Childhood Obesity Symptoms: आजकल बच्चों का गोल-मटोल होना अक्सर उनके सेहतमंद होने की निशानी माना जाता है। जब कोई बच्चा थोड़ा भारी-भरकम दिखता है, तो लोग कहते हैं कि कितना प्यारा और हेल्दी बच्चा है। लेकिन हर बार गोल-मटोल दिखना सेहत की निशानी नहीं होता। अगर बच्चे का वजन उम्र और लंबाई के हिसाब से बहुत तेजी से बढ़ रहा है, तो यह चाइल्डहुड ओबेसिटी यानी बच्चों में मोटापे की समस्या हो सकती है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। यह सिर्फ दिखने या सुंदरता से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बुरी तरह प्रभावित करता है। आइए समझते हैं कि बच्चों में मोटापा क्यों बढ़ रहा है, इसके क्या-क्या खतरे हैं और माता-पिता इससे बचाव कैसे कर सकते हैं।
क्या है चाइल्डहुड ओबेसिटी?
जब किसी बच्चे का वजन उसकी उम्र और लंबाई के सामान्य मापदंडों से बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे मेडिकल भाषा में चाइल्डहुड ओबेसिटी कहा जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि बचपन का यह मोटापा अक्सर बड़े होने तक बना रहता है। जो बीमारियां पहले केवल उम्रदराज लोगों में देखने को मिलती थीं, वे अब बहुत कम उम्र के बच्चों में नजर आने लगी हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, बचपन का मोटापा निम्नलिखित आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है;
- 2 से 5 वर्ष की आयु के 12.7% बच्चे।
- 6 से 11 वर्ष की आयु के 20.7% बच्चे।
- 12 से 19 वर्ष की आयु के किशोरों में से 22.2%।
बच्चों में मोटापा बढ़ने के मुख्य कारण
- खान-पान की खराब आदतें।
- शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) की कमी।
- पारिवारिक और आनुवंशिक कारण।
- तनाव और नींद की कमी।
मोटापे से बच्चों को क्या-क्या स्वास्थ्य खतरे हैं?
बचपन का मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने तक सीमित नहीं रहता, यह शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है;
- टाइप 2 डायबिटीज।
- हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल।
- हड्डियों और जोड़ों में दर्द।
- सांस लेने में तकलीफ और स्लीप एपनिया।
- मानसिक तनाव और लो-कॉन्फिडेंस।
मोटापे से बचाव के आसान तरीके
- डाइट में लाएं बदलाव।
- स्क्रीन टाइम कम करें।
- खुद रोल मॉडल बनें।
- जबरदस्ती खाना न खिलाएं।

