भिवानी के विद्या नगर निवासी अंशुल कटारिया ने उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित नॉर्थ जोन नेशनल 2026 प्रतियोगिता में ट्रिपल जंप में सिल्वर मेडल जीता है। अंशुल ने 10.95 मीटर की छलांग लगाई। प्रतियोगिता में पदक जीतने के बाद बुधवार को भिवानी पहुंचने पर परिजनों और परिचितों ने उनका स्वागत किया। अंशुल का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना और पदक जीतना है। अंशुल ने बताया कि पिछले महीने स्टेट लेवल चैंपियनशिप आयोजित हुई थी। इसमें उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन नॉर्थ जोन नेशनल चैंपियनशिप के लिए हुआ। देहरादून में उन्होंने ट्रिपल जंप में 10.95 मीटर का प्रदर्शन कर सिल्वर मेडल हासिल किया। अंशुल ने बताया कि वह पिछले 7-8 साल से एथलेटिक्स का अभ्यास कर रही हैं। वर्तमान में रोजाना करीब दो से ढाई घंटे प्रैक्टिस करती हैं। उनका लक्ष्य आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर भारत के लिए मेडल जीतना है। पहले हर्डल रेस में की थी शुरुआत अंशुल के पिता विनोद कुमार खुद 400 मीटर हर्डल रेस के नेशनल खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 7-8 साल पहले जब वह अभ्यास के लिए स्टेडियम जाते थे, तब अंशुल भी उनके साथ जाने लगी थी। शुरुआत में अंशुल ने हर्डल रेस में हिस्सा लिया। वहीं अभ्यास के दौरान ट्रिपल जंप में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके बाद उसने इसी इवेंट पर ध्यान देना शुरू किया। स्कूली खेल प्रतियोगिता में अंशुल ने 100 मीटर हर्डल रेस में गोल्ड मेडल भी जीता था। पिता से मिली खेल की प्रेरणा अंशुल ने बताया कि उनके पिता ने खेल को लेकर उन्हें प्रेरित किया। वह बचपन से पिता के साथ स्टेडियम जाती थीं और वहीं अभ्यास शुरू किया। बाद में ट्रिपल जंप में बेहतर प्रदर्शन के कारण उन्होंने अपना इवेंट बदल लिया। अंशुल फिलहाल चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (CBLU) से BPES यानी बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स के तृतीय वर्ष में पढ़ाई कर रही हैं। पिता आर्थिक स्थिति के कारण आगे नहीं बढ़ सके विनोद कुमार ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं और अंशुल सबसे बड़ी बेटी है। उन्होंने खुद राष्ट्रीय स्तर पर 400 मीटर हर्डल रेस में हिस्सा लिया था, लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण खेल में आगे नहीं बढ़ सके। वर्तमान में वह सिंचाई विभाग में कार्यरत हैं और बच्चों को खेल में आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 30-35 बच्चों को निशुल्क अभ्यास भी करवाते हैं और अपने खर्च पर उन्हें प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए बाहर लेकर जाते हैं। परिवार ने जताई खुशी अंशुल की मां सुमन ने कहा कि बेटी के सिल्वर मेडल जीतने से परिवार में खुशी है। वहीं अंशुल के चाचा धीरज कौशिक ने बताया कि वह बचपन से ही अंशुल को अभ्यास करते देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार अंशुल नियमित रूप से मेहनत करती है और इससे पहले स्कूली खेल तथा स्टेट लेवल प्रतियोगिताओं में भी मेडल जीत चुकी है।

