गोरखपुर में स्थापित होने जा रही 13 फीट की गणेश प्रतिमा इन दिनों पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह से चमचमाते शीशों से तैयार किया जा रहा है। इस अनोखी मूर्ति को बनाने में लगभग 100 स्क्वायर फीट ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। कलाकारों ने बहुत ही बारीकी से काम करते हुए शीशे के तकरीबन 1000 टुकड़ों को जोड़कर भगवान गणेश का यह खूबसूरत रूप तैयार किया है। कारीगरों की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल शीशों को अपनी जगह पर तराशकर चिपकाने में ही 15 दिन से ज्यादा का वक्त लग गया। फेविकोल और मैदा के आटे से शीशा चिपकाते
पश्चिम बंगाल के वर्धमान से आए कलाकार अमल कुमार रॉय ने बताया कि हम लोग सिर्फ मूर्ति को शीशे से सजाने के लिए यहां आए हैं। पिछले 15 दिनों से शीशे चिपकाने का काम लगातार कर रहे हैं। इसके लिए शीशे को एक आकार के छोटे- छोटे टुकड़ें में काट लिया जाता है। फिर पारंपरिक तरीके से फेविकोल और मैदा के आटे से चिपकाया जाता है। इससे पकड़ मजबूत रहती है। शीशा निकलने का डर भी नहीं रहता है। इस अनोखे कॉम्बिनेशन ने हर किसी को हैरान कर दिया है। 90 प्रतिशत तक काम पूरा
मूर्ति का काम अभी 90 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, लेकिन इसकी भव्यता अभी से देखने लायक है। गोरखनाथ मंदिर परिसर में यह मूर्ति बन रही है, वहां अभी से लोगों की भीड़ जुटने लगी है। स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से भी लोग सिर्फ इस 13 फीट की शीशे वाली गणेश प्रतिमा की एक झलक पाने पहुंच रहे हैं। किराना मंडी में स्थापित
कलाकार ने बताया कि साहबगंज किराना मंडी में जब यह प्रतिमा पूरी तरह सज-धजकर पांडाल में विराजेगी, तो यह यकीनन इस साल के गणेशोत्सव का सबसे बड़ा अट्रैक्शन साबित होगी। बंगाल में भी इस तरह की मूर्ति बनाई गई है, जिसे फर्स्ट पोजीशन मिला है।

