मुजफ्फरपुर के अहियापुर स्थित झपहां में जमीन पर जबरन कब्जा करने के मामले में एक आरोपी अभिषेक कुमार उर्फ नकुल को कोर्ट ने पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया है। पुलिस उसे विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश किया था, लेकिन पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई। पुलिस ने मंगलवार को बैरिया के अयाचीग्राम निवासी अभिषेक को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को सबूत के तौर पर पेश किया। पुलिस का दावा था कि भीड़ में खड़ा एक युवक अभिषेक है, लेकिन फुटेज में चेहरा साफ नहीं था। कोई और पुख्ता सबूत न होने के कारण कोर्ट ने उसे पीआर बॉन्ड पर छोड़ने का आदेश दिया। पांच अन्य आरोपियों को भी मिली जमानत जमीन कब्जा करने की कोशिश के अन्य मामलों में नामजद आरोपी अवनीश कुमार, अमित सिंह नरंगी, ठाकुर दिगंबर आजाद, निखिल राज और तुषार सिंह को भी जमानत मिल गई है। इनमें से सिर्फ तुषार जेल में बंद था, बाकी आरोपियों ने अग्रिम जमानत अर्जी लगाई थी। मोतीपुर के नरयार निवासी सुमित श्रीवास्तव की जमानत अर्जी एडीजे-8 की अदालत में भेज दी गई है, जिस पर 18 सितंबर को सुनवाई होगी। अब तक इस मामले में कुल 7 आरोपियों को कोर्ट ने जमानत दे दी है। वहीं, विधायक और उनके भाई पर 20 सितंबर तक पुलिस कार्रवाई पर रोक लगी है। 28 मामलों में 10 में विधायक और उनके भाई नामजद मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां-उदनडीह समेत जमीन से जुड़े विभिन्न विवादों में पुलिस ने अब तक कुल 28 अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की हैं। इनमें से 10 मामलों में बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू और उनके भाई अभिनव कुमार उर्फ सोनू सिंह नामजद आरोपी हैं। पुलिस की जांच पर उठ रहा सवाल दरअसल, औराई के बेदौल असली निवासी समोज कुमार ने 21 अगस्त को FIR दर्ज कराई थी। उन्होंने बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई सोनू सिंह और अन्य के खिलाफ आरोप लगाया था। आरोप था कि आरोपियों ने हथियार के बल पर जेसीबी से बाउंड्री तोड़ दी थी। हालांकि, घटना के समय विधायक और उनके भाई मौके पर मौजूद नहीं थे। जिस तरह से पुलिस की ओर से मामले की गंभीरता को बताते हुए कार्रवाई शुरू की गई और एक के बाद एक 28 कांड दर्ज किए गए, लेकिन अब आरोपियों को जमानत मिलने लगी है। पुलिस के कार्यशैली पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मुजफ्फरपुर के अहियापुर स्थित झपहां में जमीन पर जबरन कब्जा करने के मामले में एक आरोपी अभिषेक कुमार उर्फ नकुल को कोर्ट ने पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया है। पुलिस उसे विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश किया था, लेकिन पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई। पुलिस ने मंगलवार को बैरिया के अयाचीग्राम निवासी अभिषेक को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को सबूत के तौर पर पेश किया। पुलिस का दावा था कि भीड़ में खड़ा एक युवक अभिषेक है, लेकिन फुटेज में चेहरा साफ नहीं था। कोई और पुख्ता सबूत न होने के कारण कोर्ट ने उसे पीआर बॉन्ड पर छोड़ने का आदेश दिया। पांच अन्य आरोपियों को भी मिली जमानत जमीन कब्जा करने की कोशिश के अन्य मामलों में नामजद आरोपी अवनीश कुमार, अमित सिंह नरंगी, ठाकुर दिगंबर आजाद, निखिल राज और तुषार सिंह को भी जमानत मिल गई है। इनमें से सिर्फ तुषार जेल में बंद था, बाकी आरोपियों ने अग्रिम जमानत अर्जी लगाई थी। मोतीपुर के नरयार निवासी सुमित श्रीवास्तव की जमानत अर्जी एडीजे-8 की अदालत में भेज दी गई है, जिस पर 18 सितंबर को सुनवाई होगी। अब तक इस मामले में कुल 7 आरोपियों को कोर्ट ने जमानत दे दी है। वहीं, विधायक और उनके भाई पर 20 सितंबर तक पुलिस कार्रवाई पर रोक लगी है। 28 मामलों में 10 में विधायक और उनके भाई नामजद मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां-उदनडीह समेत जमीन से जुड़े विभिन्न विवादों में पुलिस ने अब तक कुल 28 अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की हैं। इनमें से 10 मामलों में बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू और उनके भाई अभिनव कुमार उर्फ सोनू सिंह नामजद आरोपी हैं। पुलिस की जांच पर उठ रहा सवाल दरअसल, औराई के बेदौल असली निवासी समोज कुमार ने 21 अगस्त को FIR दर्ज कराई थी। उन्होंने बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई सोनू सिंह और अन्य के खिलाफ आरोप लगाया था। आरोप था कि आरोपियों ने हथियार के बल पर जेसीबी से बाउंड्री तोड़ दी थी। हालांकि, घटना के समय विधायक और उनके भाई मौके पर मौजूद नहीं थे। जिस तरह से पुलिस की ओर से मामले की गंभीरता को बताते हुए कार्रवाई शुरू की गई और एक के बाद एक 28 कांड दर्ज किए गए, लेकिन अब आरोपियों को जमानत मिलने लगी है। पुलिस के कार्यशैली पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

