बाराबंकी में राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार शाम एक भावुक पल देखने को मिला। करीब एक साल से चल रहे पारिवारिक मुकदमे का आपसी सहमति से निपटारा होने के बाद 80 वर्षीय मेवा लाल और 75 वर्षीय उनकी पत्नी फूलमती ने एक-दूसरे को दोबारा जयमाला पहनाई। दोनों ने पुरानी नाराजगी खत्म कर फिर साथ रहने का फैसला किया। यह दृश्य देखकर अदालत परिसर में मौजूद लोग भी भावुक हो गए। छोटी-छोटी बातों पर बढ़ा था विवाद मामला मसौली थाना क्षेत्र के भुहेरा कला गांव का है। मेवा लाल और फूलमती के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगा था। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत तक बंद हो गई। करीब एक साल पहले विवाद अदालत पहुंचा और इसके बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे। मेवा लाल ने बताया कि दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। कभी वह पत्नी का ध्यान नहीं रख पाए तो कभी पत्नी भी उनका ध्यान नहीं रख सकीं। इसी विवाद के बाद फूलमती ने उनके खिलाफ मुकदमा दायर कर गुजारा भत्ता मांगा था। मेवा लाल के मुताबिक उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। विवाद के दौरान उन्होंने पत्नी के नाम जमीन भी लिख दी थी। चार बिस्वा जमीन पर हुआ समझौता फूलमती ने बताया कि पहले जमीन बहू के नाम लिखी गई थी। अब समझौते के तहत उनके नाम चार बिस्वा जमीन लिखी गई है। उन्होंने बताया कि करीब एक साल तक पति-पत्नी के बीच बातचीत नहीं हुई, लेकिन लोक अदालत में समझौते के बाद उनका विवाद खत्म हो गया। समझौते के बाद फिर पहनाई जयमाला शनिवार शाम करीब 4 बजे समझौते की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों ने अदालत परिसर में एक-दूसरे को जयमाला पहनाई। उम्र के इस पड़ाव पर एक साल की दूरी के बाद दोबारा साथ रहने का फैसला वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला रहा। आपसी सहमति से विवाद खत्म करना लोक अदालत का उद्देश्य जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उज्ज्वल उपाध्याय ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य आपसी सहमति और सुलह-समझौते के जरिए मामलों का निपटारा कराना है। इस मामले में दोनों पक्षों की सहमति से पारिवारिक विवाद का खत्म होना खास रहा। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कई अन्य मामलों का भी आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।

