बेतिया में जनता दल (यूनाइटेड) ने भारत-बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि को बिहार के हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार से इसके नवीनीकरण पर पुनर्विचार करने की मांग की है। शुक्रवार को जदयू ने जिला मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान की जानकारी दी। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि अभियान को लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। 12 जिलों में चल रहा संवाद अभियान जदयू के मुताबिक अभियान के तहत गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों—बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार—में लोगों से संवाद किया जा रहा है। अभियान की अगुवाई पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा कर रहे हैं। 5 सितंबर को बक्सर से हुई शुरुआत पार्टी नेताओं ने बताया कि अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई थी। इसके बाद गंगा किनारे के अलग-अलग जिलों में लोगों से बातचीत की जा रही है। अभियान का समापन कटिहार में किया जाना है। बिहार के हित में नहीं है संधि: जदयू जदयू नेताओं ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि का असर बिहार के जल संसाधनों पर पड़ रहा है। पार्टी का दावा है कि बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश की ओर छोड़े जाने से राज्य में सूखे के साथ-साथ बाढ़ की समस्या भी बढ़ रही है। 400 क्यूसेक बहाव, 1500 क्यूसेक पानी छोड़ने का दावा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जदयू की ओर से दावा किया गया कि सूखे मौसम में फरक्का के पास गंगा का बहाव करीब 400 क्यूसेक रहने के बावजूद बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पार्टी के अनुसार, इसका असर बिहार की अंदरूनी नदियों के जल प्रवाह पर भी पड़ता है और पानी बांग्लादेश की ओर चला जाता है। गाद जमने से बढ़ रहा बाढ़ का खतरा जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा हो रही है। इससे नदी का तल ऊपर उठ रहा है और उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि दूसरी ओर सूखे मौसम में संधि के कारण बिहार के कई हिस्सों में पानी की कमी की स्थिति बनती है। राजनीतिक मकसद नहीं, बिहार के हित का मुद्दा: जदयू पार्टी ने कहा कि ‘नीतीश संवाद’ अभियान का उद्देश्य किसी राजनीतिक मकसद से अधिक बिहार के जल संसाधनों और राज्य के हितों से जुड़े मुद्दे को सामने लाना है। जदयू ने केंद्र सरकार से फरक्का जल संधि की समीक्षा कर बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की नीति तय करने की मांग की है। बेतिया में जनता दल (यूनाइटेड) ने भारत-बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि को बिहार के हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार से इसके नवीनीकरण पर पुनर्विचार करने की मांग की है। शुक्रवार को जदयू ने जिला मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान की जानकारी दी। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि अभियान को लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। 12 जिलों में चल रहा संवाद अभियान जदयू के मुताबिक अभियान के तहत गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों—बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार—में लोगों से संवाद किया जा रहा है। अभियान की अगुवाई पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा कर रहे हैं। 5 सितंबर को बक्सर से हुई शुरुआत पार्टी नेताओं ने बताया कि अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई थी। इसके बाद गंगा किनारे के अलग-अलग जिलों में लोगों से बातचीत की जा रही है। अभियान का समापन कटिहार में किया जाना है। बिहार के हित में नहीं है संधि: जदयू जदयू नेताओं ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि का असर बिहार के जल संसाधनों पर पड़ रहा है। पार्टी का दावा है कि बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश की ओर छोड़े जाने से राज्य में सूखे के साथ-साथ बाढ़ की समस्या भी बढ़ रही है। 400 क्यूसेक बहाव, 1500 क्यूसेक पानी छोड़ने का दावा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जदयू की ओर से दावा किया गया कि सूखे मौसम में फरक्का के पास गंगा का बहाव करीब 400 क्यूसेक रहने के बावजूद बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पार्टी के अनुसार, इसका असर बिहार की अंदरूनी नदियों के जल प्रवाह पर भी पड़ता है और पानी बांग्लादेश की ओर चला जाता है। गाद जमने से बढ़ रहा बाढ़ का खतरा जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा हो रही है। इससे नदी का तल ऊपर उठ रहा है और उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि दूसरी ओर सूखे मौसम में संधि के कारण बिहार के कई हिस्सों में पानी की कमी की स्थिति बनती है। राजनीतिक मकसद नहीं, बिहार के हित का मुद्दा: जदयू पार्टी ने कहा कि ‘नीतीश संवाद’ अभियान का उद्देश्य किसी राजनीतिक मकसद से अधिक बिहार के जल संसाधनों और राज्य के हितों से जुड़े मुद्दे को सामने लाना है। जदयू ने केंद्र सरकार से फरक्का जल संधि की समीक्षा कर बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की नीति तय करने की मांग की है।

