“हमारे घरों में इतना पानी भर गया था कि घर का सारा सामान डूब गया। बच्चों की कॉपी-किताबें खराब हो गईं। घरों में सांप-बिच्छू घुस गए। लाखों रुपए का नुकसान हो गया। हमें पलायन करना पड़ा। कुछ देर की बारिश से ये हाल हुआ है। इस बार 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक घरों में पानी भरा है।” ये दर्द बरेली की लाजपत नगर कॉलोनी के लोगों का है। मिनी बाईपास स्थित इस पॉश कॉलोनी में बारिश के पांच दिन बाद भी जलभराव है। हालात इतने खराब हैं कि कई परिवार घर छोड़कर दूसरी जगह चले गए हैं। रेजिडेंसी गार्डन में करीब 200 परिवारों को पलायन करना पड़ा था। अब लाजपत नगर में भी यही हालात हैं। 2 तस्वीरें देखिए… BDA अप्रूव्ड कॉलोनी, फिर भी घरों में पानी लाजपत नगर के लोगों का कहना है कि कॉलोनी BDA अप्रूव्ड है। इसके बावजूद यहां का ड्रेनेज सिस्टम तेज बारिश का पानी निकालने में नाकाम साबित हुआ। लोगों ने लाखों रुपए खर्च कर घर बनाए, लेकिन अब उन्हीं घरों को छोड़कर जाने की नौबत आ गई है। स्थानीय निवासी सुनील कुमार खरे ने बताया कि चार-पांच दिन से घरों में पानी भरा हुआ है। अधिकारी, मेयर और नेता मौके पर आ रहे हैं। पानी निकालने के लिए पंप भी लगाए गए हैं, लेकिन घरों से पूरी तरह पानी निकलने तक राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहले भी यहां पानी आता था, लेकिन इस बार हालात बेहद खराब हैं। किला नदी के प्राकृतिक बहाव में अतिक्रमण लाजपत नगर सोसाइटी के अध्यक्ष अरविंद नाथ त्रिपाठी ने बताया कि अभी भी घरों में करीब 4 से 5 इंच पानी भरा है। प्रशासन के सहयोग से पंप, चार-चार टैंकर और बड़ी मशीनों से पानी निकालने का काम किया गया है। इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। उनका आरोप है कि किला नदी के आसपास बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और अनधिकृत कॉलोनियां बसने से पानी की प्राकृतिक निकासी का रास्ता बंद हो गया है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग के 50 साल पुराने नक्शे से नदी की पुरानी स्थिति साफ हो सकती है। अरविंद नाथ त्रिपाठी के मुताबिक, पहले किला नदी की चौड़ाई 40 से 100 मीटर तक थी। अतिक्रमण के कारण कई जगह यह घटकर सिर्फ 4-5 मीटर के नाले जैसी रह गई है। रामगंगा किनारे से ज्यादा शहर में जलभराव स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि रामगंगा के किनारे बसे कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन शहर के बीच की पॉश कॉलोनियां पानी में डूबी हैं। लोगों का कहना है कि इसकी बड़ी वजह शहर का खराब ड्रेनेज सिस्टम और किला नदी की बदहाल स्थिति है। लोगों का कहना है कि अगर बारिश का पानी निकालने के लिए पर्याप्त रास्ता होता तो पांच दिन बाद भी कॉलोनी में पानी नहीं रुका रहता। अब उन्हें डर है कि अगली तेज बारिश हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं। पांच दिन बाद भी राहत अधूरी नगर निगम और प्रशासन की ओर से पानी निकालने के लिए पंप और मशीनें लगाई गई हैं। इसके बावजूद पांच दिन बाद भी कई घरों और गलियों में पानी मौजूद है। ऐसे में लाजपत नगर के लोगों की परेशानी सिर्फ इस बार के जलभराव तक सीमित नहीं है। उन्हें अगली बारिश की भी चिंता सता रही है। लोगों का सवाल है कि जब एक दिन की बारिश में पॉश कॉलोनी बाढ़ जैसे हालात में पहुंच सकती है तो अगली तेज बारिश में क्या होगा? कॉलोनी के लोगों की मांग है कि सिर्फ पंप लगाकर पानी निकालने के बजाय किला नदी की जमीन, अतिक्रमण और शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पूरी जांच कराई जाए।

