हिमाचल हाईकोर्ट का हिमुडा सीईओ विवाद में बड़ा आदेश:सिंगल बेंच के फैसले पर रोक नहीं; सुरिंदर वशिष्ठ को अंतरिम राहत, अंजोरी कपूर CEO रहेंगी

हिमाचल हाईकोर्ट का हिमुडा सीईओ विवाद में बड़ा आदेश:सिंगल बेंच के फैसले पर रोक नहीं; सुरिंदर वशिष्ठ को अंतरिम राहत, अंजोरी कपूर CEO रहेंगी

हिमाचल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने हिमुडा में चीफ इंजीनियर और सीईओ के पदों को लेकर चल रहे विवाद में सिंगल बैंच के फैसले पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने अपीलकर्ता सुरिंदर कुमार वशिष्ठ के हितों की रक्षा के लिए अंतरिम राहत देते हुए उन्हें चीफ इंजीनियर हिमुडा के पद पर एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटर्जी) के रूप में काम जारी रखने की अनुमति दी है। चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की डिवीजन बेंच ने 16 सितंबर 2026 को सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की ओर से दायर एलपीए पर यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिट याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर चीफ इंजीनियर हिमुडा के पद पर सीईओ के रूप में कार्य करती रहेंगी। कोर्ट ने कहा कि अपील लंबित रहने के दौरान यही अंतरिम व्यवस्था न्याय के हित में रहेगी। सिंगल जज के फैसले पर पूरी रोक नहीं सुरिंदर वशिष्ठ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि एसई (अधीक्षण अभियंता) के पद को 1 फरवरी 2023 को चीफ इंजीनियर के पद पर अपग्रेड किया गया था। इसके बाद 2 फरवरी 2023 को डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) की बैठक कर सुरिंदर कुमार को चीफ इंजीनियर के पद पर पदोन्नत किया गया। बाद में 3 मई 2025 को चीफ इंजीनियर हिमुडा के पद को एडवाइजर के रूप में पुनर्नामित किया गया। 27 मई 2025 को स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सुरिंदर कुमार को हिमुडा का सीईओ नियुक्त किया गया, जबकि अंजोरी कपूर को एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटर्जी) नियुक्त किया गया था। सिंगल जज ने 27 मई 2025 की नियुक्तियों से संबंधित अधिसूचना को रद्द कर दिया था और हिमुडा के सीईओ कम सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति को वर्ष 2012 के संबंधित सेवा नियमों के अनुसार करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए पात्र अधिकारियों के मामलों पर विचार कर दो सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। सुरिंदर कुमार की ओर से क्या दलील दी गई अपीलकर्ता सुरिंदर कुमार की ओर से कहा गया कि पद के अपग्रेडेशन के आदेश में यह भी प्रावधान था कि पद बाद में फिर एसई के पद पर वापस आ जाएगा। ऐसे में तीन साल से अधिक समय बाद पदोन्नति प्रभावित होने से सुरिंदर कुमार को नुकसान होगा। इसी आधार पर अंतरिम राहत की मांग की गई। उनकी ओर से यह भी दलील दी गई कि रिट याचिका 4 अक्टूबर 2024 को काफी देरी के बाद दाखिल की गई थी।
अंजोरी कपूर की ओर से विरोध अंजोरी कपूर की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उन्हें 1 सितंबर 2014 को एसई के पद पर पदोन्नति मिली थी, जबकि सुरिंदर कुमार को इस पद पर बाद में 20 मार्च 2017 को पदोन्नत किया गया। सुरिंदर कुमार को बाद में 9 दिसंबर 2022 को चीफ इंजीनियर के पद पर पदोन्नति मिली। इसके बाद 1 फरवरी 2023 को एसई के पद को अपग्रेड किया गया और अगले ही दिन 2 फरवरी 2023 को DPC की बैठक कर सुरिंदर कुमार को पदोन्नति दी गई। अंजोरी कपूर की ओर से सिंगल जज के फैसले में दर्ज निष्कर्षों का भी हवाला दिया गया। सिंगल जज ने पद के अपग्रेडेशन को सुरिंदर कुमार से जुड़ा व्यक्तिगत लाभ बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणियां की थीं। डिवीजन बेंच ने क्या कहा डिवीजन बेंच ने कहा कि सिंगल जज के फैसले पर पूरी तरह रोक लगाने का कोई आधार नहीं है और मामले पर विस्तृत विचार की आवश्यकता है। कोर्ट ने अपील को एडमिट कर लिया। हालांकि, सुरिंदर कुमार की ओर से रखी गई दलीलों को देखते हुए कोर्ट ने सीमित अंतरिम राहत दी। इसके तहत उन्हें चीफ इंजीनियर के पद पर एडवाइजर के रूप में काम जारी रखने की अनुमति दी गई।

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