बीकानेर नगर निगम में मेयर पद के चुनाव के लिए शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। कांग्रेस का दावा है कि निर्दलीय प्रत्याशी बने नवरतन डागा अपना नामांकन वापस लेंगे, ऐसी स्थिति में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है। दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द डोटासरा से मुलाकात के बाद नवरतन डागा ने नाम वापसी पर सहमति दे दी है। कांग्रेस को पार्षद चुनाव में 42 सीट के साथ बहुमत मिला है लेकिन 27 सीट लेकर भी भाजपा जोड़-तोड़ करके सुरेंद्र सिंह शेखावत को मेयर बनाने की कोशिश में है। मेयर पद के लिए मतदान 21 सितम्बर को नगर निगम परिसर में होंगे। उसी दिन शाम को रिजल्ट घोषित होगा। 22 सितम्बर को डिप्टी मेयर के लिए चुनाव होगा। बीकानेर नगर निगम के हॉल में रिटर्निंग ऑफिसर व अतिरिक्त जिला कलेक्टर (शहर) के समक्ष मेयर पद के दावेदार अपना नामांकन वापस लेने का आवेदन कर सकते हैं। अब इस पद के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में है, जिसमें दो कांग्रेस और भाजपा से हैं। ऐसे में सिर्फ एक ही निर्दलीय उम्मीदवार है, जो अपना पर्चा वापस ले सकते हैं। पार्टियों के प्रत्याशी मैदान में रहेंगे। शहर अध्यक्ष को दी जिम्मेदारी कांग्रेस ने नवरतन डागा का पर्चा वापस उठवाने की जिम्मेदारी शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल को सौंपी है। दरअसल, डागा को टिकट देने के विवाद के बीच ही कांग्रेस अध्यक्ष मेघवाल के साथ मारपीट हुई थी। जिसे भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया। अब उन्हीं नवरतन डागा के बगावत से खुद मेघवाल की छवि पर असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं शहर कांग्रेस का कार्यालय जिस परिसर में संचालित हो रहा है, वो भी डागा का है। ऐसे में मेघवाल को ही उन्हें मनाने का जिम्मा दिया गया। इसके बाद डागा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा से मुलाकात की। डागा ने कांग्रेस के साथ रहने का आश्वासन दिया। पर्चा उठा तो कांग्रेस को लाभ अगर डागा अपना पर्चा वापस उठा लेते हैं तो इसका लाभ सीधे तौर पर कांग्रेस को होगा। न सिर्फ मनोबल बढ़ेगा, बल्कि कुछ निर्दलीय जो डागा के साथ है, वो भी कांग्रेस का सर्पोट कर सकते हैं। कांग्रेस का टारगेट 45 से अधिक वोट का है। भाजपा अपने पार्षदों को साध रही उधर, भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी 27 पार्षदों को साधने की कोशिश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि सुरेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाने का भी विरोध हो रहा है। कई सीनियर नेता भी इस निर्णय के बाद सक्रिय नहीं है। तीन पार्षदों ने अपनी नाराजगी वरिष्ठ नेताओं के समक्ष दर्ज करा दी है, जबकि कुछ और पार्षद इस निर्णय के खिलाफ है। हालांकि भाजपा मेयर और डिप्टी मेयर दोनों ही पदों पर अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने की स्थिति में नहीं है। कांग्रेस में डिप्टी मेयर की कवायद उधर, कांग्रेस में डिप्टी मेयर के लिए जावेद पड़िहार का नाम सबसे आगे चल रहा है। जावेद लगातार पार्षद जीत रहे हैं, अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं। ऐसे में उन्हें डिप्टी मेयर बनाकर पार्टी अपने वोट बैंक पर कब्जा रखना चाहती है।

