10 सालों के बाद श्रीलंका क्रिकेट का हुआ रिवाइवल, फिर सनत जयसूर्या ने आकर पूरी तरह बदल दी तस्वीर

10 सालों के बाद श्रीलंका क्रिकेट का हुआ रिवाइवल, फिर सनत जयसूर्या ने आकर पूरी तरह बदल दी तस्वीर

Sri Lanka Cricket Team: एक दौर था, जब किसी भी टीम के लिए श्रीलंका को हराना आसान नहीं था। 1996 में वनडे वर्ल्डकप का खिताब जीतने वाली श्रीलंकाई टीम एशिया की सबसे मजबूत टीम बनने के लिए लगातार टीम इंडिया को टक्कर देती रही। 2011 वनडे वर्ल्डकप में दोनों टीमें आमने सामने हुईं और भारतीय टीम ने खिताबी जीत के साथ खुद को एशिया का नंबर वन टीम स्थापित कर दिया। इसके बाद श्रीलंका लगातार खुद को बेस्ट एशिया की टीम साबित करने के लिए चुनौती देती रही और 2024 के टी20 वर्ल्डकप में उसे मौका मिला। टीम इंडिया को हराकर श्रीलंकाई टीम चैंपियन बन गई। उसके बाद श्रीलंका क्रिकेट को अचानक कई बेहतरीन खिलाड़ियों ने छोड़ दिया, जिससे टीम अब तक किसी भी आईसीसी इवेंट के नॉकआउट में नहीं पहुंच पाई है।

2014 के बाद गिरता गया स्तर

श्रीलंका ने 2014 में जिस चुनी हुई टीम की बदौलत वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था, उसमें शामिल कई बड़े नामों के संन्यास के बाद टीम को लगातार बदलाव के दौर से गुजरना पड़ा। युवा खिलाड़ियों को टीम में जगह दी गई, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने में समय लगा। इसका असर श्रीलंका के प्रदर्शन पर भी दिखाई दिया।

2024 में जयसूर्या की हुई एंट्री

इसी बीच 2024 T20 वर्ल्ड कप में टीम के खराब प्रदर्शन के बाद सनत जयसूर्या को मुख्य कोच बनाया गया। उसके बाद से माना जाता है कि श्रीलंका क्रिकेट का रिवाइवल शुरू हो गया। उनकी कोचिंग में श्रीलंका ने 27 साल के बाद भारत के खिलाफ कोई वनडे सीरीज जीती। यही नहीं, विदेश में उसने टेस्ट में भी सफलता हासिल की और इंग्लैंड को उसके घर में 10 साल के बाद हराया। इसके अलावा न्यूजीलैंड में भी श्रीलंका ने जीत हासिल की।

2014 के बाद श्रीलंका की टीम को T20 के किसी भी इवेंट में फिर से चैलेंजर माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे टीम में बदलाव दिखाई देने लगा और उसे अब कंपटीटर माना जाने लगा। टीम के प्रदर्शन में सुधार के साथ खिलाड़ियों के आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई। श्रीलंका ने वेस्टइंडीज जैसी दो बार की वर्ल्ड चैंपियन टीम को भी हराया।

हालांकि, 2026 T20 वर्ल्ड कप में पहले राउंड से बाहर होने के बाद एक बार फिर सनत जयसूर्या ने टीम का साथ छोड़ दिया। हालांकि, उनकी मेहनत और उन्होंने जो टीम के लिए किया, उसका असर आज भी दिखाई दे रहा है। उनकी कोचिंग के दौरान टीम में कई ऐसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया, जिन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई और श्रीलंका के भविष्य को लेकर उम्मीद जगाई।

युवाओं ने बदली तस्वीर

श्रीलंका क्रिकेट के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि टीम ने सिर्फ अनुभवी खिलाड़ियों पर निर्भर रहने के बजाय युवा प्रतिभाओं को भी लगातार मौके देने शुरू किए। इससे टीम में एक ऐसा संतुलन तैयार हुआ, जिसमें अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा खिलाड़ी भी अपनी भूमिका निभाने लगे। यही कारण है कि श्रीलंका की टीम अब पहले के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी नजर आती है।

2014 के बाद लंबे समय तक श्रीलंका को एक ऐसी टीम के तौर पर देखा गया, जो अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने के लिए संघर्ष कर रही थी। लेकिन पिछले कुछ समय में टीम ने कई मजबूत विरोधियों के खिलाफ जीत हासिल करके यह दिखाया है कि उसके पास फिर से शीर्ष टीमों को चुनौती देने की क्षमता है। भारत के खिलाफ वनडे सीरीज जीतना, इंग्लैंड में टेस्ट जीत हासिल करना और न्यूजीलैंड में सफलता हासिल करना इसी बदलाव का हिस्सा रहा है।

अब श्रीलंका की नजर इस प्रदर्शन को आगे बढ़ाने पर होगी। टीम के पास ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित कर रहे हैं। अगर यह युवा प्रतिभाएं लगातार अच्छा प्रदर्शन करती हैं और अनुभवी खिलाड़ियों से उन्हें सही मार्गदर्शन मिलता है, तो श्रीलंका आने वाले समय में एक बार फिर बड़े ICC टूर्नामेंट में मजबूत चुनौती पेश कर सकता है।

2014 की वर्ल्ड चैंपियन टीम से लेकर 2026 तक श्रीलंका क्रिकेट ने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय जहां टीम लगातार बड़े टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण से बाहर होती रही, वहीं अब उसके प्रदर्शन में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। सनत जयसूर्या का दौर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उनके समय में शुरू हुए बदलाव का असर टीम में दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि श्रीलंका क्रिकेट इस रिवाइवल को कितनी दूर तक लेकर जाता है।

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