जमुई इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रों को सॉलिडवर्क्स-ऑटोकैड की ट्रेनिंग:15 दिन चलीं 2 तकनीकी कार्यशालाएं; 3डी मॉडलिंग, डिजाइन-ड्राफ्टिंग और सिमुलेशन की प्रैक्टिस

जमुई इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रों को सॉलिडवर्क्स-ऑटोकैड की ट्रेनिंग:15 दिन चलीं 2 तकनीकी कार्यशालाएं; 3डी मॉडलिंग, डिजाइन-ड्राफ्टिंग और सिमुलेशन की प्रैक्टिस

जमुई के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय (जीईसी) में विद्यार्थियों को उद्योग की आधुनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार करने के लिए 1 से 15 सितंबर तक दो तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशालाएं हुईं। इनमें छात्रों को आधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए डिजाइन, मॉडलिंग, ड्राफ्टिंग और सिमुलेशन का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया। यांत्रिक अभियंत्रण विभाग की देखरेख में ‘थ्री-डी कैड मॉडलिंग, प्रोडक्ट डिजाइन एवं सिमुलेशन यूजिंग सॉलिडवर्क्स’ विषय पर प्रशिक्षण हुआ। वहीं, यांत्रिक और सिविल अभियंत्रण विभाग ने मिलकर ‘ऑटोकैड एवं आर्किटेक्चरल ड्राफ्टिंग’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की। डिजाइन और तकनीकी ड्राइंग का अभ्यास कराया प्रशिक्षण के दौरान छात्रों ने अलग-अलग इंजीनियरिंग कामों से जुड़ी तकनीकों का अभ्यास किया। विशेषज्ञों ने उन्हें डिजाइन बनाने, थ्री-डी मॉडलिंग, तकनीकी ड्राइंग और सिमुलेशन की बारीक जानकारी दी। प्राचार्य बोले- सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भूपाल कुमार ने कहा कि आज के औद्योगिक माहौल में सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं है। विद्यार्थियों के लिए प्रैक्टिकल हुनर और आधुनिक तकनीकी सॉफ्टवेयर की जानकारी भी जरूरी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम रोजगार के मौके बढ़ाने के साथ छात्रों के पेशेवर हुनर को मजबूत करते हैं। कार्यशाला के संयोजक अभिषेक कुमार शर्मा ने बताया कि छात्रों ने प्रशिक्षण में पूरे उत्साह से हिस्सा लिया और अलग-अलग इंजीनियरिंग कामों का प्रैक्टिकल अभ्यास किया। यांत्रिक अभियंत्रण विभागाध्यक्ष डॉ. रामनिवास कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में डिजाइन, नयापन और रिसर्च के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद करते हैं। प्रशिक्षण पूरा होने पर छात्रों को प्रमाण-पत्र दिए कार्यक्रम को सफल बनाने में राजाराम भगत, अविनाश कुमार, चंद्रशेखर कुमार, दीप राज, सुजीत कुमार और प्रीति कुमारी की खास भूमिका रही। बुलाए गए सॉलिडवर्क्स विशेषज्ञों ने छात्रों को तकनीकी गाइडेंस दिया। अंत में प्रशिक्षण में शामिल सभी छात्रों को प्रमाण-पत्र बांटे गए। जमुई के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय (जीईसी) में विद्यार्थियों को उद्योग की आधुनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार करने के लिए 1 से 15 सितंबर तक दो तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशालाएं हुईं। इनमें छात्रों को आधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए डिजाइन, मॉडलिंग, ड्राफ्टिंग और सिमुलेशन का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया। यांत्रिक अभियंत्रण विभाग की देखरेख में ‘थ्री-डी कैड मॉडलिंग, प्रोडक्ट डिजाइन एवं सिमुलेशन यूजिंग सॉलिडवर्क्स’ विषय पर प्रशिक्षण हुआ। वहीं, यांत्रिक और सिविल अभियंत्रण विभाग ने मिलकर ‘ऑटोकैड एवं आर्किटेक्चरल ड्राफ्टिंग’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की। डिजाइन और तकनीकी ड्राइंग का अभ्यास कराया प्रशिक्षण के दौरान छात्रों ने अलग-अलग इंजीनियरिंग कामों से जुड़ी तकनीकों का अभ्यास किया। विशेषज्ञों ने उन्हें डिजाइन बनाने, थ्री-डी मॉडलिंग, तकनीकी ड्राइंग और सिमुलेशन की बारीक जानकारी दी। प्राचार्य बोले- सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भूपाल कुमार ने कहा कि आज के औद्योगिक माहौल में सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं है। विद्यार्थियों के लिए प्रैक्टिकल हुनर और आधुनिक तकनीकी सॉफ्टवेयर की जानकारी भी जरूरी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम रोजगार के मौके बढ़ाने के साथ छात्रों के पेशेवर हुनर को मजबूत करते हैं। कार्यशाला के संयोजक अभिषेक कुमार शर्मा ने बताया कि छात्रों ने प्रशिक्षण में पूरे उत्साह से हिस्सा लिया और अलग-अलग इंजीनियरिंग कामों का प्रैक्टिकल अभ्यास किया। यांत्रिक अभियंत्रण विभागाध्यक्ष डॉ. रामनिवास कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में डिजाइन, नयापन और रिसर्च के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद करते हैं। प्रशिक्षण पूरा होने पर छात्रों को प्रमाण-पत्र दिए कार्यक्रम को सफल बनाने में राजाराम भगत, अविनाश कुमार, चंद्रशेखर कुमार, दीप राज, सुजीत कुमार और प्रीति कुमारी की खास भूमिका रही। बुलाए गए सॉलिडवर्क्स विशेषज्ञों ने छात्रों को तकनीकी गाइडेंस दिया। अंत में प्रशिक्षण में शामिल सभी छात्रों को प्रमाण-पत्र बांटे गए।  

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