जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (DLSA) पठानकोट की ओर से चेयरमैन-कम-जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग की अध्यक्षता में शनिवार को कोर्ट परिसर पठानकोट में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान आपसी सहमति से मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया। मामलों की सुनवाई और त्वरित निपटारे के लिए 8 विशेष बेंचों का गठन किया गया था। इनमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एकता उप्पल, प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट जसबीर कौर, न्यायाधीश, जूनियर डिविजन बबीता, न्यायाधीश, जूनियर डिविजन नाज़मीन सिंह, न्यायाधीश, जूनियर डिविजन रवनीत कौर बेदी, न्यायाधीश, जूनियर डिविजन अरविंद सिंह, न्यायाधीश, जूनियर डिविजन सतनाम सिंह और चेयरमैन, स्थायी लोक अदालत राकेश शर्मा ने मामलों की सुनवाई की। 11,377 केस सुलझे, ₹8.30 करोड़ के अवार्ड पारित लोक अदालत के संबंध में जानकारी देते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग ने बताया कि इस नेशनल लोक अदालत में कुल 11,884 मामले पेश किए गए। इनमें से 11,377 मामलों का दोनों पक्षों की आपसी सहमति से शांतिपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया। इस अवसर पर कुल 8,30,40,505 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। वर्षों पुराना ₹1.16 करोड़ का सिविल मामला सुलझा विशेष रूप से, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एकता उप्पल की अदालत में जगसन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड बनाम मुख्य इंजीनियर पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) व अन्य से संबंधित एक लंबे समय से लंबित निष्पादन मामले का सफलतापूर्वक निपटारा कराया गया। यह मामला 28 मई 2012 को शुरू हुई मध्यस्थता कार्यवाही और 25 नवंबर 2014 को पारित अवार्ड से जुड़ा था, जिसकी निष्पादन प्रक्रिया 3 जुलाई 2018 से लंबित थी। लोक अदालत से पहले तैयार किए गए विशेष एक्शन प्लान और दोनों पक्षों के बीच लगातार प्रयासों के बाद 1,16,44,320 रुपये की राशि से जुड़ा यह पुराना विवाद आपसी सहमति से सुलझ गया और याचिका वापस ले ली गई। लोक अदालत में किसी की हार नहीं, दोनों पक्षों की होती है जीत जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग ने कहा कि लोक अदालत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें किसी भी पक्ष की हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष जीतकर लौटते हैं। इसके अलावा मामलों के निपटारे पर कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोक अदालत में दिया गया फैसला अंतिम फैसला होता है और इसके खिलाफ किसी भी ऊपरी अदालत में अपील नहीं की जा सकती। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे अपने लंबित विवादों को निपटाने के लिए लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

