UAE AI data center: ईरान की मिसाइलों और ड्रोनों ने खाड़ी देशों को हिला दिया है। मार्च में अमेजन वेब सर्विसेज के दो डेटा सेंटर्स यूएई में और एक बहरीन में क्षतिग्रस्त हो गए। इसको लेकर अब भी कंपनी की सेवाएं बाधित हैं।
अप्रैल में ईरान की सेना ने एक वीडियो जारी कर स्टारगेट यूएई (डाटा सेंटर कंपनी) को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। नक्शे के साथ लिखा था कि उनकी नजर से कुछ नहीं छिपता। यह जगह अल धाफरा एयर बेस के पास है जहां अमेरिकी सैनिक भी हैं।
हमलों के बाद एक्टिव हुआ यूएई
ईरान के हमलों के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने अपने एआई डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू कर दिया है। छह लोगों ने रॉयटर्स को बताया कि 5 गीगावाट का यह प्रोजेक्ट अब एक जगह पर नहीं बल्कि पूरे देश में फैलाकर बनाया जा सकता है। पहले अबू धाबी में 26 वर्ग किलोमीटर का एक बड़ा कैंपस बनाने की योजना थी। अब सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बदलाव हो रहे हैं।
सुरक्षा के नए इंतजाम
अधिकारी एयर डिफेंस सिस्टम लगाने पर विचार कर रहे हैं। ड्रोन और मिसाइल रोकने वाले उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और ब्लास्ट प्रूफ कंक्रीट का इस्तेमाल हो सकता है।
कुछ सुविधाएं जमीन के अंदर या पहाड़ों में बनाने की बात भी चल रही है। यूएई ज्यादातर रेगिस्तानी है, लेकिन रास अल खैमाह और फुजैराह में पहाड़ हैं। संवेदनशील सैन्य डेटा वाले सेंटर वहां रखे जा सकते हैं। बैकअप पावर और कूलिंग सिस्टम भी मजबूत किए जाएंगे।
एआई महाशक्ति बनने का सपना
यह प्रोजेक्ट यूएई की तेल से आगे बढ़ने और एआई पावर हाउस बनने की महत्वाकांक्षा का केंद्र है। जी42 कंपनी इसे लीड कर रही है जो शेख तह्नून बिन जायद अल नह्यान के नियंत्रण में है।
अमेरिका के साथ साझेदारी में यह यूएई-यूएस एआई कैंपस बना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पिछले साल की यात्रा के दौरान इसकी घोषणा हुई थी।
इस बीच, एनवीडिया के चिप्स और अमेरिकी तकनीक के बदले यूएई ने चीन से एआई संबंध कम करने और स्टारगेट प्रोजेक्ट में निवेश का वादा किया है।
पहले चरण में 1 गीगावाट क्लस्टर बनाने का टारगेट
पहला चरण 30 अरब डॉलर का 1 गीगावाट क्लस्टर है। निर्माण शुरू हो चुका है और इस साल 200 मेगावाट क्षमता आनी है। ओरैकल के चेयरमैन लैरी एलिसन ने बताया कि पूरा होने पर यह यूएई की हर सरकारी और व्यावसायिक संस्था को सबसे आधुनिक एआई मॉडल से जोड़ेगा।

