US F-35 sale Saudi: अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 एफ-35 लाइटनिंग-2 जेट्स बेचने का रास्ता साफ कर दिया है। इस सौदे की कीमत करीब 24.3 अरब डॉलर यानी भारतीय रुपये में लगभग दो लाख करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।
सऊदी दूतावास ने खुद इस खबर का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि यह दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम है। सऊदी दूतावास की तरफ से एक्स पर पोस्ट किया गया बयान साफ बताता है कि यह डील कितना अहम है।
डील को लेकर सऊदी-अमेरिका ने क्या कहा?
दूतावास ने लिखा कि दशकों से सऊदी-अमेरिकी सुरक्षा सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने, सामूहिक रक्षा क्षमता मजबूत करने और साझा सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने में मददगार रहा है।
उधर, इस डील को लेकर अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बिक्री को मंजूरी देते हुए सऊदी अरब को खाड़ी क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक तरक्की का बड़ा स्तंभ बताया है।
सऊदी अरब की सुरक्षा अमेरिका के लिए जरूरी
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि सऊदी अरब नाटो का सदस्य नहीं है फिर भी वह प्रमुख सहयोगी देश है। इसलिए उसकी सुरक्षा मजबूत करना अमेरिका के लिए भी जरूरी है।
यह सौदा सिर्फ विमानों की खरीद-फरोख्त नहीं है। एफ-35 को दुनिया का सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर माना जाता है। इसमें दुश्मन के राडार से बचकर हमला करने की खास क्षमता है। सऊदी अरब को ये विमान मिलने से उसकी वायु सेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी।
मक्का पर हमले की कोशिश के बाद फाइनल हुई डील
क्षेत्र में ईरान जैसे देशों के साथ तनाव को देखते हुए यह डील खाड़ी की सुरक्षा के लिए बड़ा मैसेज भी है। दो दिन पहले ईरान समर्थित हूतियों ने मक्का पर हमले की कोशिश की थी, इसके तुरंत बाद ही अमेरिका ने इस डील को मंजूरी दी है। यह तनाव के बीच बड़ा संकेत माना जा रहा है।
वहीं, ईरान ने भी पिछले कुछ महीनों में सऊदी अरब पर अटैक किए हैं। अब माना जा रहा है कि ईरान और हूतियों को मजबूती से जवाब देने के लिए सऊदी अरब अमेरिका से इतना महंगा लड़ाकू विमान खरीद रहा है।

