जमुई में शहीद अब्दुल हमीद की शहादत पर मुशायरा:बिहार-यूपी के नामचीन कवि और शायरों ने दी प्रस्तुति

जमुई में शहीद अब्दुल हमीद की शहादत पर मुशायरा:बिहार-यूपी के नामचीन कवि और शायरों ने दी प्रस्तुति

जमुई में शहीद वीर अब्दुल हमीद की शहादत दिवस पर सैयद अलाउद्दीन फाउंडेशन ने ऑल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन कराया। यह कार्यक्रम शगुन वाटिका में हुआ। इसमें देशभक्ति, प्रेम, इंसानियत और सामाजिक मुद्दों पर रचनाकारों ने अपनी कविताएं और शायरी सुनाईं। श्रोता देर रात तक बंधे रहे। कार्यक्रम में बिहार और उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों से जाने-माने कवि और शायर पहुंचे। उन्होंने अपनी रचनाओं से खूब तारीफें बटोरीं। इनमें चांदनी शबनम, अदनान प्रतापगढ़ी, हसन प्रतापगढ़ी, शगुफ्ता अंजुम, जीशान भागलपुर, शंकर कैमुरी, महबूब समस्तीपुर, मोइन गिरिडीवी और निगार आरा शामिल थे। किसी की गजल ने लोगों के दिलों को छुआ तो किसी की नज्म और कविता ने सामाजिक मुद्दों को उठाया। मुशायरे में जमुई के स्थानीय रचनाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। कवयित्री डा. रिंकी कुमारी, डा. नूतन कुमारी, वरिष्ठ कवि डा. एसएन झा और डा. मासूम रजा सहित अन्य स्थानीय कवियों और शायरों ने अच्छी रचनाएं सुनाईं। लोगों ने खूब तालियां बजाईं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सैयद अलाउद्दीन थे। बताया गया कि उन्होंने शहीद वीर अब्दुल हमीद के साथ सेवा की थी। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
आयोजकों ने सैयद अलाउद्दीन को बुके और शॉल देकर सम्मानित किया। खास मेहमान परवेज सेट समेत अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। सैयद अलाउद्दीन फाउंडेशन के अध्यक्ष जेड अली भुट्टो के नेतृत्व में यह कार्यक्रम हुआ। मंच संचालन महबूब अकरम काजमी ने अच्छे तरीके से किया। सभी कवियों, शायरों, मुख्य अतिथि और खास मेहमानों को मेडल, मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया गया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद थे। लोगों ने आयोजन की तारीफ की और उम्मीद जताई कि ऐसे साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आगे भी होते रहेंगे। जमुई में शहीद वीर अब्दुल हमीद की शहादत दिवस पर सैयद अलाउद्दीन फाउंडेशन ने ऑल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन कराया। यह कार्यक्रम शगुन वाटिका में हुआ। इसमें देशभक्ति, प्रेम, इंसानियत और सामाजिक मुद्दों पर रचनाकारों ने अपनी कविताएं और शायरी सुनाईं। श्रोता देर रात तक बंधे रहे। कार्यक्रम में बिहार और उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों से जाने-माने कवि और शायर पहुंचे। उन्होंने अपनी रचनाओं से खूब तारीफें बटोरीं। इनमें चांदनी शबनम, अदनान प्रतापगढ़ी, हसन प्रतापगढ़ी, शगुफ्ता अंजुम, जीशान भागलपुर, शंकर कैमुरी, महबूब समस्तीपुर, मोइन गिरिडीवी और निगार आरा शामिल थे। किसी की गजल ने लोगों के दिलों को छुआ तो किसी की नज्म और कविता ने सामाजिक मुद्दों को उठाया। मुशायरे में जमुई के स्थानीय रचनाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। कवयित्री डा. रिंकी कुमारी, डा. नूतन कुमारी, वरिष्ठ कवि डा. एसएन झा और डा. मासूम रजा सहित अन्य स्थानीय कवियों और शायरों ने अच्छी रचनाएं सुनाईं। लोगों ने खूब तालियां बजाईं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सैयद अलाउद्दीन थे। बताया गया कि उन्होंने शहीद वीर अब्दुल हमीद के साथ सेवा की थी। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
आयोजकों ने सैयद अलाउद्दीन को बुके और शॉल देकर सम्मानित किया। खास मेहमान परवेज सेट समेत अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। सैयद अलाउद्दीन फाउंडेशन के अध्यक्ष जेड अली भुट्टो के नेतृत्व में यह कार्यक्रम हुआ। मंच संचालन महबूब अकरम काजमी ने अच्छे तरीके से किया। सभी कवियों, शायरों, मुख्य अतिथि और खास मेहमानों को मेडल, मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया गया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद थे। लोगों ने आयोजन की तारीफ की और उम्मीद जताई कि ऐसे साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आगे भी होते रहेंगे।  

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