झांसी में साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले शातिर ठग प्रशांत राय (25) को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक मोबाइल और दो खातों की पासबुक बरामद हुई है। इन दोनों खातों में देश भर के 11 स्थानों से साइबर ठगी के 7.80 लाख रुपए की रकम मंगवाई गई थी। उसके मोबाइल के जरिए चल रहे साइबर ठगी का नेटवर्क भी उजागर हो गया। मोबाइल में मिली व्हाट्स एप चैट में बैंक खाते और पैसों के लेनदेन से जुड़े मैसेज मिले हैं। गैंग में शामिल उसके 7 साथियों के नाम भी उजागर हुए हैं। पुलिस सभी की तलाश में जुटी हुई है। प्रशांत राय पुत्र श्याम सुंदर राय कोतवाली थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुरा मोहल्ले का रहने वाला है। पुलिस को 7 आरोपियों के नाम पता चले साइबर फ्रॉड एवं गेमिंग पैनल की जांच के दौरान पुलिस को प्रशांत राय का पता चला। वह म्यूल खाते खुलवाने वाले गिरोह में शामिल था। सुरागकशी करके पर उसे फिल्टर रोड क्रॉसिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। मोबाइल फोन समेत उप्र ग्रामीण बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की पासबुक बरामद हुई। सीओ सिटी रामवीर सिंह ने बताया छानबीन करने पर उसके फोन की व्हाट्स एप चैट से नगरा निवासी साहिल राय, तालपुरा निवासी गिन्नी ठाकुर, प्रिंस राय, छनियापुरा निवासी हनी राय, उदय लैयकर, अमन अख्तर एवं पंचकुइयां निवासी प्रतीक उर्फ प्रियांशु का नाम सामने आया। उनके बीच बैंक खातों में रकम के लेनदेन की बातचीत भी रिकॉर्ड मिले। प्रशांत ने पूछताछ के दौरान बताया कि हनी राय बैंक खातों में ठगी की रकम मंगवाता था। इसके बाद रकम दूसरे खातों के रास्ते एटीएम से बाहर निकाली जाती थी। पुलिस इन सातों आरोपियों को तलाशने में जुटी है। म्यूल खातों में खपाते हैं ठगी की रकम साइबर जालसाज सीधे अपने खातों में ठगी की रकम नहीं मंगवाते। दूसरे लोगों के बैंक खाते कमीशन या अन्य लालच देकर खुलवाकर उन्हें म्यूल खाते के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ठगी की रकम पहले इन खातों में पहुंचती है। फिर कई खातों में ट्रांसफर कर उसकी कई लेयर बनाई जाती हैं। इसके बाद रकम एटीएम से नकद निकाली जाती है। इससे ठगी और रकम निकालने वाले व्यक्ति को पकड़ पाना मुश्किल हो जाता है। पुलिस की जांच में ऐसे खातों से अलग-अलग राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम के लेनदेन भी सामने आए हैं।

