किशनगंज में अवैध हथियार रखने के मामले में सोमवार को अदालत ने आरोपी नूर इस्लाम उर्फ मुक्का को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर उसे तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। फैसला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मुक्तेश मनोहर की अदालत ने सुनाया। जिला अभियोजन पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने बताया कि साल 2020 में सदर थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बंगाल सीमा के पास एक व्यक्ति अवैध हथियार लेकर घूम रहा है। सूचना के बाद पुलिस टीम ने पासवान चौक के पास घेराबंदी की। इसी दौरान संदिग्ध हालत में घूम रहे नूर इस्लाम उर्फ मुक्का को पकड़ लिया गया। तलाशी में कट्टा और चार जिंदा कारतूस मिले
पुलिस की तलाशी में उसके पास से एक देशी कट्टा और चार जिंदा कारतूस मिले थे। इसके बाद सदर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई और आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। मामले की सुनवाई पिछले कई सालों से अदालत में चल रही थी। पश्चिम बंगाल का रहने वाला है आरोपी
सजा पाने वाला नूर इस्लाम उर्फ मुक्का पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के रामपुर रूहिया गांव का रहने वाला है। अदालत ने उसे जीआर संख्या 570/20 और किशनगंज सदर थाना कांड संख्या 150/20 से जुड़े मामले में आर्म्स एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी ठहराया। गवाहों और सबूतों के आधार पर दोषी करार
सुनवाई के दौरान जिला अभियोजन पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने अभियोजन पक्ष की ओर से सबूत और गवाहों के बयान पेश किए और आरोपी को कठोर सजा देने की मांग की। अदालत ने सबूतों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। अवैध हथियार रखना गंभीर अपराध बताया
अदालत ने फैसले में कहा कि अवैध हथियार रखना गंभीर अपराध है। इससे समाज में डर और असुरक्षा का माहौल बनता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आरोपी को पांच साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। किशनगंज में अवैध हथियार रखने के मामले में सोमवार को अदालत ने आरोपी नूर इस्लाम उर्फ मुक्का को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर उसे तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। फैसला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मुक्तेश मनोहर की अदालत ने सुनाया। जिला अभियोजन पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने बताया कि साल 2020 में सदर थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बंगाल सीमा के पास एक व्यक्ति अवैध हथियार लेकर घूम रहा है। सूचना के बाद पुलिस टीम ने पासवान चौक के पास घेराबंदी की। इसी दौरान संदिग्ध हालत में घूम रहे नूर इस्लाम उर्फ मुक्का को पकड़ लिया गया। तलाशी में कट्टा और चार जिंदा कारतूस मिले
पुलिस की तलाशी में उसके पास से एक देशी कट्टा और चार जिंदा कारतूस मिले थे। इसके बाद सदर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई और आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। मामले की सुनवाई पिछले कई सालों से अदालत में चल रही थी। पश्चिम बंगाल का रहने वाला है आरोपी
सजा पाने वाला नूर इस्लाम उर्फ मुक्का पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के रामपुर रूहिया गांव का रहने वाला है। अदालत ने उसे जीआर संख्या 570/20 और किशनगंज सदर थाना कांड संख्या 150/20 से जुड़े मामले में आर्म्स एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी ठहराया। गवाहों और सबूतों के आधार पर दोषी करार
सुनवाई के दौरान जिला अभियोजन पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने अभियोजन पक्ष की ओर से सबूत और गवाहों के बयान पेश किए और आरोपी को कठोर सजा देने की मांग की। अदालत ने सबूतों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। अवैध हथियार रखना गंभीर अपराध बताया
अदालत ने फैसले में कहा कि अवैध हथियार रखना गंभीर अपराध है। इससे समाज में डर और असुरक्षा का माहौल बनता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आरोपी को पांच साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

