिस ने कहा कि न्याय के लिए तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करना मधुबनी पुलिस का लक्ष्य है।  

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